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दिल्ली: बस में कर रहे हैं सफर तो रहिए होशियार, कहीं आपके पीछे 'मशीन' तो नहीं...

डीसीपी साउथ-ईस्ट चिन्मय बिस्वाल के मुताबिक, 14 जुलाई को एक भूतपूर्व सैनिक देहरादून से दिल्ली आये थे. फिर बदरपुर से आनंद विहार रेलवे स्टेशन की बस में यात्रा कर रहे थे.

दिल्ली: बस में कर रहे हैं सफर तो रहिए होशियार, कहीं आपके पीछे 'मशीन' तो नहीं...
सूचना के बाद मौके पर पहुंची पीसीआर टीम ने सरिता विहार पुलिस की मदद से पीछा कर तीनों आरोपियों को धर दबोचा.

नई दिल्ली: चलती बस में एक पूर्व सैनिक का मोबाइल बदमाशों को चोरी करना महंगा पड़ गया. पीड़ित की शिकायत पर अलर्ट ट्रैफिक पुलिस और पीसीआर ने पीछाकर चार बदमाशों को धर दबोचा. गिरफ्तार बदमाशों की पहचान महावीर उर्फ समीर, विपिन सिंह, मुकेश उर्फ मनोज और अभिषेक उर्फ काकू के रूप में हुई है. उनके कब्जे से चोरी का मोबाइल फोन बरामद हुआ है. 

डीसीपी साउथ-ईस्ट चिन्मय बिस्वाल के मुताबिक, 14 जुलाई को एक भूतपूर्व सैनिक देहरादून से दिल्ली आये थे. फिर बदरपुर से आनंद विहार रेलवे स्टेशन की बस में यात्रा कर रहे थे. पीड़ित मदनपुर खादर लाल बत्ती के पास पहुंचे तो बस में सवार बदमाश उनका मोबाइल निकालने लगे. फिर बदमाश बस से उतरकर भागने लगे. पीड़ित ने पीछा किया लेकिन, वह भागने में सफल रहे. पीड़ित ने ट्रैफिक पुलिस कांस्टेबल सांवरमल को अपनी आपबीती बताई. उसने पीछा कर एक आरोपी विपिन को धर दबोचा. फिर पीसीआर को सूचना दी गई. 

सूचना के बाद मौके पर पहुंची पीसीआर टीम ने सरिता विहार पुलिस की मदद से पीछा कर तीनों आरोपियों को धर दबोचा. उनके पास से चोरी किया गया मोबाइल भी बरामद हो गया और गैंग का मुख्य आरोपी महावीर जिसे मशीन कहते हैं उसे भी गिरफ्तार कर लिया. 

गैंग में मशीन कैसे काम करती है
जब आप भीड़ से भरी बस में सफर करते हैं. उस भीड़ में चार से पांच लोगों वाला जेबकतरों का गैंग शामिल होता है. ये आदमी को देखकर उसको टारगेट करते हैं. गैंग में शामिल मेन आदमी को मशीन कहते हैं और बाकी लोग होते हैं ठेकबाज. जब ये टारगेट ढूंढ लेते हैं तो उस आदमी को पांचों लोग चारों ओर से घेर लेते हैं. फिर उस आदमी को आगे-पीछे से धक्का मारते हैं. इसी बीच गैंग का मेन आदमी यानी मशीन आपकी जेब काट देता है और फरार हो जाता है. इनके बस में बात करने के कोडवर्ड होते हैं. मोबाइल को मक्खी, पर्स को बटेर, दो हजार के नोट वाली गड्डी को लाल थान की कॉपी और पुलिस को मामा बोलते हैं.

जेल से रिहा होने के बाद बना लिया अपना गिरोह 
पूछताछ के दौरान पता चला कि महावीर जिसे मशीन कहते हैं. गिरोह का सरगना है. वह स्कूल ड्रॉप-आउट है और कम उम्र में ही वह शराब और गांजे का आदी हो गया था. वह अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए अपराध की दुनिया में शामिल हो गया. पहले भी वह डकैती, लूट, आर्म्स एक्ट समेत अन्य वारदात में शामिल रह चुका है. जेल से बाहर आने के बाद अपना गिरोह बनाया और वारदात को फिर से अंजाम देने लगा.