क्या इस बार किरण बेदी की हार का बदला ले पाएगी BJP? जानिए क्या कहते हैं समीकरण

2015 में आम आदमी पार्टी के विधायक एस के बग्गा ने बीजेपी की सीएम कैंडिडेट किरण बेदी को 2277 वोटों से हराया था. 

क्या इस बार किरण बेदी की हार का बदला ले पाएगी BJP? जानिए क्या कहते हैं समीकरण
अगर पिछले चुनावों को छोड़ दिया जाए तो इस सीट पर बीजेपी का दबदबा रहा है.फाइल फोटो

नई दिल्ली: पूर्वी दिल्ली की कृष्णा नगर सीट पर इस बार मुकाबला दिलचस्प बेहद दिलचस्प है. 2015 में इस सीट पर बीजेपी की करारी हार हुई थी. यहां के आम आदमी पार्टी के मौजूदा विधायक एस के बग्गा ने बीजेपी की सीएम कैंडिडेट किरण बेदी को 2277 वोटों से हराया था. आम आदमी पार्टी ने इस बार भी एस के बग्गा पर ही भरोसा जताया है तो कांग्रेस ने 4 बार विधायक रहे डॉक्टर अशोक कुमार वालिया पर दांव खेला है. कांग्रेस के डॉक्टर उम्मीदवार के मुकाबले में बीजेपी ने भी डॉक्टर को ही मैदान में उतारा है, पार्टी ने इस बार डॉक्टर अनिल गोयल पर अपनी नैय्या पार लगाने का जिम्मा सौंपा है.

अगर पिछले चुनावों को छोड़ दिया जाए तो इस सीट पर बीजेपी का दबदबा रहा है. 2008 और 2013 में यहां से बीजेपी से डॉक्टर हर्षवर्धन ने जीत हासिल की थी. पिछली बार इस सीट पर 72 फीसदी मतदान हुआ था और कुल 137415 वोट पड़े थे.

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जानिए, इस सीट पर क्या है समीकरण 
मौजूदा विधायक से लोग नाराज़ हैं. लोगों की शिकायत है वो जनता के बीच आते नहीं हैं और पिछले 5 सालों में यहां काम की रफ्तार बेहद धीमी रही है. यहां का अल्पसंख्यक वोटर विधायक से खास तौर पर नाराज है इनकी शिकायत है कि अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में विकास का काम नहीं हुआ लेकिन केजरीवाल के काम से खुश हैं.

पिछली बार आम आदमी पार्टी को 65,919 वोट मिले थे 
दूसरी तरफ़ बीजेपी के उम्मीदवार डॉक्टर अनिल गोयल लंबे अरसे से इस इलाके में प्रैक्टिस कर रहे हैं और लोगों का उनके साथ जुड़ाव भी है. इसके अलावा बीजेपी पार्टी का पारंपरिक वोटर भी उनके साथ है. पिछली बार आम आदमी पार्टी को 65,919 वोट मिले थे और बीजेपी के खाते में 63,642 वोट आए थे.

पिछली बार कांग्रेस के उम्मीदवार बंसी लाल को 6189 वोट मिले थे, यानी पिछली बार सबसे बड़ी सेंध कांग्रेस के वोट बैंक को लगी थी. लेकिन इस बार डॉक्टर वालिया के मैदान में उतरने की वजह से कांग्रेस का वोट बैंक पहले के मुकाबले बेहतर हो सकता है. जिसका फायदा बीजेपी को मिल सकता है लेकिन अगर केजरीवाल का जादू यहां चला तो लड़ाई और भी दिलचस्प हो सकती है.