#Delhifire: मृतक ने मौत से पहले भाई को फोन कर कहा - ये मेरा आखिरी टाइम है

दिल्ली की अनाज मंडी की एक फैक्ट्री में लगी आग से 43 लोगों के घर में मातम छाया है. फैक्ट्री में जब आग लगी तो उसमें 60 से ज्यादा लोग मौजूद थे और आग के बाद दम घुटने की वजह से ज्यादातर लोगों की मौत हुई. लोग आग के बीच तड़पते रहे लेकिन बाहर निकलने की जगह नहीं मिली. सभी रास्ते बंद थे. ऐसा ही कुछ हाल हुआ मुशर्ऱफ अली का जिसने अपने आखिरी पलों में अपने दोस्त को फोन किया.  

#Delhifire: मृतक ने मौत से पहले भाई को फोन कर कहा - ये मेरा आखिरी टाइम है
मरने वालों में कई मजदूर बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बताए गए हैं.

नई दिल्ली: दिल्ली की अनाज मंडी की एक फैक्ट्री में लगी आग से 43 लोगों के घर में मातम छाया है. अपने बिछुड़ने के गम में परिवारवालों का रो रोकर बुरा हाल है. फैक्ट्री में जब आग लगी तो उसमें 60 से ज्यादा लोग मौजूद थे और आग के बाद दम घुटने की वजह से ज्यादातर लोगों की मौत हुई. लोग आग के बीच तड़पते रहे लेकिन बाहर निकलने की जगह नहीं मिली. सभी रास्ते बंद थे. ऐसा ही कुछ हाल हुआ मुशर्ऱफ अली का जिसने अपने आखिरी पलों में अपने दोस्त को फोन किया.  

मुशर्ऱफ ने अपने दोस्त से कहा, "यहां कोई निकलने का साधन नही है. मैं फंस चुका हूं. मेरा दम घुट रहा है. मैं शायद बचूंगा नहीं. ये मेरा आखिरी टाइम है. मेरे परिवार का ख्याल रखना. मुशर्रफ अली जिसकी हादसे में जान गई है, वह साल से यहां काम कर रहे थे. उनके चार बच्चे हैं. बिजनोर के रहने वाले थे." 

ज्यादातर मौत दम घुटने से
बैग बनाने की फैक्ट्री में दिन भर मेहनत कर थककर सो रहे अभागे मज़दूरों को क्या पता था कि अगली सुबह उनके लिए मौत लेकर आएगी. बिना किसी गलती के 43 लोग आग में स्वाहा हो गए. कुछ की मौत जलकर हुई लेकिन ज़्यादातर की दम घुटने से हुई. अनाज मंडी इलाके में लगी आग की खबर फैलने में देर नहीं लगी. जैसे ही खबर फैक्ट्री में काम करने वाले मज़दूरों के घरवालों तक पहुंची उन्होंने दिल्ली की तऱफ रुख किया. अनाज मंडी पहुंच कर फंसे हुए परिवारों की तलाश शुरू की. कुछ लोग अस्पतालों का चक्कर लगाते रहे. ये रोती बिलखती महिलाएं अपने पिता की तलाश करती रहीं और अपनी किस्मत को कोसती रहीं. आंखों से आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे. 

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आग में झुलसे ये वो लोग थे जो देश के दूरदराज़ के इलाकों से चार पैसे कमाने राजधानी आए थे. मज़दूरी करके अपने परिवार का पेट पालने. अपनी ज़िन्दगी बेहतर बनाने और कुछ पैसे बचाकर बहन बेटी की शादी करने के लिए. इसके लिए वो दिन रात मेहनत कर रहे थे. नरक से भी बदतर हालात में रात गुज़ार रहे थे जिस फैक्ट्री में काम करते उसी में सोते. वो जगह ऐसी थी जहां सांस लेना भी मुश्किल था. 

फिल्मिस्तान इलाके की अनाज मंडी में छोटी-छोटी फैक्ट्रियां चलती थीं. यहां काम करने वाले कई लोग रात को सोते भी यहीं थे. मरने वालों में कई मजदूर बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बताए गए हैं. चश्मदीदों के मुताबिक शार्ट सर्किट के चलते आग लगी थी जिसमें 40 से ज्यादा जिंदगियां आग में झुलसकर खाक हो गई.