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हरियाणा के किसानों के लिए खुशखबरी, जंगली जानवरों के फसल नुकसान पर मिलेगा मुआवजा

जंगली जानवरों द्वारा किसानों की फसल का नुकसान करने पर किसानों को मुआवजा मिलेगा. हरियाणा सरकार ने वन सीमा के एक किलोमीटर दायरे में फसल के नुकसान पर मुआवजा देने का प्रावधान बनाया है.

हरियाणा के किसानों के लिए खुशखबरी, जंगली जानवरों के फसल नुकसान पर मिलेगा मुआवजा

नई दिल्ली: जंगली जानवरों द्वारा किसानों की फसल का नुकसान करने पर किसानों को मुआवजा मिलेगा. हरियाणा सरकार ने वन सीमा के एक किलोमीटर दायरे में फसल के नुकसान पर मुआवजा देने का प्रावधान बनाया है. वन विभाग की तरफ से पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में जवाब दायर करने के बाद इस संबंध में दाखिल अवमानना याचिका का हाईकोर्ट ने निपटारा कर दिया है. हरियाणा किसान कांग्रेस के उपाध्यक्ष विजय बंसल की तरफ से दाखिल याचिका में कहा गया कि जंगली जानवरों द्वारा किसानों की फसल के नुकसान की भरपाई होनी चाहिए. किसानों को इसका मुआवजा मिलना चाहिए.

बंसल ने बताया कि वन्य प्राणी विभाग ने शपथपत्र देकर कहा कि जंगली जानवरों द्वारा बरसात पर आधारित फसलों के नुकसान पर 6800 रुपये प्रति हेक्टेयर व सिंचाई पर आधारित फसलों के नुकसान पर 13500 रुपए प्रति हेक्टेयर मुआवजा किसानों को देने का प्रस्ताव वित्त विभाग को पास करने के लिए भेज दिया है. जंगली जानवर यदि किसी किसान को मार देते हैं तो दो लाख रुपये मुआवजा, अपाहिज होने पर एक लाख और बच्चे के मरने पर 70 हजार तथा अपाहिज होने पर 35 हजार का मुआवजा देने के प्रावधान को भी मंजूरी के लिए भेज दिया गया है.

इसके अलावा बारहमासी फसलों के नुकसान पर 18 हजार रुपये के मुआवजे का प्रावधान भी रखा है. वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट 1972 में जंगली जानवरों द्वारा किसानों की फसल को नष्ट करने पर कोई प्रावधान नही था. ऐसे में किसानों के लिए यह राहत की खबर है. गौरतलब है पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 28 मई 2018 को विजय बंसल की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हरियाणा सरकार व वन विभाग को 2 माह के भीतर कार्यवाही करने के आदेश दिए थे परन्तु 1 साल से ज्यादा समय बीतने के बाद भी वन्य प्राणी विभाग व हरियाणा सरकार ने हाईकोर्ट के आदेशों की पालना नही की. जिसके कारण ही उन्होने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की.

विजय बंसल इससे पूर्व 8 नवम्बर 2018 को भी कानूनी नोटिस भेज चुके है और अब भी 31 मई 2019 को पुनः कानूनी नोटिस भेजकर हाईकोर्ट के आदेशों की पालना करने के लिए कहा था परंतु सरकार ने कोई योजना नहीं बनाई.विजय बंसल ने जनहित याचिका में कहा था कि शिवालिक क्षेत्र के जिला पंचकूला अम्बाला व यमुनानगर के गांवों की सीमा के साथ अधिकतर वन क्षेत्र है जिस कारण अनेको जंगली जानवर जैसे जंगली सुअर व जंगली नील गाय आदि किसानों की फसलों को चट कर जाते है व तहस नहस करके भारी नुकसान करते है जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान होता है .

विजय बंसल ने अपनी जनहित याचिका में जंगली जानवरों द्वारा किसानों की फसल के नुकसान की भरपाई की माँग की थी, बंसल ने जनहित याचिका में मांग की थी कि किसानों को जंगली जानवरो द्वारा बर्बाद हुई फसलों का मुआवजा,पालतू पशुओं को जंगली जानवरों द्वारा नुकसान का मुआवजा व वन क्षेत्रो की तारबंदी करी जाए व किसानों के जीवन को सुरक्षित किया जाए.

उन्होने अपनी याचिका में कहा था कि  शिवालिक क्षेत्र में पहले ही सिंचाई के पुख्ता प्रबंध नही है व कम जमीन होने के कारण किसानों के पास कमाई का कोई साधन भी नही है.जंगली जानवर, किसानों की फसलों का निरन्तर नुकसान कर रहे है व सरकार व वन्य प्राणी विभाग चुपी साधे बैठा है.आए दिन जंगली जानवर सेकड़ो के झुंड में आकर , फसलों को चट कर जाते है , पालतू पशुओं को मार देते है व नुकसान पहुंचाते हैं जिसके लिए नामात्र मुआवजा जिसमे बकरी के लिए 500, गाय के लिए 1500 , भैंस के लिए लगभग 3000 रुपये दिए जाते है.

शिवालिक विकास मंच के अध्यक्ष विजय बंसल ने 2013 में प्रधान सचिव वन विभाग , प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं जिला उपायुक्त पंचकूला अम्बाला व यमुनानगर को कानूनी नोटिस भेज कर जंगली जानवरो द्वारा किसानों के नुकसान की भरपाई के लिए, तारबंदी आदि के लिए मांग की  थी .23 अगस्त 2013 को अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्य प्राणी एवम मुख्य वन प्राणी वार्डन हरियाणा ने इस कानूनी नोटिस का जवाब देते हुए कहा था कि शिवालिक क्षेत्र का जंगल काफी बड़ा है व तारबंदी करना आसान नही है व सरकार के पास उपयुक्त धन नही है.

साथ ही किसानों की फसलों के नुकसान की भरपाई के लिए कोई प्रावधान नही है व किसान अपनी फसलों की सुरक्षा स्वय करे. यदि कोई नुकसान हो तो पशुपालन विभाग व कृषि विभाग से सम्पर्क किया जा सकता है.साथ ही कहा कि वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 3 के अंतर्गत वन्य प्राणियों की सुरक्षा के बारे बताया हौ व नील गाय आदि शामिल है व सरेआम मारना कानूनन अपराध है.

इस संबंध में कृषि मंत्री हरियाणा सरकार को 19 जनवरी 2015 को ज्ञापन भेजा था परन्तु कोई कार्यवाही नही हुई. विजय बंसल ने याचिका में बताया है कि पंजाब की कांग्रेस सरकार ने किसान हित में कार्य करते हुए, रोपड़ आनंदपुर साहिब, गढ़शंकर , बलाचौर आदि विधानसभाओं के गांवों व किसानों की सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत वन क्षेत्र की तारबंदी हेतु 2017-18 में 8 करोड़ 16 लाख व 2018-19 में 8 करोड़ की अनुदान राशि मंजूर की है जबकि जंगली जानवरों द्वारा फसलों की नुकसान की भरपाई के लिए 1 करोड़ 33 लाख का मुआवजा मंजूर किया है.

इसके साथ ही जंगली जानवरो जैसे जंगली सुअर व नील गाय आदि को मारने के परमिट भी जारी करने के आदेश दिए है जोकि स्थानीय एसडीएम व डीएफओ सम्बंधित किसान को मंजूर करेगे जिससे किसान, अपने खेत व फसल की सुरक्षा के लिए जंगली जानवर को मार सकेगा.