AAP पंजाब की बगावत को शांत करने की कवायद, केजरीवाल ने खैरा और विधायकों को बुलाया दिल्ली

विधायक सुखपाल खैरा को पंजाब में विपक्ष के नेता पद से हटाते ही पार्टी का विवाद पूरी तरह सड़कों पर आ गया है

AAP पंजाब की बगावत को शांत करने की कवायद, केजरीवाल ने खैरा और विधायकों को बुलाया दिल्ली
आम आदमी पार्टी पंजाब में चल रही बयानबाजी को लेकर सबको दिल्ली में तलब किया गया है (फाइल फोटो)

नितिन धिमान, नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (आप) के विधायक सुखपाल सिंह खैरा को पंजाब में विपक्ष के नेता पद से हटाते ही पार्टी का विवाद पूरी तरह सड़कों पर आ गया है. ताजा जानकारी के मुताबिक मामले को संभालने और पार्टी की छवि को हो रहे नुकसान से बचने की कवायद तेज कर दी गई है. इसी क्रम में आम आदमी पार्टी के मुखिया और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सुखपाल सिंह खैरा सहित पंजाब के सभी विधायकों को दिल्ली बुलाया है. बताया जा रहा है कि पंजाब के सभी आप विधायकों और सुखपाल खैरा के साथ शाम 6 बजे एक मीटिंग होने वाली है. जानकारी के मुताबिक आम आदमी पार्टी पंजाब में चल रही बयानबाजी को लेकर सबको दिल्ली में तलब किया गया है.

खैरा को हटा कर चीमा को बनाया गया विपक्ष का नेता
आपको बता दें कि कई विवादों से घिरे खैरा को गुरुवार को पंजाब में विपक्ष के नेता पद से हटा दिया गया था. खैरा की जगह हरपाल सिंह चीमा को नेता नामजद किया गया है. खैरा को हटाने के अगले ही दिन शुक्रवार को जहां विधायक दल के प्रवक्ता कंवर संधू ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया, वहीं खैरा भी अपने समर्थक 8 आप विधायकों के साथ मीडिया के सामने आए और 2 अगस्त को बठिंडा में कार्यकर्ता सम्मेलन बुलाने का ऐलान कर दिया था.

खैरा ने कहा- अपने ही लोगों की साजिश
बठिंडा के मौड़ मंडी विधान सभा क्षेत्र में शनिवार को पहुंचे आप विधायक सुखपाल सिंह खैरा ने कहा था कि पार्टी के अपने ही लोगों ने उनके खिलाफ साजिश कर उनको नेता प्रतिपक्ष के पद से हटावाया है. इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी हाईकमान के तानाशाही फैसलों से आम आदमी का पार्टी से विश्वास टूट गया है, जिसके चलते आप का ग्राफ नीचे गिरता जा रहा है.

बैंस बोले- कांग्रेस के कहने पर हटाया गया
लोक इंसाफ पार्टी (एलआईपी) के प्रमुख और लुधियाना से विधायक सिमरजीत सिंह बैंस ने सुखपाल सिंह खैरा को पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता पद से हटाने को आम आदमी पार्टी (आप) सुप्रीमो और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का तानाशाही भरा कदम बताया था. बैंस ने आप के इस कदम की भर्त्सना की थी और दावा किया था कि खैरा को 2019 के लोकसभा चुनावों के लिए हुए समझौते के तहत कांग्रेस के कहने पर हटाया गया है. उन्होंने कहा था कि खैरा को ईमानदारी और सच्चा बोलने की सजा दी गई है.