निर्भया केस के बाद केंद्र ने जारी किया था फंड, तीन राज्य 50% भी नहीं कर पाए खर्च

देश में महिलाओं की सेफ्टी और सिक्योरिटी को लेकर इंतजाम करने को लेकर बात हो रही है.

निर्भया केस के बाद केंद्र ने जारी किया था फंड, तीन राज्य 50% भी नहीं कर पाए खर्च
(फाइल फोटो)

चंडीगढ़: हैदराबाद में रेप केस और हत्या के मामले के बाद अब पूरे देश में महिलाओं की सेफ्टी और सिक्योरिटी को लेकर इंतजाम करने को लेकर बात हो रही है. लेकिन निर्भया केस के बाद केंद्र ने जो फंड जारी किए थे, वे तक खर्च नहीं किए जा रहे हैं. एडवोकेट अजय जग्गा ने पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक वी पी सिंह बदनोर को पत्र लिखा है कि महिलाओं की सेफ्टी और सिक्योरिटी के लिए कई काम इन फंड़स  से किए जाने थे लेकिन हाल ही में मिनिस्ट्री ऑफ वुमन एंड चाइल्ड डेवलपमेंट की जब मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेर्यस के साथ मीटिंग हुई तो उसमें बताया गया कि चंडीगढ़ को 7.46 करोड़ रुपए निर्भया फंड में जारी किए गए थे. लेकिन कमेटी ने सिर्फ 2.60 करोड़ रूपए के यूटीलाइजेशन को लेकर ही जानकारी दी है.

एडवोकेट अजय जग्गा ने बताया कि  चंडीगढ़ ही नहीं, पंजाब और हरियाणा भी महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं है. इन दोनों ही राज्यों में भी निर्भया फंड का इस्तेमाल 50 प्रतिशत भी नहीं हुआ है. पंजाब को निर्भया फंड के तहत 20.47 करोड़ रुपये आवंटित हुए लेकिन इसमें से केवल तीन करोड़ ही खर्च किए गए. जो कुल फंड का सातवां हिस्सा है. इसी तरह से हरियाणा को 16.71 करोड़ रुपये मिले जिसमें से हरियाणा ने 6.6 करोड़ रुपये ही खर्च किए.उन्होनें कहा यह फंड महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया था. जिसे महिलाओं की सुरक्षा पुख्ता करने के लिए खर्च करना था. महिलाओं को जागरूक करने जैसे कार्यों पर इसे खर्च किया जाना था. फिलहाल राज्यपाल और प्रशासक वी पी सिंह बदनोर की तरफ से शिकायत पर जबाब देते हुए कहा गया कि सलाहकार को उचित कदम उठाने के निर्देश दे दिए गए हैं.

सोशल एक्टीविस्ट रीटा कोहली ने बताया यह हैरानी की बात है क़ि चंडीगढ़ जैसे शहर में कोई महिला कमीशन ही नहीं है. उन्होंने कहा करोड़ों फंड महिलाओं की सुरक्षा और जागरूकता के लिएअलाॅट किया गया लेकिन उसका आधा हिस्सा भी खर्च नहीं होता ऐसे में कैसे उम्मीद करें कि महिलाओं की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए काम हो रहा है. हमें सारी चीजे तब याद आती है जब कोई घटना होती है मानीटिरिंग होनी चाहिए कि फंड्स को सही मायने में महिलाओं एवं युवतियों की सुरक्षा के लिए इस्तेमाल किया जाए.

युवतियां भी खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करती. पंजाब विश्वविघालय में पढ़ रही युवतियों का कहना है कि सिर्फ उसी मामले में जस्टिस के लिए आवाज़ क्यों उठती है जिसे मीडिया कवर करता है जबकि दुष्र्कर्म का हर मामला संगीन और गंभीर है उन्होने कहा कि हर मामले में जल्द से जल्द पीडिता औऱ उसके परिवार को इंसाफ मिलना चाहिए.

चंडीगढ़ में भी महिलाओं की सुरक्षा की बात करें तो नियमित अंतराल के बाद ऐसी घटनाएं घटती रही हैं जिसे पूरे शहर को शर्मिंदा होना पड़ा है. दिसंबर 2016 में पिकाडली चौक से रात को युवती ने ऑटो लिया.ऑटो में पहले से ही दो लड़के मौजूद थे. इसके बाद सेक्टर-29 स्लिप रोड के साथ लगते जंगल में युवती से गैंगरेप किया. इसके ठीक एक साल बाद फिर से नवंबर 2017 में सेक्टर-52 के जंगल में युवकी को अगवा कर गैंगरेप किया. हैरानी की बात यह रही कि इन दोनों ही मामलों में एक दोषी मोहम्मद इरफान शामिल रहा. पकड़े नहीं जाने से उसके हौसले बुलंद थे. यहीं कारण है कि पूरा देश दुष्र्कर्म मामले के आरोपियों को सख्त से सख्त सज़ा देने की मांग करता है.