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लाखों की लागत से बने उर्दू मीडियम स्‍कूल को निगम अधिकारियों ने शुरू होने से रोका

स्कूल की बिल्डिंग तीन साल से बनकर खड़ी है और बिल्डिंग में तीस से 40 लाख रुपए तक खर्च किया गया है स्कूल के नाम के साथ उर्दू मीडियम भी लिखा हुआ है.

लाखों की लागत से बने उर्दू मीडियम स्‍कूल को निगम अधिकारियों ने शुरू होने से रोका

मोेहम्‍मद शोएब, नई दिल्‍ली: राजधानी दिल्ली के खजूरी की श्रीराम कॉलोनी के मुस्‍ल‍िमों ने ईस्ट दिल्ली नगर निगम पर आरोप लगाया है कि निगम के अधिकारियों ने मिलकर उनके इलाके में तीन साल पहले बने एक स्कूल को अब तक इसलिए शुरू नहीं किया, क्योंकि वो उर्दू मीडियम है. स्कूल की बिल्डिंग तीन साल से बनकर खड़ी है और बिल्डिंग में तीस से 40 लाख रुपए तक खर्च किया गया है स्कूल के नाम के साथ उर्दू मीडियम भी लिखा हुआ है.

खजूरी की श्रीराम कालोनी के रहने वाले जमालुद्दीन इस मामले को लेकर तमाम विभागों के चक्कर लगा चुके हैं. वह बताते हैं कि जब स्कूल का तीन साल पहले उद्घाटन किया गया था, तब इसके उर्दू मीडियम होने पर किसी को एतराज नहीं था. लेकिन जब स्कूल में पढ़ाने के लिए टीचर्स मांगे गए तो नगर निगम के अधिकारियों ने टीचर्स देने से मना कर दिया. आज तक भी इस स्कूल को कोई देखने नहीं आया, जबकि इलाके की 85 प्रतिशत जनसंख्या मुस्लिम है और वो बच्चों को उर्दू पढ़ाना चाहते हैं.

इस मामले की शिकायत करने के लिए इलाके के लोग दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग भी पहुंचे. आयोग की शिक्षा कमेटी ने अब दिल्ली शिक्षा निदेशालय को इस सिलसिले में लेटर लिखा है. उर्दू मीडियम स्कूलों के लिए लड़ाई लड़ने वाले सामाजिक कार्यकर्ता मंज़र अली इस मामले को लेकर निगम के अधिकारियों से काफ़ी नाराज़ है और वो सीधा बीजेपी को इसके लिए ज़िम्मेदार मानते हैं. मंज़र का कहना है कि नगर निगम में बीजेपी का कब्ज़ा और वो उर्दू भाषा को मुसलमानों की भाषा मानकर इसको आगे नहीं बढ़ने देती और नुकसान बच्चों की पढ़ाई का होता है.

हालांकि मामला गर्माने के बाद ईस्ट दिल्ली नगर निगम की महापौर अंजू ने जांच कर अधिकारियों से जवाब मांगा है. अंजू का कहना है कि वो कुछ ही दिन पहले मेयर बनी हैं, ऐसे में वो इस मामले को देखेंगी और फिर कार्रवाई होगी.

दिल्ली में बड़ी तादाद में निगम और दिल्ली सरकार के उर्दू मीडियम स्कूल हैं, लेकिन उर्दू को लेकर पहले भी विवाद होता रहा है, लेकिन दिल्ली के तीनों ही नगर निगम पर बीजेपी का कब्जा है. ऐसे में मामला गर्माता दिख रहा है. हालांकि दिल्ली के सरकारी स्कूलों में इस बार 12वीं क्लास में जिस सना नाम की लड़की ने टॉप किया है वो उर्दू मीडियम से ही पढ़ाई करती थी.