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केजरीवाल ने ईवीएम पर फिर उठाया सवाल, EC ने कहा- नहीं की जा सकती गड़बड़ी

इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) की विश्वसनीयता को लेकर चुनाव आयोग और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के बीच जुबानी जंग थमती नहीं दिख रही है. केजरीवाल ने रविवार को एक बार फिर ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए जबकि चुनाव आयोग ने कहा कि निर्माण के दौरान भी ईवीएम मशीनों से हेरफेर नहीं की जा सकती.

केजरीवाल ने ईवीएम पर फिर उठाया सवाल, EC ने कहा- नहीं की जा सकती गड़बड़ी
ईवीएम को लेकर केजरीवाल और आयोग फिर आमने-सामने. फाइल फोटो

नई दिल्ली : इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) की विश्वसनीयता को लेकर चुनाव आयोग और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के बीच जुबानी जंग थमती नहीं दिख रही है. केजरीवाल ने रविवार को एक बार फिर ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए जबकि चुनाव आयोग ने कहा कि निर्माण के दौरान भी ईवीएम मशीनों से हेरफेर नहीं की जा सकती.

निर्वाचन आयोग ने ईवीएम को अविश्वसनीय बताये जाने के आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि ईवीएम मजबूत एवं छेड़छाड़ की आशंका से रहित होते हैं और यहां तक कि निर्माण के दौरान भी इनसे हेरफेर नहीं की जा सकती.

एमसीडी चुनाव में राजस्थान से लाए जाएंगी ईवीएम

राजस्थान के धौलपुर में उपचुनाव के दौरान कुछ ईवीएम से छेड़छाड़ के बारे में मीडिया में आई खबरों का जिक्र करते हुए केजरीवाल ने यह मुद्दा उठाया. उन्होंने दावा किया कि अगामी दिल्ली नगर निगम चुनाव में इस्तेमाल के लिके ईवीएम राजस्थान से लाए जा रहे हैं.

उन्होंने कहा, ‘क्या एमसीडी चुनाव तटस्थ होगा? चुनाव आयोग इन मशीनों की जांच क्यों नहीं करता? इस स्थिति में चुनाव का क्या मतलब है?’ मुख्यमंत्री ने सिलसिलेवार ट्वीट में कहा, ‘गड़बड़ ईवीएम में सिर्फ भाजपा को वोट क्यों पड़ रह हैं? उनके सॉफ्टवेयर बदल दिए गए हैं. चुनाव आयोग हमें इनमें से एक ईवीएम दे, हम साबित कर देंगे कि उससे छेड़छाड़ की गई है.’ इससे पहले केजरीवाल ने दावा किया था कि चुनाव के लिए उत्तर प्रदेश से ईवीएम लाए जा रहे हैं, लेकिन इस आरोप को राज्य चुनाव आयोग ने खारिज कर दिया था.

इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) की विश्वसनीयता को लेकर विपक्ष के जोर शोर से सवाल खड़ा करने पर आयोग ने बताया कि अपना विचार रखने के लिये उसने ‘अक्सर पूछे जाने वाले सवालों’ (एफएक्यू) की एक सूची सार्वजनिक की है.

ईवीएम पर चुनाव आयोग ने दी सफाई

हाल में आयोग ने मशीनों का बचाव करते हुए दो बयान जारी किये थे और मशीनों की विश्वसनीयता पर संदेह करने वालों के जवाब में यह एफएक्यू उसका तीसरा प्रयास है. एफएक्यू में जिन प्रश्नों का उल्लेख है, उनमें पहला सवाल है : मशीन को हैक किया जा सकता है या नहीं? आयोग का जवाब है : नहीं.

इसने बताया कि ईवीएम का एम1 मॉडल (मॉडल एक) वर्ष 2006 तक निर्मित हुआ था और इसमें ऐसे सभी जरूरी तकनीक शामिल किये गये थे जिसे कुछ लोगों के दावों के विपरीत कोई हैक नहीं कर सकता था. ईवीएम के एम2 मॉडल को वर्ष 2006 के बाद निर्मित किया गया था और वर्ष 2012 तक इसमें अतिरिक्त सुरक्षा सुविधाएं शामिल की गयी थीं.

चुनाव पैनल ने कहा, ‘अब ईसीआई-ईवीएम कम्प्युटर संचालित नहीं हैं. ये ऐसी मशीन हैं जिन्हें ना तो इंटरनेट से और ना ही अन्य नेटवर्क से जोड़ा जाता है. इसलिए किसी रिमोट उपकरण से इसे हैक किये जाने की कोई संभावना नहीं है. साथ ही इसमें कोई फ्रिक्वेंसी रिसीवर या वायरलेस के लिये डिकोडर अथवा अन्य किसी गैर-ईवीएम यंत्र या उपकरण से जोड़ने के लिये कोई बाह्य हार्डवेयर पोर्ट नहीं होता.’ 

आयोग से पूछा अमेरिका ने ईवीएम क्यों नहीं अपनाया? 

बहरहाल, आयोग ने ईवीएम निर्माताओं द्वारा इसमें हेरफेर की आशंका वाले सुझावों को भी खारिज कर दिया. आयोग ने कहा, ‘यह संभव नहीं है क्योंकि वर्ष 2006 से ईवीएम अलग अलग वर्ष में निर्मित की गयीं और अलग अलग राज्यों में भेजी गयीं. निर्माता -- ईसीआईएल और बीईएल कई साल पहले यह नहीं जान सकती थीं कि किसी खास निर्वाचन क्षेत्र में कौन उम्मीदवार चुनाव लड़ेगा और मतपत्र इकाई पर उम्मीदवारों का क्रम क्या होगा.’ आयोग से यह पूछा गया कि आखिर अमेरिका और यूरोपीय संघ जैसे विकसित देशों ने ईवीएम को क्यों नहीं अपनाया और कुछ ने इसका इस्तेमाल बंद क्यों कर दिया.

इसके जवाब में आयोग ने कहा कि इन मशीनों के साथ दिक्कत इसलिए आयी क्योंकि इन देशों ने इन्हें कम्प्युटर नियंत्रित बनाया था और नेटवर्क से जोड़ा था जिसके चलते हैकिंग की आशंका बढ़ गयी थी. उनके संबंधित कानूनों में समुचित सुरक्षात्मक उपाय मौजूद नहीं थे. इसलिए उनकी अदालतों ने ईवीएम का इस्तेमाल रोक दिया.

(एजेंसी इनपुट के साथ)