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पराली जलाने पर पूरी तरह लगाएं रोक, राज्य सरकारें उठाएं हर मुमकिन कदम: हाईकोर्ट

पराली जलाने की वजह से हवा प्रदूषित हो रही है. यही कारण है कि हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि शंकर झा और जस्टिस राजीव शर्मा की खंडपीठ ने भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट कर दिया है कि पराली जलाने पर पूरी तरह से रोक लगाई जाए.

पराली जलाने पर पूरी तरह लगाएं रोक, राज्य सरकारें उठाएं हर मुमकिन कदम: हाईकोर्ट
(प्रतीकात्मक तस्वीर)

चंडीगढ़: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब और हरियाणा में किसानों द्वारा जलायी जा रही पराली को लेकर सख्ती दिखाई है और राज्य सरकारों को सख्त निर्देश दिए हैं कि पराली जलने पर पूरी तरह रोक लगाई जाए इसके लिए हर मुमकिन कदम उठाए जाएं. हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने टिप्पणी करते हुए कहा कि किसानों को जब हर चीज पर सब्सिडी दी जाती है तो वे सहयोग क्यों नहीं कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि क्यों किसान हर बार चाहते हैं कि सरकारें उन्हें स्पेशल गेस्ट की तरह तवज्जो दें. कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा है कि किसान पराली न जलाएं इसको लेकर वे क्या स्कीमें लेकर आएं हैं. केंद्र सरकार को जबाब दाखिल करने के लिए हाईकोर्ट ने 4 हफ्ते का वक्त दिया है.

पराली जलाने की वजह से हवा प्रदूषित हो रही है. यही कारण है कि हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि शंकर झा और जस्टिस राजीव शर्मा की खंडपीठ ने भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट कर दिया है कि पराली जलाने पर पूरी तरह से रोक लगाई जाए. उन्होंने कहा जो पराली जलाते हैं, सरकार चाहे तो उन पर क्रिमिनल एक्शन भी ले सकती है. यानि कि उन पर एफआईआर दर्ज करने पर कोई पाबंदी नहीं लगाई गई है. हालांकि किसानों पर इनवायरमेंट कंपनसेशन के नाम पर जुर्माना लगाने पर कोर्ट ने अभी भी रोक जारी रखी है. चीफ जस्टिस ने टिप्पणी करते हुए कहा कि किसानों को बिजली, पानी और हर चीज पर सब्सिडी दी जाती है इसके बावजूद वे पराली जला रहे हैं. उनको अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी.

उन्होंने कहा धान की फसल सिर्फ पंजाब में ही नहीं होती साउथ में भी होती है. लेकिन, वहां इस तरह से पराली नहीं जलायी जाती है. उन्होंने कहा वैसे तो पंजाब के लोग स्टडी और नौकरी के लिए विदेश जाने के लिए लाखों रूपए खर्च कर देते हैं. लेकिन, साउथ में किसान पराली को नहीं जलाते इस विषय को स्टडी करने के लिए थोड़े रुपए खर्च करके नहीं जा सकते. हालांकि इस पर किसानों की तरफ से कोर्ट में पेश हुए वकील चरणपाल सिंह बागड़ी ने कहा कि पंजाब में किसानों पर बहुत कर्जा है और वे आत्महत्या कर रहे हैं. चीफ जस्टिस ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसे तो उद्योगपतियों पर करोड़ों का कर्जा होता है. लेकिन, आत्महत्या कोई समाधान नहीं है.

किसानों की तरफ से कोर्ट में पेश हुए वकील चरणपाल बागड़ी ने ज़ी मीडिया से बातचीत करते हुए बताया कि हाईकोर्ट ने इस मामले में मिनिस्ट्री आफ इनवायरमेंट फॉरेस्ट एंड क्लाइमेट चेंज को पार्टी बनाया है और उनसे पूछा है कि आखिर केंद्र सरकार ने पराली न जले इसको लेकर कौन से प्लान तैयार किए हैं और कौन सी स्कीमें लेकर आए हैं. इसके लिए कोर्ट ने केंद्र सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए 4 हफ्ते का वक्त दिया है. हालांकि केंद्र सरकार के वकील सत्यपाल जैन ने कोर्ट को बताया कि पिछले साल पंजाब, हरियाणा, यूपी, दिल्ली सहित सारे रीजन को 500 करोड़ रुपए दिए गए थे. इस बार केंद्र सरकार ने क्या कदम उठाए हैं इसको लेकर वो 25 नवंबर तक हलफनामा दाखिल करेंगे.

मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने हरियाणा सरकार को भी जबाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं. फिलहाल मामले की सुनवाई 25 नवंबर के लिए स्थगित कर दी गई है.