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मानहानि मामला: शीला पर लगाया गया 3 लाख रूपये के जुर्माने का आदेश रद्द

दिल्ली उच्च न्यायालय ने राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को राहत देते हुए आपराधिक मानहानि के मामले में पेश नहीं होने के कारण उन पर तीन लाख रूपये का जुर्माना लगाने का निचली अदालत का आदेश आज निरस्त कर दिया। शीला दीक्षित ने भाजपा नेता विजेन्दर गुप्ता के खिलाफ यह मामला दायर किया गया था।

मानहानि मामला: शीला पर लगाया गया 3 लाख रूपये के जुर्माने का आदेश रद्द

नई दिल्ली : दिल्ली उच्च न्यायालय ने राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को राहत देते हुए आपराधिक मानहानि के मामले में पेश नहीं होने के कारण उन पर तीन लाख रूपये का जुर्माना लगाने का निचली अदालत का आदेश आज निरस्त कर दिया। शीला दीक्षित ने भाजपा नेता विजेन्दर गुप्ता के खिलाफ यह मामला दायर किया गया था।

न्यायमूर्ति मनमोहन सिंह ने कहा कि 30 अगस्त के निचली अदालत के आदेश में ऐसे जुर्माने के लिए कोई वजह नहीं बताई गई है। अदालत ने कहा, ‘मेरा मानना है कि मामले के तथ्यों एवं परिस्थितियों के आलोक में यह आदेश कायम रहने वाला नहीं है और इसे रद्द किया जाता है।’ अदालत ने यह आदेश शीला दीक्षित की एक अर्जी पर दिया। इस अर्जी में उन्होंने यह जुर्माना लगाने के निचली अदालत के आदेश को इस आधार पर चुनौती दी थी कि आदेश जारी किए जाने के दौरान वह केरल की राज्यपाल थी।

शीला दीक्षित की ओर से पेश अधिवक्ता महमूद प्राचा ने दलील दी कि वह ना तो जानबूझ कर पेश नहीं हुई, ना ही इरादतन ऐसा किया क्योंकि अगस्त के आखिर में इस्तीफा देने को कहे जाने पर वह अपना कामकाज समेट रही थी। प्राचा ने अदालत को बताया कि शीला दीक्षित ने सितंबर के पहले हफ्ते में इस्तीफा दिया और वह चार सितंबर को दिल्ली पहुंची थी। उन्होंने बताया कि शीला दीक्षित 20 दिसंबर को निचली अदालत में पेश हुई। निचली अदालत ने शीला पर 30 अगस्त 2014 को यह जुर्माना लगाया था।

गौरतलब है कि शीला दीक्षित ने गुप्ता के खिलाफ एक शिकायत कर आरोप लगाया था कि भाजपा नेता ने 2012 के एमसीडी चुनाव प्रचार के दौरान उनके खिलाफ असभ्य भाषा का इस्तेमाल किया था।