जावेद अख्तर हिंदी अकादमी के शलाका सम्मान से सम्मानित

दिल्ली के कमानी सभागार में आयोजित सम्मान समारोह में कला, साहित्य एवं लेखन जगत की विभिन्न हस्तियों को सम्मानित किया गया.

जावेद अख्तर हिंदी अकादमी के शलाका सम्मान से सम्मानित
जावेद अख्तर ने इस अवसर पर कहा कि हमें हिंदी और उर्दू में न जी कर हमें हिन्दुस्तानी में जीना चाहिए. (फोटो साभार : @AamAadmiParty)

नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी में बुधवार को हिंदी अकादमी सम्मान समारोह का आयोजन किया गया. दिल्ली सरकार की हिंदी अकादमी ने इस वर्ष के शलाका सम्मान से मशहूर शायर और गीतकार जावेद को नवाजा. वहीं रंगमंच की दुनिया के प्रसिद्ध निर्देशक एवं अभिनेता एम के रैना को शिखर सम्मान से सम्मानित किया गया. दिल्ली सरकार के कला संस्कृति एवं भाषा विभाग के निर्देशन में हिंदी अकादमी साहित्य के संवर्धन के लिए काम करती है. 

भाषायी साहित्यिक तथा सांस्कृतिक गतिविधियों में रचनात्मक भूमिका निभाने एवं विशिष्य योगदान देने के लिए हिंदी के साहित्यकारों, पत्रकारों, कवियों एवं लेखकों को पुरस्कार एवं सम्मान दिया जाता है. 

दिल्ली के कमानी सभागार में आयोजित सम्मान समारोह में कला, साहित्य एवं लेखन जगत की विभिन्न हस्तियों को सम्मानित किया गया. दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया इस मौके पर विशेष अतिथि थे.

 'हमें हिन्दुस्तानी में जीना चाहिए' 
भाषा का महत्त्व बताते हुए जावेद अख्तर ने कहा कि भाषा लिपि नहीं है, शब्दावली नहीं है बल्कि व्याकरण और वाक्य संरचना है. उन्होंने कहा कि हिंदी और उर्दू में न जी कर हमें हिन्दुस्तानी में जीना चाहिए. साथ ही उन्होंने पाठ्यक्रम में हिन्दुस्तानी नाम के एक विषय को भी शामिल करने को कहा जो तमाम भाषाई अंतर को खत्म करे. 

वहीं हिंदी अकादमी के उपाध्यक्ष विष्णु खरे ने साहित्य को वामपंथी बताते हुए सत्ता परिवर्तन की बात कही. सिसोदिया ने कहा कि स्कूलों में गांधी और कबीर को पढ़ाया जाना तब व्यर्थ हो जाता है जब लोग बाद में जाकर उनके विचारों की महत्ता खत्म कर दें. शिक्षा के जरिए गंभीरता लाई जानी चाहिए. 

 'सोच ट्वीट जितनी छोटी न हो'
मौजूदा साहित्यिक और पत्रकारीय हालातों पर जाने.माने पत्रकार, चर्चित उपन्यास ‘अकबर’ के लेखक और गद्य विद्या सम्मान से नवाजे गए शाजी जमां का कहना है कि आप किसी भी विधा से जुड़े हों, आपका माध्यम ट्वीट हो सकता है लेकिन सोच ट्वीट जितनी छोटी न हो. हर विधा से जुड़े लोग अगर बुनियादी मूल्यों को मजबूत करेंगे, बारीकी पर नजर रखेंगे तो सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा फिर चाहे समय कितना भी लेना पड़े. उन्होंने कहा कि जिस क्षेत्र में काम करें उसमें भले ही थोड़ा.थोड़ा करें लेकिन गहराई से करें. तथ्य की बारीकी में न जाना और सतही विश्लेषण खतरनाक होता है.

(इनपुट - भाषा)