दिल्ली: सरोगेसी सेंटर की आड़ में चल रहा था बच्चे बेचने का गोरखधंधा, मास्टर माइंड समेत 10 गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के सूत्रों की मानें तो करीब डेढ़ महीने पहले सूचना मिली थी कि एक बड़ा गिरोह सेरोगेसी सेंटर के जरिए बच्चों को बेचने का काम कर रहा है. 

दिल्ली: सरोगेसी सेंटर की आड़ में चल रहा था बच्चे बेचने का गोरखधंधा, मास्टर माइंड समेत 10 गिरफ्तार
प्रतीकात्मक फोटो.

नई दिल्ली: दिल्ली में चल रहे नवजात बच्चे बेचने के गोरखधंधे का खुलासा करते हुए दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक महिला सरगना समेत 10 लोगों को गिरफ्तार किया है. दरअसल, पिछले एक महीने से नवजात बच्चों को बेचने वाले गिरोह की खबर पुलिस को मिल रही थी. पुलिस ने इस मामले में जब जांच आगे बढ़ाई तो एक के बाद एक खुलासे होने शुरू हो गए. पुलिस के सामने वो नाम आए जिसमें वो मास्टर माइंड महिला भी शामिल है जो अपने सरोगेसी सेंटर के जरिए इस पूरे रैकेट को चला रही थी. महिला का पति अर्धसैनिक बल में असिस्टेंट कमांडेंट है.

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के सूत्रों की मानें तो करीब डेढ़ महीने पहले सूचना मिली थी कि एक बड़ा गिरोह सेरोगेसी सेंटर के जरिए बच्चों को बेचने का काम कर रहा है. दरअसल, पुलिस ने सबसे पहले हरियाणा से एक कार के अंदर से एक नवजात शिशु को बरामद किया साथ ही बच्चा ले जा रहे तीन लोगों को भी धर दबोचा. इनमें दिल्ली के उत्तम नगर का राहुल तिवारी और उसकी पत्नी ज्योति तिवारी भी शामिल थे. पुलिस के मुताबिक, संतान न होने के कारण वह 4 लाख रुपए देकर बच्ची खरीदने आए थे. राहुल पेशे से प्रॉपर्टी डीलर है. पुलिस ने बच्ची बेचने आए शख्स को भी गिरफ्तार कर लिया. हालांकि जन्म के तुरंत बाद अस्पताल से बाहर ले जाने और मां का दूध नहीं मिल पाने के कारण 10 दिन के भीतर ही बच्ची की मौत हो गई. 

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20 हजार रुपए में बेची थी बच्ची
पूछताछ में पुलिस को पता चला कि शकीला नाम की महिला ने मिथिला नाम की महिला को नवजात बच्ची 20 हजार रुपए में बेची थी. बच्ची को जहांगीर के जरिए राहुल को बेचा जाना था. पुलिस ने मिथिला और शकीला को भी गिरफ्तार कर लिया. जांच में पता चला कि ये बच्ची दिल्ली की एक नाबालिग लड़की की है. जिसकी चोरी छुपे हरियाणा में डिलीवरी कराई गई थी.

सरोगेसी सेंटर चलाती है मास्टर माइंड 
जांच में पुलिस को बेहद चौंकाने वाली बातें पता चलीं. पुलिस ने बताया कि इस पूरे रैकेट की मास्टरमाइंड कविता टोकस है जो दिल्ली के मुनीरका इलाके में रहती है. वहीं उसका एक सरोगेसी सेंटर भी है. पुलिस के मुताबिक, वो कई आईवीएफ सेंटरों के लैब से मिलीभगत कर स्पर्म और एग चोरी करवाती थी. इसके बाद जरूरतमंत दंपतियों को अपने सरोगेसी सेंटर में बुलाती. अगर जरूरतमंद महिलाएं इस लायक हैं कि वो चोरी के स्पर्म और एग के जरिए बच्चे को जन्म दे सकें तो वो उन्हें स्पर्म और एग मुहैया कराती थी. अगर कोई महिला इस लायक नहीं है तो 1 लाख रुपए में किसी दूसरी महिला की कोख किराए पर लेती थी और बच्चे के जन्म के बाद जरूरतमंद दंपति को 4 से 5 लाख रुपए में अवैध तरीके से बच्चे बेचती थी. पुलिस ने सरोगेसी सेंटर के मैनेजर जितेंद्र दुबे को भी गिरफ्तार किया है.

4 से 5 लाख रुपए में बेचे जाते हैं नवजात
इसके बाद पुलिस ने इस सरोगेसी सेंटर के जरिए बच्चे खरीदने वालों को गिरफ्तार किया. पुलिस ने विकासपुरी के रहने वाले बलवीर दुबे को गिरफ्तार किया. बलवीर ने 5 लाख रुपए में बच्चा खरीदा था. ऐसे ही एक शख्स नरेश कुमार को पुलिस ने गिरफ्तार किया है. नरेश ने ढाई लाख रुपए में नवजात बच्ची खरीदी थी. सतीश महाजन नाम के व्यक्ति ने 4 लाख में एक बच्ची खरीदी. वहीं, पुलिस के मुताबिक, मुंबई के एक दंपति ने भी इस सरोगेसी सेंटर से एक बच्चे की डील की. बच्चा किराए की कोख में पला. लेकिन जब बच्ची जन्मी तो उस दंपति ने बच्ची लेने से मना कर दिया. इसके बाद बच्ची को किसी और को बेच दिया गया. 

बच्चे की चाहत में शुरू किया गोरख धंधा
पुलिस ने बीते गुरुवार को गैंग की सरगना कविता टोकस को भी गिरफ्तार कर लिया. फिलहाल वह पुलिस रिमांड में है. मिली जानकारी के मुताबिक, कविता का पति अर्धसैनिक बल में असिस्टेंट कमांडेंट है. कविता ने पुलिस को बताया कि उसकी कोई संतान नहीं थी. बच्चे की चाहत में वह कई जगहों पर घूमती रही. इसी दौरान बच्चों की अवैध खरीद फरोख्त करने वाले गैंग से उसका संपर्क हुआ. इसके बाद वह भी यह काम करने लगी. पुलिस के मुताबिक अब तक इस गैंग से 6 बच्चे बरामद हो चुके हैं. पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर यह जानने की कोशिश कर रही है कि इस गिरोह ने अब तक कितने बच्चों की खरीद फरोख्त की है. 

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