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आज भी बुराड़ी के उस घर में पसरा है सन्‍नाटा, जहां 1 साल पहले 11 लोगों ने की थी आत्‍महत्‍या

हालत ये है कि आसपास के घरों में रहने वाले किराएदार भी घर खाली कर चुके हैं. पास रहने वाले एक प्रॉपर्टी डीलर ने बताया कि इस घर में रहने को कोई तैयार नहीं है. 

आज भी बुराड़ी के उस घर में पसरा है सन्‍नाटा, जहां 1 साल पहले 11 लोगों ने की थी आत्‍महत्‍या
बुराड़ी के घर में एक ही परिवार के 11 लोगों ने की थी आत्‍महत्‍या.

नई दिल्‍ली : 11 पाइप, 11 रोशनदान और 11 आत्महत्याएं. ये सुनते ही आपको दिल्ली के संत नगर के बुराड़ी का वो घर जरूर याद आ गया होगा, जहां रहस्यमय तरीके से एक ही घर के सभी 11 लोगों ने 30 जून, 2018 की रात खुदकुशी कर ली थी. ऐसी तस्वीरें जो हर किसी की समझ से परे थीं. क्या थी वजह? क्या उस घर के सबसे छोटे बेटे ललित को लगता था कि उसके दिवंगत पिता की आत्मा उसे परिवार सहित लटक जाने का आदेश दे रही है? जिससे वो मरेंगे नहीं लेकिन अपने दिवंगत पिता से एक बार मिल पाएंगे?

क्या वो मोक्ष का रास्ता था? पढ़ने-लिखने जाने वाले बच्चों, नौकरीपेशा बहन जिसकी सगाई हो चुकी थी और खुशहाल परिवार के बाकी लोग क्यों लटकने को तैयार हुए? ये सब सवाल अनसुलझे ही रह गए. या ये कह लें कि लोगों ने इस कहानी पर यकीन कर लिया कि छोटे बेटे के कहने पर पूरा घर एक ऐसे धार्मिक अनुष्ठान को तैयार हो गया जिसकी परिणीति मौत में हुई? 

इन सवालों के जवाब जो भी हों, ठीक एक साल बाद उस घर की हकीकत कम खौफनाक नहीं है. घर में अजीबोगरीब तरीके से निकाले गए 11 पाइप अभी भी दिखाई देते हैं. घर में खौफनाक सन्नाटा पसरा है. व्यस्त बाजार के ठीक बगल में बने इस मकान में ना कोई रहने वाला, ना इसे कोई खरीदने वाला और ना इसे कोई किराए पर लेना चाहता है.

हालत ये है कि आसपास के घरों में रहने वाले किराएदार भी घर खाली कर चुके हैं. पास रहने वाले एक प्रॉपर्टी डीलर ने बताया कि इस घर में रहने को कोई तैयार नहीं है. आसपास के घरों के दाम भी घट गए हैं. वैसे 130 गज के इस मकान की मार्केट वैल्यू डेढ़ करोड़ बताई जाती है लेकिन कम दामों पर भी खरीदार उपलब्‍ध नहीं है. 

मकान में ग्राउंड फ्लोर पर दुकानें बनी हैं. एक दुकान में दो कारपेंटर प्लाईवुड का काम करते हैं जो कभी कभार इस घर में रात बिता भी लेते हैं, इनमें से एक लड़का शुरू से परिवार के साथ ही रहा है. लेकिन ज्यादातर वक्त ये घर बियाबान ही रहता है. एक और दुकान है जो खाली है. रहने की जगहों पर फर्स्ट फ्लोर और सेकेंड फ्लोर पर पूरी तरह मरघट की शांति और साल भर से जमी धूल नज़र आती है. अचार के डिब्बे, लूडो का गेम और कुछ बर्तन छत पर न जाने कबसे बिखरे हैं. 

तीन भाईयों के इस परिवार के सबसे बड़े भाई दिनेश भाटिया राजस्थान में रहते हैं. 30 जून के हादसे के 4 महीने बाद नवंबर 2018 में केस क्लोजर के साथ ही पुलिस ने मकान उन्हें सौंप दिया था. उनका कहना है कि वो कभी कभार आकर घर में रहते हैं और फिलहाल उनका घर बेचने का कोई इरादा नहीं है. लेकिन आस पास रहने वालों से बात करें तो वो बताते हैं कि घर तो छोड़िए, पूरी गली के किसी मकान को किराए पर रहने वाले आसानी से नहीं मिलते. 

हालांकि ठीक साथ में बने मकान के लोग कहते हैं कि उन्हें डर नहीं लगता और दाम घटने जैसी भी कोई बात नहीं है लेकिन इस बात में उनके खुद के घर की फिक्र और चिंता भी झलकती है. इस गली के तमाम घरों में पीने का पानी सप्लाई करने वाला लड़का, पडोसी हों या गली से गुजरने वाले लोग - एक बात सभी कहते हैं कि इस परिवार के सभी लोग बहुत सरल और अच्छे स्वभाव के थे लेकिन ये किसी को समझ नहीं आया कि एक दिन पहले सबसे हंस बोल रहे और सामान्य नजर आ रहे 11 के 11 लोगों को एक साथ ऐसा क्या हुआ कि सभी का विवेक जाता रहा.