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कांग्रेस ने दिल्ली की चार सीटों के प्रत्याशियों के नाम फाइनल किए : सूत्र

लोकसभा चुनाव 2019 के लिए दिल्ली में कांगेस और आप के बीच गठबंधन होने की संभावनाएं बहुत कम हैं. 

कांग्रेस ने दिल्ली की चार सीटों के प्रत्याशियों के नाम फाइनल किए : सूत्र
दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष शीला दीक्षित को पूर्वी दिल्ली से टिकट देने पर विचार चल रहा है.

नई दिल्ली: कांग्रेस की केंद्रीय निर्वाचन समिति (सीईसी) ने गुरुवार शाम पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में लोकसभा चुनाव के लिए संभावित उम्मीदवारों के नामों पर चर्चा की. लोकसभा चुनाव 2019 के लिए कांग्रेस ने दिल्ली की सात लोकसभा सीटों में से चार सीटों पर प्रत्याशियों के नाम फाइनल कर लिए हैं. जल्द ही औपचारिक घोषणा की जाएगी. सूत्रों ने यह जानकारी दी. सूत्रों ने बताया, "सभी सातों सीटों के प्रत्याशियों के नाम की घोषणा जल्द की जाएगी. दिल्ली कांग्रेस प्रभारी पीसी चाको ने मीटिंग के बाद यह जानकारी दी. मीटिंग़ से पहले, चाको ने दिल्ली कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष शीला दीक्षित से मुलाकात की. 

सूत्रों के अनुसार, पार्टी ने अभी तक पूर्वी दिल्ली, पश्चिमी दिल्ली और दक्षिण सीट एक प्रत्याशियों के नाम तय कर लिए हैं. उनका कहना है कि पार्टी चांदनी चौक से पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल को, उत्तर पश्चिम सीट से दिल्ली के पूर्व मंत्री राजकुमार चौहान को उतार सकती है. पूर्व दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन को नई दिल्ली सीट से और पूर्व सांसद जेपी अग्रवाल को उत्तर पूर्व सीट से टिकट मिल सकता है.

सूत्रों का कहना है कि दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष शीला दीक्षित को पूर्वी दिल्ली से टिकट देने पर विचार चल रहा है. घटनाक्रम से जुड़े एक सूत्र ने बताया, "आप से गठबंधन होने की संभावना क्षीण होने के बाद शीला को पूर्वी दिल्ली से उतारने की चर्चा शुरू हुई है. उनके बेटे संदीप पर भी विचार किया जा सकता है."  

चाको ने हालांकि दिल्ली में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच गठबंधन को लेकर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया. बुधवार को आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने कहा था कि दिल्ली में कांग्रेस से गठबंधन के दरवाजे बंद हो चुके हैं. बताया जाता है कि कांग्रेस, दिल्ली में आप से गठबंधन करना चाहती थी लेकिन आम आदमी पार्टी हरियाणा और पंजाब में गठबंधन करना चाहती थी, जो कांग्रेस को स्वीकार नहीं था.

 

कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि गठबंधन को लेकर बातचीत सफल नहीं हो पाई क्योंकि आप ऐसी मांग कर रही थी जिसे पूरा करना संभव नहीं था. उन्होंने कहा, "आप आदमी पार्टी की लोकप्रियता समाप्ति की कगार पर है. अब आप उस दौर में नहीं है जब उसने दिल्ली की 70 में से 67 विधानसभा सीटें जीती थीं." 

(इनपुट भाषा से)