चंडीगढ़ के वैज्ञानिकों ने ईजाद किया ऐसा तरीका, प्रदूषण की अब खैर नहीं

देश की राजधानी दिल्ली अक्टूबर और नवंबर महीने में प्रदूषण की मार के कारण सबसे ज्यादा ख़राब स्थिति में पहुंच जाती है. 

चंडीगढ़ के वैज्ञानिकों ने ईजाद किया ऐसा तरीका, प्रदूषण की अब खैर नहीं

चंडीगढ़, ललित शर्मा:  प्रदूषण देश में एक विष्म समस्या बनती जा रही है, बढ़ते प्रदूषण का कारण जानकार बढ़ती गाड़ियां से निकलता धुआँ और इंडस्ट्री और कारखानों में बनता सीमेंट का प्रोडक्शन, बिल्डिंग निर्माण में चल रही और बढ़ती धूल है साथ चल रहे बड़े वाहन और गाड़ियां से निकलती धूल हैं. धूल के छोटे छोटे कण जब हवा में तैरने लगते है और एक धुंध की चादर बनती है उससे सांस लेने में दिक्कत होती है जिसे साधारण भाषा में "स्मोग" कहा जाता है. चंडीगढ़ की CSIO यानी सेंट्रल साइंटिफिक इंस्ट्रूमेंट्स आर्गेनाइजेशन ने एक ऐसा उपकरण बनाया है जिसे "वॉटर स्प्रेयर" नाम दिया गया है जिससे प्रदूषण के छोटे छोटे कणों को आसानी से बैठाया जा सकता है और बढ़ते प्रदूषण से निजात मिल सकती है.

देश की राजधानी दिल्ली अक्टूबर और नवंबर महीने में प्रदूषण की मार के कारण सबसे ज्यादा ख़राब स्थिति में पहुंच जाती है. जानकार बढ़ते प्रदूषण के कई कारण मानते है जिसमें मुख्य कारण धूल के छोटे छोटे कण हैं जो की बढ़ती गाड़ियां से निकलता धूआँ, इंडस्ट्री और कारखानों में बनता सीमेंट की प्रोडक्शन, बिल्डिंग निर्माण में चल रहे काम और तेज़ रफ़्तार से चल रहे बड़े वाहन और गाड़ियां से निकलती धूल हैं.

जब ये कण वातवरण में एक मोटी चादर बनाते है तो उसे स्मोग कहा जाता है जो की सांस लेने के लिए बहुत हानिकारक होती है. इसी समस्या के समाधान के लिए चंडीगढ़ की CSIO यानी सेंट्रल साइंटिफिक इंस्ट्रूमेंट्स आर्गेनाइजेशन ने एक ऐसा उपकरण बनाया है जिसे "वॉटर स्प्रेयर" नाम दिया गया है जिससे प्रदूषण के छोटे छोटे कणों को आसानी से बैठाया जा सकता है.

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CSIO के सीनियर साइंटिस्ट डॉ मनोज कुमार पटेल ने बताया की इस मशीन से पानी को चार्ज किया जाता है और फिर वातावरण में स्प्रे किया जाता है. स्प्रे किये पानी के छोटे छोटे कण बाहर प्रदूषण के charged कणों को अपनी तरफ आकर्षित करते है और उससे पानी के कण और धूल के कण का एक बड़ा गोला बनता है और धरती की ग्रेविटी के कारण वो कण आसानी से ज़मीन पर बैठ जाता है जिससे स्मोग हटाने में मदद मिलती है.