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Haryana assembly election result 2019 : हरियाणा में BJP बना सकती है सरकार, दुष्यंत चौटाला दे सकते हैं समर्थन: सूत्र

हरियाणा विधानसभा चुनाव में अब तक आए रिजल्ट (Haryana assembly election result 2019) में साफ हो गया है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) सबसे बड़े दल के रूप में उभरकर सामने आई है. सूत्र बताते हैं कि जननायक जनता पार्टी (JJP) के प्रमुख दुष्यंत चौटाला (Dushyant Chautala) ने बीजेपी को समर्थन देने का फैसला लिया है.

Haryana assembly election result 2019 : हरियाणा में BJP बना सकती है सरकार, दुष्यंत चौटाला दे सकते हैं समर्थन: सूत्र
हरियाणा में बीजेपी को सपोर्ट कर सकते हैं दुष्यंत चौटाला.

नई दिल्ली: हरियाणा विधानसभा चुनाव में अब तक आए रिजल्ट (Haryana assembly election result 2019) में साफ हो गया है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) सबसे बड़े दल के रूप में उभरकर सामने आई है. सूत्रों से खबर आ रही है कि बीजेपी हरियाणा में सरकार बनाने जा रही है. बताया जा रहा है कि बीजेपी सबसे बड़े दल होने के नाते पहले सरकार बनाने का दावा पेश करेगी. सूत्र बताते हैं कि जननायक जनता पार्टी (JJP) के प्रमुख दुष्यंत चौटाला (Dushyant Chautala) ने बीजेपी को समर्थन देने का फैसला लिया है. हालांकि अभी तक इस पर किसी भी दल की ओर से आधिकारिक बयान नहीं आया है.

अब तक आए चुनाव परिणाम के मुताबिक बीजेपी 40 सीटें जीतती दिख रही है. वहीं कांग्रेस 30 और जेजेपी के खाते में 10 सीटें जाती हुई दिख रही है. इनेलो की ओर से अकेले अकेले अभय चौटाला चुनाव जीत चुके हैं. वहीं निर्दलीय और अन्य छोटे दलों के कुल 10 प्रत्याशी जीतते दिख रहे हैं. हरियाणा में बहुमत के लिए 46 विधायकों का समर्थन चाहिए. इस हिसाब से बीजेपी को केवल 6 विधायकों की जरूरत है. वहीं कांग्रेस को सरकार बनाने के लिए दुष्यंत चौटाला की पार्टी के 10 विधायकों के अलावा निर्दलीय से 6 विधायक जुटाने होंगे.

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मालूम हो कि मनोहर लाल खट्टर की मौजूदा सरकार में खुद सीएम के अलावा केवल एक मंत्री अनिल कुमार विज चुनाव जीत पाए हैं. जबकि बीजेपी ने 75+का नारा दिया था.

इससे पहले हरियाणा चुनाव कें कांग्रेस की कमान संभालने वाले पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने प्रेस कांफ्रेंस कर अपील की है कि विपक्षी दल उनके साथ आएं और बीजेपी को सत्ता में आने से रोकें. हालांकि राजनीति के जानकार मानते हैं कि दुष्यंत चौटाला का भूपेंद्र सिंह हुड्डा का समर्थन करना थोड़ी टेढ़ी खीर है. क्योंकि दोनों नेता जाटों की राजनीति करते रहे हैं और एक दूसरे के खिलाफ ताबड़तोड़ आक्रमण करते रहे हैं. ऐसे में दुष्यंत के लिए बीजेपी के साथ जाना ज्यादा मुफीद माना जा रहा है.