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महाराष्ट्र-हरियाणा चुनावों में कांग्रेस को झटका, दोनों राज्यों के ये 2 बड़े नेता हुए नाराज

हरियाणा में जहां पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और दलित चेहरा अशोक तंवर ने पार्टी में सभी पदों से त्यागपत्र देकर अपनी मंशा जाहिर कर दी है, वहीं महाराष्ट्र में पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय निरुपम ने चुनाव प्रचार करने से इनकार कर दिया है.

महाराष्ट्र-हरियाणा चुनावों में कांग्रेस को झटका, दोनों राज्यों के ये 2 बड़े नेता हुए नाराज
हरियाणा में अशोक तंवर और महाराष्ट्र में संजय निरुपम कांग्रेस की राज्य ईकाई से नाराज चल रहे हैं.

मुंबई/नई दिल्ली: महाराष्ट्र (Maharashtra Assembly Elections 2019) और हरियाणा (Haryana Assembly Elections 2019) में हो रहे विधानसभा चुनावों को लेकर जहां बीजेपी और उनके सहयोगी एकजुट होकर मैदान में उतरे हैं, वहीं कांग्रेस (Congress) पूरी तरह से बिखरी हुई दिख रही है. कांग्रेस (Congress) की दोनों राज्यों की ईकाई में व्याप्त कलह टिकट बंटवारे के बाद जगजाहिर हो गया है. हरियाणा में जहां पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और दलित चेहरा अशोक तंवर (Ashok tanwar) ने पार्टी में सभी पदों से त्यागपत्र देकर अपनी मंशा जाहिर कर दी है, वहीं महाराष्ट्र में पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय निरुपम (Sanjay Nirupam) ने चुनाव प्रचार करने से इनकार कर दिया है.

अपने समर्थकों को टिकट दिलाने में पूरी तरह नाकाम रहे कांग्रेस (Congress) नेता संजय निरुपम (Sanjay Nirupam) ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में कांग्रेस (Congress) पार्टी के लिए प्रचार करने से मना कर दिया है. उन्होंने ट्वीट किया, 'ऐसा लगता है कि अब कांग्रेस (Congress) पार्टी मेरी सेवा नहीं चाहती है. मैंने विधानसभा चुनाव के लिए मुंबई में सिर्फ एक सीट मांगी थी, वह भी नहीं दी गई है. हालांकि मैंने कांग्रेस (Congress) आलाकमान को पहले ही बता दिया था कि ऐसी स्थिति में मैं कांग्रेस (Congress) पार्टी के लिए चुनाव प्रचार नहीं करूंगा. यह मेरा आखिरी फैसला है.' निरुपम ने गुरुवार शाम तक प्रेस कांफ्रेंस कर इसी नाराजगी को जाहिर कर दिया. लोकसभा चुनाव के दौरान भी संजय निरुपम (Sanjay Nirupam) को टिकट नहीं दिया गया, जिसके बाद विधानसभा चुनावों में भी उन्हें प्रत्याशी नहीं बनाया गया है. कांग्रेस (Congress) और एनसीपी 288 सदस्यीय विधानसभा में 125-125 सीटों पर चुनाव लड़ने को राजी हुए हैं. इसके अलावा बाकी 38 सीटें गठबंधन के अन्य सहयोगी दलों के लिए छोड़ी गई हैं.

उधर, हरियाणा में कांग्रेस (Congress) के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर (Ashok tanwar) ने प्रत्याशियों के नाम का ऐलान होने से पहले कांग्रेस (Congress) की कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी के दफ्तर के बाहर अपने समर्थकों के साथ काफी हल्ला मचाया, लेकिन उनके इस शक्ति प्रदर्शन को नजरअंदाज कर दिया गया. हरियाणा में टिकट बंटवारे में पूरी तरह से भूपेंद्र सिंह हुड्डा और कुमारी सैलजा की पसंद का ख्याल रखा गया. अशोक तंवर (Ashok tanwar) खुले तौर पर भूपेंद्र सिंह हुड्डा के प्रति विरोध जता चुके हैं.

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केंद्रीय नेताओं ने भी राज्य चुनावों से मुंह मोड़ा
महाराष्ट्र और हरियाणा में होने वाले विधानसभा चुनावों में तीन सप्ताह से भी कम समय रह गया है. कांग्रेस (Congress) भाजपा से सत्ता हासिल करने की इच्छा तो जता रही है, मगर कांग्रेस (Congress) के शीर्ष नेतृत्व ने अभी तक इन राज्यों में चुनाव प्रचार अभियान को आगे नहीं बढ़ाया है. कांग्रेस (Congress) के स्टार प्रचारक माने जाने वाले सभी प्रमुख चेहरे अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने अभी तक महाराष्ट्र या हरियाणा में किसी भी रैली को संबोधित नहीं किया है. इन राज्यों में चुनाव प्रचार की कमान राज्य के नेता ही संभाल रहे हैं.

इन दोनों ही राज्यों में पार्टी के आंतरिक झगड़े सामने आए हैं. हरियाणा में राज्य इकाई के पूर्व अध्यक्ष अशोक तंवर (Ashok tanwar) के समर्थकों ने बुधवार को पार्टी मुख्यालय के बाहर धरना दिया. कांग्रेस (Congress) के एक नेता ने कहा, 'हमें सोनिया और राहुल गांधी जैसे स्टार प्रचारकों की जरूरत है. चुनाव प्रचार के लिए केवल 17 दिन बचे हैं, लेकिन इसके लिए कोई प्रयास नहीं हुआ है.'

इन दोनों राज्यों में 21 अक्टूबर को चुनाव होने हैं, जबकि चुनाव प्रचार 19 अक्टूबर को समाप्त हो जाएगा. हरियाणा में कुमारी शैलजा और भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने गुरुग्राम से चुनाव प्रचार शुरू कर दिया है. कांग्रेस (Congress) महाराष्ट्र में अपनी सहयोगी राष्ट्रवादी कांग्रेस (Congress) पार्टी (राकांपा) के नेता शरद पवार पर ही अधिक भरोसा कर रही है. कांग्रेस (Congress) ने इस राज्य के विभिन्न क्षेत्रों के लिए स्थानीय नेताओं को जिम्मेदारियां सौंपी हैं. इनमें मुकुल वासनिक, राजीव सातव और रजनी पाटिल शामिल हैं. वहीं दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा प्रमुख अमित शाह दोनों राज्यों में पहले ही रैलियां कर चुके हैं.