निर्भया केस: फांसी से बचने के लिए आरोपियों का नया पैंतरा, दायर करेंगे क्यूरेटिव पिटीशन

अब चारों आरोपी राष्ट्रपति के पास दया याचिका दायर करने से पहले सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव पिटीशन दायर करेंगे.

निर्भया केस: फांसी से बचने के लिए आरोपियों का नया पैंतरा, दायर करेंगे क्यूरेटिव पिटीशन
फाइल फोटो

नई दिल्ली: निर्भया हत्याकांड (Nirbhaya Case) के आरोपियों ने फांसी से बचने के लिए अब एक नया पैंतरा आजमाया है. अब चारों आरोपी राष्ट्रपति के पास दया याचिका दायर करने से पहले सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव पिटीशन दायर करेंगे. निर्भया केस के दोषियों ने तिहाड़ जेल प्रशासन के नोटिस का जवाब देते हुए दोषियों की तरफ से उनके वकील ने कहा कि वो राष्ट्रपति के पास दया याचिका दायर करने से पहले सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव पिटीशन दायर करेंगे. 

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में दोषी अक्षय की पुनर्विचार याचिका 18 दिसंबर खारिज होने के बाद निर्भया की मां की याचिका पर दिल्ली की पटियाला हाउस ट्रायल कोर्ट में सुनवाई हुई थी. ट्रायल कोर्ट ने जेल प्रशासन को आदेश दिया था कि वह दोषियों को नोटिस जारी कर उनसे पूछे कि पुनर्विचार याचिकाओं के खारिज होने के बाद वह अब अपने बचाव में क्या कानूनी रास्ता अपना चाहते हैं और कितने दिन में. 

निर्भया की मां ने ट्रायल कोर्ट यानि निचली अदालत से दोषियों को फांसी पर लटकाने के लिए ब्लैक वॉरंट जारी करने की गुहार लगाई है. ब्लैक वॉरंट वही निचली अदालत, सेशन कोर्ट जारी करती है जिसमें मामले का ट्रायल हुआ है.

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तिहाड़ जेल प्रशासन ने चारों दोषियों को बुधवार को नोटिस जारी कर दिया था जिसमें उन्हें राष्ट्रपति के पास दया याचिका दायर करने के लिए 7 दिन का समय दिया गया है. 

यह नोटिस दिल्ली जेल नियम 837 के तहत जारी किया गया है जिसमें दोषियों को नोटिस मिलने के बाद सात दिनों की मोहलत मिलती है राष्ट्रपति के पास दया याचिका दायर करने के लिए. इस बीच अगर दया याचिका दायर नहीं होती है तो जेल प्रशासन दोषियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है. आपको बता दें कि ट्रायल कोर्ट में अगली सुनवाई 7 जनवरी को होगी.

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को मामले के एक दोषी अक्षय की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी थी जबकि अन्य तीन दोषियों की पुनर्विचार याचिका सुप्रीम कोर्ट पहले ही खारिज कर चुका है. इस तरह चारों दोषियों की पुनर्विचार याचिका सुप्रीम कोर्ट में खारिज हो गई है. एक दोषी विनय के नाम से दया याचिका राष्ट्रपति के पास अंतिम फैसले के लिए लंबित है.