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मुख्य सचिव मारपीट मामला: कोर्ट ने आप विधायकों को दिया एक और झटका

पटियाला हाउस कोर्ट ने शनिवार को आप विधायकों की उस अर्जी को खारिज कर दिया, जिसमें दिल्ली पुलिस को निर्देश देने की मांग की गई थी कि वह चार्जशीट की सामग्री मीडिया के साथ साझा न करे.

मुख्य सचिव मारपीट मामला: कोर्ट ने आप विधायकों को दिया एक और झटका

नई दिल्ली: दिल्ली के मुख्य सचिव अंशु प्रकाश के साथ मारपीट के मामले में आप विधायकों को कोर्ट से झटका लगा है. पटियाला हाउस कोर्ट ने शनिवार को आप विधायकों की उस अर्जी को खारिज कर दिया, जिसमें दिल्ली पुलिस को निर्देश देने की मांग की गई थी कि वह चार्जशीट की सामग्री मीडिया के साथ साझा न करे. मामले की अगली सुनवाई 18 सितंबर को होगी जहां कोर्ट ये तय कर सकता है कि केजरीवाल और आप विधायकों के खिलाफ दाखिल चार्जशीट पर संज्ञान लिया जाए या नहीं.

दरअसल, शनिवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट में दिल्ली पुलिस ने आप नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए हैं. दिल्ली पुलिस का कहा कि आप के नेता कोर्ट की प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं और साथ ही दिल्ली पुलिस की छवि भी ख़राब करने की कोशिश कर रहे हैं.

आपको बता दें कि इससे पहले दिल्ली पुलिस ने पटियाला हाउस कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की थी. दिल्ली पुलिस ने सील कवर में 1533 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी. चार्जशीट में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को आरोपी बनाया गया था, इसके अलावा 11 विधायकों को भी आरोपी बनाया गया था, कुल 13 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाख़िल की गई थी. इन 13 लोगों के खिलाफ आपराधिक साज़िश रचने और 2 विधायक अमानतुल्लाह खान और प्रकाश जरवाल पर मारपीट का आरोप लगाया गया था.एडिशनल चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट समर विशाल की अदालत ने चार्जशीट पर संज्ञान लेने के लिए 25 अगस्त की तारीख तय की थी.

क्या है पूरा मामला
यह घटना 19 फरवरी 2018 की है जब रात करीब 12 बजे मुख्य सचिव को केजरीवाल के आवास पर राशन कार्ड व अन्य मुद्दों पर मीटिंग के लिए बुलाया था. किसी मुख्यमंत्री के आवास पर मुख्य सचिव के पद पर आसीन अफसर से मारपीट का भी यह पहला मामला था.दिल्ली के मुख्य सचिव अंशु प्रकाश का आरोप था कि इस दौरान कुछ आप नेता गुस्से में आ गए और उनके साथ हाथापाई की. उनका आरोप था कि इस पूरी घटना के दौरान मुख्यमंत्री केजरीवाल और उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया वहां मौजूद थे और वह तमाशा देखते रहे.उस दिन के बाद से ही दिल्ली के अफसरों ने सरकार के मंत्रियों से मिलना बंद कर दिया था. वह दफ्तर तो आते हैं पर विधायकों या मंत्रियों की बैठक में नहीं पहुंचते थे. इसी के चलते केजरीवाल व उनके तीन सहयोगियों मनीष सिसोदिया, सत्येंद्र जैन और गोपाल राय ने 10 दिनों तक एलजी दफ्तर में धरना भी दिया था.