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छात्रों के आगे झुका जामिया प्रशासन, अब आगे से नहीं देगा इजरायल को एंट्री

अक्टूबर के शुरू में जामिया में एक कॉन्फ्रेंस हुई थी जिसमें इजरायल के भी कुछ डेलीगेट्स शामिल हुए थे. इस कॉन्फ्रेंस के विरोध में कुछ छात्रों ने ये कहकर प्रदर्शन किया कि जामिया हमेशा फलस्तीन का समर्थक रहा है ऐसे में इजरायल के डेलीगेट्स को आने की इजाज़त क्यों दी गयी.

छात्रों के आगे झुका जामिया प्रशासन, अब आगे से नहीं देगा इजरायल को एंट्री

नई दिल्ली: पिछले कुछ दिनों से जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में चल रहा विवाद जामिया प्रशासन और छात्रों के बीच इस शर्त पर ख़त्म हुआ कि आगे से जामिया मिल्लिया इस्लामिया में इजरायल के किसी भी डेलीगेट्स को एंट्री नहीं दी जाएगी. जामिया प्रशासन ने छात्रों की 4 मांगें मानी हैं जिसमें इस मांग को भी शामिल किया गया है.

आपको बता दें कि अक्टूबर के शुरू में जामिया में एक कॉन्फ्रेंस हुई थी जिसमें इजरायल के भी कुछ डेलीगेट्स शामिल हुए थे. इस कॉन्फ्रेंस के विरोध में कुछ छात्रों ने ये कहकर प्रदर्शन किया कि जामिया हमेशा फलस्तीन का समर्थक रहा है ऐसे में इजरायल के डेलीगेट्स को आने की इजाज़त क्यों दी गयी. जामिया प्रशासन ने प्रदर्शन में शामिल पांच छात्रों को कारण बताओ नोटिस भी जारी कर दिया था. 22 अक्टूबर को ये मामला उस समय ज्यादा बढ़ गया जब दो गुटों में झड़प हो गयी और कई छात्र जख़्मी भी हो गए.

छात्र 22 अक्टूबर की पूरी रात और 23 अक्टूबर को पूरे दिन जामिया की वाइस चांसलर नज़मा अख़्तर के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करते रहे. बाद में यूनिवर्सिटी प्रशासन ने छात्रों से कई बार की वार्ता की और विवाद को सुलझाया. जामिया प्रशासन ने छात्रों को दिया गया कारण बताओ नोटिस भी वापस ले लिया.

जामिया मिल्लिया इस्लामिया सेंट्रल यूनिवर्सिटी है. ऐसे में इजरायल को एंट्री ना देने के फैसले पर विवाद हो सकता है. जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में 29 और 30 अक्टूबर को दीक्षांत समारोह होना है. जिसमें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद शिरकत करने वाले हैं. ऐसे में जामिया प्रशासन विवाद को तूल नहीं देना चाहता है.