दिल्ली हाईकोर्ट ने पति की तलाक अर्जी की मंजूर, पत्नी ने लगाए थे बेवफाई का आरोप

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक व्यक्ति की तलाक की अर्जी मंजूर करते हुए कहा कि पति और उसकी एक विधवा रिश्तेदार के बीच अवैध संबंध होने के पत्नी के झूठे आरोप क्रूरता के बराबर हैं.

दिल्ली हाईकोर्ट ने पति की तलाक अर्जी की मंजूर, पत्नी ने लगाए थे बेवफाई का आरोप
न्यायमूर्ति जे आर मिधा ने पति को तलाक मंजूर करते हुए कहा कि अवैध संबंध के आरोप सच नहीं हैं. .(फाइल फोटो)

नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने एक व्यक्ति की तलाक की अर्जी मंजूर करते हुए कहा कि पति और उसकी एक विधवा रिश्तेदार के बीच अवैध संबंध होने के पत्नी के झूठे आरोप क्रूरता के बराबर हैं. आरोप लगाने वाली महिला अपने पति से अलग रह रही है. न्यायमूर्ति जे आर मिधा ने पति को तलाक मंजूर करते हुए कहा कि अवैध संबंध के आरोप सच नहीं हैं. अदालत ने दंपति के न्यायिक विच्छेदन के निचली अदालत के आदेश को निरस्त कर दिया. दंपति ने 1978 में शादी की थी और वे लंदन में रह रहे थे.

न्यायिक विच्छेदन की ‘‘डिक्री’’ शादी का संबंध खत्म नहीं करती बल्कि दंपति को अपने संबंधों का निरीक्षण करने तथा भविष्य के बारे में सोचने का समय देती है जबकि तलाक शादी का संबंध खत्म कर देता है. पति और पत्नी दोनों ने अलग अलग अपील दायर करके निचली अदालत के आदेश केा चुनौती दी थी. पति तलाक चाहता था क्योंकि उसका कहना था कि उसकी पत्नी उस पर बहुत शक करती है, उस पर अक्सर बेवफाई के आरोप लगाती है, अपशब्द कहती है, नखरे दिखाती है और उसकी मां के प्रति लापरवाह तथा गैरजिम्मेदार है.

महिला ने दावा किया था कि उसने पति के साथ कोई क्रूरता नहीं की बल्कि वह उसे धोखा दे रहा है. अदालत ने पति के पक्ष में फैसला सुनाते हुए क्रूरता के आधार पर उसका तलाक मंजूर कर लिया. 

5 साल से लंबित मामले में दिल्‍ली हाईकोर्ट ने तीन घंटे में सुना दिया फैसला
पिछले पांच सालों से न्याय के लिए विभिन्न अदालतों में भटक रहे एक व्यक्ति को हाईकोर्ट ने महज तीन घंटे की सुनवाई में ही फैसला सुना दिया. दिल्ली हाईकोर्ट ने मुकदमों के फौरन निपटान का उदाहरण पेश करते हुए लंबे समय से लंबित हत्या के एक मामले में महज तीन घंटे में फैसला सुना दिया. न्यायमूर्ति एस. मुरलीधर और न्यायमूर्ति आईएस मेहता ने 29 वर्षीय उस व्यक्ति की अपील पर सुनवाई की जो अपने नाबालिग सौतेले बेटे की हत्या के लिए उम्रकैद की सजा का सामना कर रहा था. अदालत ने उसे हत्या के आरोपों से बरी कर दिया. यह पीठ मामले की फास्ट ट्रैक सुनवाई करने में सक्षम है.

सौतेले बेटे को मारने का आरोप
बता दें कि उत्तर प्रदेश निवासी मोसिन को निचली अदालत ने सितंबर, 2017 में उम्रकैद की सजा सुनाई थी. उस पर ऐसा आरोप था कि उसने अपने तीन साल के सौतेले बेटे के रात में रोने से परेशान होकर उसके सिर पर पत्थर से वार किया जिससे उसकी मौत हो गई. वकील सुमीत वर्मा ने 24 नवंबर, 2017 को हाईकोर्ट में एक अपील दायर करते हुए व्यक्ति की सजा और सजा पर आदेश को चुनौती दी थी.

तीन घंटे में फैसला
हाईकोर्ट ने सुनवाई के पहले दिन निचली अदालत के रिकॉर्ड मंगवाए. अगली सुनवाई पर पीठ ने आरोपी और वादी की दलीलें सुनी तथा तीन घंटे में सुनवाई पूरी कर फैसला सुना दिया. वकील सुमीत वर्मा ने कहा कि अदालत ने इस मामले पर सुनवाई करने और इसका निपटान करने में जो तेजी दिखाई, उससे वह हैरान हैं. पीठ ने कहा कि ऐसा लग रहा है कि निचली अदालत ने इस तथ्य पर गौर नहीं किया जिस कमरे में ये लोग सो रहे थे वह अंदर से बंद नहीं था. अभियोजन पक्ष ने इस संभावना को खारिज नहीं किया उस रात को बच्चा घूमने के लिए बाहर नहीं गया था.

इनपुट भाषा से भी