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NGT के आदेश पर दिल्ली की सात मस्जिदों की होगी जांच, ध्वनि प्रदूषण फैलाने का आरोप

चेयरपर्सन जस्टिस एके गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने CPCB और DPCC को निर्देश दिया है कि वे दोनों संयुक्त निरीक्षण कर इन मस्जिदों की जांच करें.

NGT के आदेश पर दिल्ली की सात मस्जिदों की होगी जांच, ध्वनि प्रदूषण फैलाने का आरोप
फाइल फोटो

नई दिल्ली: NGT ने ईस्ट दिल्ली की सात मस्जिदों में लगे लाउडस्पीकरों से ध्वनि प्रदूषण फैलने के आरोप की जांच करने का आदेश दिया है. चेयरपर्सन जस्टिस एके गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने CPCB और DPCC को निर्देश दिया है कि वे दोनों संयुक्त निरीक्षण कर इन मस्जिदों की जांच करें. कोर्ट ने कहा कि अगर वाकई इनसे इलाके में ध्वनि प्रदूषण हो रहा है, तो उनके खिलाफ पर्यावरण कानून के तहत कार्रवाई करें. NGT ने CPCB से 2 महीने में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है. अनुपालन रिपोर्ट पर 6 फरवरी 2019 को NGT विचार करेगा.

एनजीओ ने दायर करवाई थी याचिका
दरअसल, एनजीटी ने गैर सरकारी संगठन अखंड भारत मोर्चा की ओर से दायर याचिका का निपटारा करते हुए यह आदेश दिया. याचिका में जिन मस्जिदों के नामों का जिक्र है उनमें जगतपुरी की सुनहरी मस्जिद, लक्ष्मी नगर की मस्जिद, किशनकुंज स्थित अनार कली मस्जिद, न्यू लाहौर शास्त्री नगर स्थित बिस्मिल्लाह मस्जिद, शास्त्री नगर के सरोजिनी नायडू पार्क स्थित मस्जिद, बिहारी कॉलोनी और मधु विहार की मस्जिदें हैं. पिछले साल भी NGT ने ध्वनि प्रदूषण पर दिल्ली सरकार और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देश दिया था कि वो पूर्वी दिल्ली स्थित सभी मस्जिदों के लाउडस्पीकरों ध्वनि की मानकों की जांच करे.

NGT ने ठोस कार्रवाई के दिए आदेश
एनजीटी ने ये भी कहा था कि यदि किसी भी मस्जिद का लाउडस्पीकर ध्वनि प्रदूषण के नियमों का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ जुर्माना लगाया जाए और ठोस कार्रवाई भी की जाए. एनजीटी ने दिल्ली सरकार और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से रिपोर्ट भी मांगी थी. एनजीटी ने दिल्ली सरकार और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड समिति (डीपीसीसी) को उल्लंघनकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा था.

ध्वनि प्रदूषण फैलाने का लगाया आरोप
आपको बता दें कि एनजीटी ने गैर सरकारी संगठन अखंड भारत मोर्चा की ओर से दायर याचिका का निपटारा करते हुए यह आदेश दिया. गैर सरकारी संगठन ने आरोप लगाया था कि इस तरह की जगहों पर लाउडस्पीकरों के अवैध उपयोग से आस-पास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है. लिहाजा इनके खिलाफ कार्रवाई की जाए. वकील राहुल राज मलिक की ओर से दायर याचिका में आरोप लगाया गया था कि कुछ मस्जिदों की गतिविधियां पर्यावरण सुरक्षा अधिनियम, 1986 और ध्वनि प्रदूषण नियमन एवं नियंत्रण अधिनियम, 2000 का उल्लंघन कर रही हैं.