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दिल्ली में परेशान होकर लोग पलायन करने को मजबूर...मकान के आगे लिखा है 'ये मकान बिकाऊ है'

हिंदू परिवार के मुताबिक गली नम्बर 8 में हिन्दू और मुसलमान अमन और चैन से रहते आये हैं.लेकिन पिछले कुछ महीनों से यहां हिन्दू परिवार के लोग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं. 

दिल्ली में परेशान होकर लोग पलायन करने को मजबूर...मकान के आगे लिखा है 'ये मकान बिकाऊ है'
दिल्ली के ब्रह्मपुरी इलाके में हिंदू परिवारों ने घरों के बाहर लगाई मकान के बिकाऊ होने की प्लेट

नई दिल्लीः पूर्वी दिल्ली के ब्रह्मपुरी इलाके की गली नम्बर 8 में पिछले कुछ महीनों से लोग तनाव के बीच जी रहे हैं. पुलिस फोर्स की तैनाती इस गली में हमेशा रहती है. गली में रहने वाले हिंदू परिवार के मुताबिक गली नम्बर 8 में हिन्दू और मुसलमान अमन और चैन से रहते आये हैं.लेकिन पिछले कुछ महीनों से यहां हिन्दू परिवार के लोग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं. लोगों ने अपने घरों के बाहर मकान के बिकाऊ होने की प्लेट लगा रखी है. हिन्दू परिवार के लोगों ने बताया कि इस गली में एक प्लाट खाली था जिसे मुस्लिम लोगों ने खरीदा, लेकिन उसी प्लॉट के पीछे मंदिर होने की वजह से लोगों ने एतराज किया और फिर वहां मस्ज़िद नहीं बनी.

इस प्लॉट से कुछ घर छोड़कर आगे एक प्लस्टिक की फैक्ट्री चल रही थी, फैक्ट्री बंद होने के बाद मुस्लिम समुदाय के लोग उसे मस्ज़िद बनाने लगे और यहां पिछले 3-4 महीनों से नमाज़ होने लगी जिसका लोगों ने विरोध किया. ये बात पुलिस तक भी पहुंची और फैक्ट्री में ताला लगा दिया. लेकिन फिर ताला खुला और फिर नमाज़ शुरू हो गई. लाऊड स्पीकर भी बजने लगा. गली आगे जाकर बंद है और 8-10 फुट उसकी चौड़ाई है. हिन्दू परिवार के लोगों का कहना है की जुम्मे के दिन बाहर से बहुत से संख्या में लोग आते हैं और गली में ही नमाज़ पढ़ते हैं लेकिन लोगों के विरोध के बाद लॉडस्पीकर हटा दिया. हिन्दू परिवार के लोगों का कहना है की गैरकानूनी तरीके से इसे मस्ज़िद का रूप दिया जा रहा है. जिसकी शिकायत पुलिस को भी की गईं है. 8-9 अगस्त को यहां माहौल खराब हो गया था. यहां रात में पुलिस फोर्स को भी बुलाया गया था.

यहां रहने वालीं विमला गुप्ता ने बताया ' मेरी 69 साल उम्र है 50 साल से यहां रह रही हूं. हमारी गाड़ी खड़ी करने को लेकर लोग झगड़ा करते हैं. और ये झगड़ा मस्ज़िद को लेकर करते हैं. ताकि हम लोग परेशान हों और यहां से जाए..हम तो परेशान हो चुके हैं इसलिए अब मकान बेचकर जाना चाहते हैं...हम मस्ज़िद के लिए मना करते हैं तो हमसे लड़ने आते हैं.

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अभिलाष शर्मा ने ज़ी मीडिया को बताया, 'लोग साजिश के तहत मकान लेते हैं.फैक्ट्री में मस्ज़िद बना रहे हैं...9 अगस्त को बहुत से लोगों ने नमाज़ पढ़ी.. उस दिन बहुत इशू बन गया था.' यहां रहने वाली पूनम शर्मा ने कहा कि हम लोग परेशान हो चुके हैं लोग गली में नमाज पढ़ते हैं. हमारा निकलना मुश्किल हो जाता है. गली बंद है.

सुरेश कुमार ने बताया कि मेरे घर के सामने पहले फैक्ट्री थी जिसे अब मस्ज़िद बनाई जा रही है..यहां पहले फैक्ट्री थी...अब बाहर से लोग आते हैं और नमाज़ पढ़ते हैं...हम लोग बहुत परेशान है...पुलिस को भी शिकायत की है.. अब मकान बेचने के लिए पोस्टर लगाया है.

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वहीं इस मामले पर मुस्लिम परिवार के लोगों का कहना है की हमारा किसी से कोई झगड़ा नहीं है...हमारे घर में बुजुर्ग लोग हैं जो बाहर नहीं जा सकते इसी वजह से यहां मस्ज़िद बना रहे हैं..कुछ बाहर के लोग आकर यहां का माहौल खराब कर रहे हैं.

यहां रहने वाले मोहम्मद नवेद बताते हैं, 'पिछले 28 साल से यहां रह रहा हूं..पतंग बेचने का काम करता हूं.. एक महीने से नमाज हो रही है..पहले यहां साथ में मस्जिद बना रहे थे.. लेकिन कुछ लोगों ने विरोध किया तो यहां से मस्ज़िद आगे चली गई... अब लोगों को वहां भी दिक्कत हो रही है...मेरे घर के पीछे मंदिर है मुझे कोई दिक्कत नहीं है.'

इमरान सैफी कहते हैं, '35 साल से यहां रह रहा हूं यहां रहने वाला पहला मुसलमान हूं.. प्लस्टिक का बिजनेस करता हूं.. लेकिन बाहर के लोग यहां भड़का रहे हैं..यहां और भी हिन्दू रहते हैं किसी को दिक्कत नहीं है कुछ ही लोगों को दिक्कत है...कुछ ही लोगों ने घर के बाहर मकान बिकाऊ के पोस्टर लागए हैं इस गली में 62 मकान है'

आरिफ हुसैन ने बताया कि वह कारपेंटर का काम करते हैं.. ये मस्जिद का मसला है..पहले ये मदरसा था.. अब ये मस्जिद है...इसको लेकर मसला है..लोगों को एतराज है..किसी तरह की कोई परेशानी नहीं है...लॉडस्पीकर में नमाज़ होती है और न ही अज़ान होती है. मोहम्मद शमीम कहते है, 'मैं यहां 8 साल से रह रहा हूं... हम और हिन्दू और मुसलमान आराम से रहते थे...लेकिन अब पता नहीं क्या दिक्कत हो रही है...बुजुर्ग के लिए किया है.'