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1200 अफसरों ने देशभर में 336 ठिकानों पर एक साथ की छापेमारी, एक्सपोर्टरों के फर्जी क्लेम का हुआ खुलासा

DGGI को जानकारी मिली थी कि बहुत सारे निर्यातक देश से बाहर सामान भेज रहे हैं, लेकिन असल में सब कुछ नकली है. यानी कोई भी सामान निर्यात नहीं किया जा रहा था, सिर्फ नकली बिल और सामान दिखा कर IGST का फयदा लिया जा रहा था.

1200 अफसरों ने देशभर में 336 ठिकानों पर एक साथ की छापेमारी, एक्सपोर्टरों के फर्जी क्लेम का हुआ खुलासा

नई दिल्ली: DRI और DGGI ने डेटा एनालिटिक्स के आधार पर पता लगाया है कि कुछ निर्यातक भारत से बाहर माल का निर्यात कर रहे हैं, लेकिन कर का भुगतान (IGST) लगभग पूरी तरह से इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) से किया जा रहा है, जो फर्जी आपूर्ति के आधार पर लिया जाता है. इसके अलावा ऐसे IGST भुगतान या निर्यात पर रिफंड के रूप में दावा किया गया है.

दरअसल, DGGI को जानकारी मिली थी कि बहुत सारे निर्यातक देश से बाहर सामान भेज रहे हैं, लेकिन असल में सब कुछ नकली है. यानी कोई भी सामान निर्यात नहीं किया जा रहा था, सिर्फ नकली बिल और सामान दिखा कर IGST का फयदा लिया जा रहा था. इस बात की जानकारी मिली तो निर्यातकों के डाटा को खंगाला गया और उसमें जानकारी मिली की करीब 3500 करोड़ रुपये के निर्यात को दिखा कर करीब 470 करोड़ रुपये का ITC (Input Tax Credit) का फायदा लिया गया. DRI और DGGI ने इस मामले में बहुत सारे निर्यातको से पुछताछ भी की और बयान भी दर्ज किये हैं. इसके अलावा करीब 450 करोड़ रुपये के फर्जी ITC का और पता लगाया जा रहा है, दस्तावेजों को खंगाला जा रहा है.

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DGGI और DRI वडोदरा रेल कंटेनर डिपो, मुंद्रा पोर्ट और नाहवा शेवा पोर्ट पर निर्यात के लिये रखे हुये सामान की भी जांच कर रहे हैं, ताकी असली फर्जीवाड़े का पता लगाया जा सके. 1200 अफसरों ने एक साथ दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, तेलंगाना, गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, पंजाब, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ के 336 जगहों पर एक साथ छापेमारी की. इसके बाद इतने बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ.