दिल्ली: सड़क हादसे में शिकार लोगों के लिए आए 'फरिश्ते', बचाई 3000 लोगों की जान

विशेषज्ञों के मुताबिक दुर्घटना के बाद का एक घंटा सबसे ज़्यादा महत्वपूर्ण होता है और इस दौरान इलाज मिल जाये तो जान बचने की 80 फीसदी संभावना होती है.

दिल्ली: सड़क हादसे में शिकार लोगों के लिए आए 'फरिश्ते', बचाई 3000 लोगों की जान

नई दिल्ली: रोड एक्सीडेंट के शिकार को देखकर क्या आपके मन में भी उसकी मदद का ख्याल आता है. लेकिन पुलिस केस के डर और अस्पतालों के झंझट से बचने के चक्कर में कई लोग मदद का हाथ बचाने से हिचकिचाते रहे हैं. लेकिन दिल्ली की तस्वीर अब बदल चुकी है. इसी साल फरवरी में लांच हुई योजना दिल्ली के फरिश्ते के तहत 3000 लोग वक्त रहते अस्पताल पहुंचाए जा सके हैं. सड़क हादसे के शिकार व्यक्ति की मदद कीजिए और फरिश्ते की भूमिका निभाईए. मरीज़ को अस्पताल पहुंचाइए और ईनाम पाइए. दिल्ली सरकार की इस योजना के बाद एक्सीडेंट के शिकार लोगों की जान बचाने का रास्ता आसान हो गया है.

दिल्ली में अब सड़क हादसे के शिकार लोगों की मदद करने वाले आगे आने लगे हैं. दिल्ली के मयूर विहार में रहने वाली रीता सिंह का हाल ही में स्कूटी चलाते वक्त एक्सीडेंट हो गया था, लेकिन सड़क पर बेहोश पड़ी रीता को वक्त पर अस्पताल पहुंचाने वाले मदद के हाथ भी बढ़े और रीता का मुफ्त इलाज भी संभव हो सका.

रीता अपनी स्कूटी से लक्ष्मी नगर रेड लाइट क्रॉस कर रही तीं कि तभी रॉंग साइड से आ रही एक कार ने उनकी स्कूटी को टक्कर मार दी. टक्कर क बाद रीटा वहीं रोड पर गिर पड़ीं और बेहोश हो गयीं. बेहोशी की हालत में ही उन्हें पास ही के एक नर्सिंग होम ले जाया गया जहां से उन्हें मैक्स अस्पताल रेफर कर दिया गया. वहीं पर उन्हें और उनके परिवार को दिल्ली सरकार की 'फरिश्ते दिल्ली के' स्कीम के बारे में पता चला. 

इस स्कीम की वजह से रीता का अस्तपाल में पूरी तरह फ्री इलाज हुआ. चोट लगने के बाद रीता बेहोश हो गयी थी, आज रीता मानती है कि अगर उन्हें कोई समय से अस्पताल न पहुंचाता तो शायद स्थितियां और ज्यादा खराब हो सकती थी. रीता का मानना है कि दिल्ली सरकार की स्कीम की वजह से ही आज उनकी जान बची है.

रीता को खुद भी इस योजना के बारे में ज़्यादा पता नहीं था, अस्पताल में जा कर ही उन्हे इस योजना के बारे में पता चला. मैक्स जैसे प्राइवेट अस्पताल में भी उनसे इलाज के लिये कोई भी पैसा नहीं लिया गया. इस योजना के तहत मरीज़ और उसे अस्पताल पहुंचाने वाले व्यक्ति का पहचान पत्र जमा किया जाता है.

इलाज चाहे सरकारी अस्पताल में हो या फिर प्राइवेट अस्पताल में, सारा खर्च सरकार उठाती है. घायल को अस्पताल पहुंचाने वालों को दिल्ली सरकार की तरफ से 2000 रुपये का इनाम भी दिया जाता है. हालांकि मदद करने वाले हज़ारों लोगों में से ज़्यादातर लोग इनाम की राशि लेने से मना कर देते हैं. दिल्ली में हर साल करीब आठ हज़ार दुर्घटनाएं होती हैं.

अक्सर लोग कानूनी कर्रवाई के डर से दुर्घटना में घायल लोगों को अस्पताल ले जाने से हिचकते हैं या फिर खर्च के डर से सरकारी अस्पताल की ओर जाने की कोशिश करते है और इसी में कई बार इतनी देर हो जाती है कि मरीज़ की जान तक चली जाती है. विशेषज्ञों के मुताबिक दुर्घटना के बाद का एक घंटा सबसे ज़्यादा महत्वपूर्ण होता है और इस दौरान इलाज मिल जाये तो जान बचने की 80 फीसदी संभावना होती है.

दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन के मुताबिक अस्पताल ऐसे मरीज़ को देने से मना न करें इसके लिये भी खास निर्देश जारी किये गये हैं, इलाज देने से मना करने पर उस अस्पताल का लाइसेंस भी रद्द किया जा सकता है.