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अवैध रेत माफि‍या से आजाद होकर असोला भाटी अभ्‍यारण्‍य फिर से हुआ 'गुलजार'

इसके‍ लिए दिल्‍ली वन विभाग ने भारतीय सेना की ईको टास्‍क फोर्स के साथ मिलकर इस अभ्‍यारण्‍य की इंच इंच जमीन को हरा भरा भरा बनाने का काम किया.

अवैध रेत माफि‍या से आजाद होकर असोला भाटी अभ्‍यारण्‍य फिर से हुआ 'गुलजार'

नई दिल्‍ली: अवैध रेत माफि‍याओं के चंगुल और उत्‍खनन से आजाद होने के बाद राष्‍ट्रीय राजधानी दिल्‍ली के दक्ष‍िण हिस्‍से में मौजूद  असोला भाटी अभ्‍यारण्‍य फिर से गुलजार हो उठी है. इसने वही पुरानी हरी चादर ओढ़ ली है, जो कभी इसकी पहचान हुआ करती थी. इसके‍ लिए दिल्‍ली वन विभाग ने भारतीय सेना की ईको टास्‍क फोर्स के साथ मिलकर इस अभ्‍यारण्‍य की इंच इंच जमीन को हरा भरा भरा बनाने का काम किया.

इस अभ्‍यारण्‍य का क्षेत्रफल करीब 3900 हैक्‍टेयर है. यहां पर 2001 से लेकर 2017 तक करीब 27 लाख पौधे रोपे गए. दिल्‍ली हरियाणा बॉर्डर पर स्थित इस अभ्‍यारण्‍य की खूबसूरती बढ़ाने के लिए कई और प्रोजेक्‍ट की तैयारी है. डीसीएफ सौरभ शर्मा के अनुसार, हम यहां पर एक साइकिल ट्रेक बनाने की योजना बना रहे हैं. जिससे यहां पर आने वाले पर्यटक यहां की पूरी सुविधाओं का लाभ उठा सकें. यहां आने वालों में सबसे ज्‍यादा स्‍कूली बच्‍चे होते हैं. कई लोगों को तो ये भी नहीं पता कि दिल्‍ली में ऐसा कोई स्‍थान है और जो उनके काफी पास है.

यहां पर सेना ने वन विभाग की मदद से बड़े पैमाने पर पौधरोपण किया है. ताकि यहां ग्रीन बेल्‍ट को जरा भी नुकसान न हो. इस अभ्‍यारण्‍य में आने वाले पर्यटकों का आम तौर पर स्‍वागत मोर और बंदर करते हैं. ये यहां आसानी से दिखते हैं. इसके अलावा तेंदुआ, हायना, नील गाय भी देखे जा सकते हैं. बंदर यहां से रिहाइशी इलाकों में न घुसें इसलिए उनके खाने पीने का पूरा ध्‍यान रखा जाता है.

अभ्‍यारण्‍य के एक अधिकारी ने बताया कि अवैध भू और रेत माफियाओं ने यहां से अवैध उत्‍खनन कर खूब पैसा बनाया है. लेकिन अब यहां पर इस तरह की गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है. हम यहां पर लोगों के लिए फूड फॉरेस्‍ट विकसित करना चाहते हैं. इस अभ्‍यारण्‍य में कई वॉटर बॉडीज हैं, जो वन्‍य जीवों के साथ साथ ग्राउंड वॉटर लेवल अच्‍छा रखती है.