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2 साल बाद जग्गा और बलिया को AIIMS से मिलेगी छुट्टी, सिर से जुड़े हुए थे दोनों भाई

एम्स के डॉक्टरों के मुताबिक जग्गा पूरी तरह से ठीक है, और उसका ब्रेन भी डेवलप हो रहा है. वह अपनी बाकी की जिंदगी बेहतर तरीके से जी पाएगा.

2 साल बाद जग्गा और बलिया को AIIMS से मिलेगी छुट्टी, सिर से जुड़े हुए थे दोनों भाई
सर्जरी के बाद से ही दोनों बच्चे न्यूरो सर्जरी विभाग के प्राइवेट वॉर्ड में एडमिट हैं.

नई दिल्ली: लगभग दो साल के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार जग्गा और बलिया को एम्स से छुट्टी मिलेगी. सिर से जुड़े दोनों भाइयों को दो साल की उम्र में एम्स में एडमिट किया गया था. 14 जुलाई 2017 में एम्स लाए गए ये बच्चे अब चार साल के हो चुके हैं और अलग भी. 

6 सितंबर को एम्स में इस बारे में प्रेस कांफ्रेस की जाएगी. उसी दिन दोनों बच्चों को एम्स से ओडिशा के कटक भेज दिया जाएगा. बच्चे ट्रेन के जरिए कटक जाएंगे. कटक मेडिकल कॉलेज में बच्चों का आगे का इलाज चलेगा. भारत में सिर से जुड़े बच्चों का ये पहला मामला है जब उन्हें अलग करने की कामयाब सर्जरी की गई हो. 25 अक्टूबर 2017 को दोनों बच्चों की सर्जरी हुई थी. 16 घंटे चली सर्जरी में 100 के करीब मेडिकल प्रेक्टिशनर लगे थे. दोनों बच्चे सिर से पूरी तरह जुड़े थे. 

एम्स के डॉक्टरों के मुताबिक जग्गा पूरी तरह से ठीक है, और उसका ब्रेन भी डेवलप हो रहा है. वह अपनी बाकी की जिंदगी बेहतर तरीके से जी पाएगा. हालांकि, बलिया के पास ब्रेन का मात्र 30 पर्सेंट हिस्सा था इसलिए उसे ठीक होने में अभी वक्त लगेगा. वह आंख खोलता है आई कांटेक्ट भी करता है, लेकिन पूरी तरह ठीक होने में उसे 4-5  साल लग सकते हैं. ये सफर मुश्किलों भरा रह सकता है. 

सर्जरी के बाद से ही दोनों बच्चे न्यूरो सर्जरी विभाग के प्राइवेट वॉर्ड में एडमिट हैं. दोनों की फीजियोथेरेपी भी की जा रही थी. इसी का नतीजा है कि जग्गा अब एक्टिव हो गया है. वह वॉर्ड में ही खेलता है. जग्गा अपने भाई से बहुत प्यार करता है. दिल्ली के एम्स अस्पताल के डॉक्टरों की टीम कटक के डॉक्टरों के संपर्क में रहेगी. एम्स में भी दोनों के इलाज के दौरान काफी चुनौतियां आईं लेकिन आखिरकार डॉक्टर दोनों को बचाने में कामयाब हो गए. 

भूइयां कनहार और पुष्पांजलि के घर 2015 में जग्गा और बलिया पैदा हुए थे. शुरू में दोनों बच्चे कटक मेडिकल कॉलेज में भर्ती रहे. यहां 4 महीने के इलाज के बाद इन्हें घर भेज दिया गया था. जन्म के दो साल बाद सरकार ने इन दोनों बच्चों का इलाज एम्स में कराने का फैसला किया था. तब से दोनों बच्चों के माता पिता भी एम्स में ही रह रहे हैं.