निर्भया केस में दोषी को राहत नहीं, दिल्‍ली HC ने कहा कि मुकेश निचली अदालत में जाए

इसके साथ ही कोर्ट ने डेथ वारंट पर रोक लगाने से इनकार किया.

निर्भया केस में दोषी को राहत नहीं, दिल्‍ली HC ने कहा कि मुकेश निचली अदालत में जाए

नई दिल्‍ली: निर्भया के दोषी मुकेश की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने निर्भया के दोषी मुकेश को राहत देने से इनकार किया. साथ ही डेथ वारंट पर रोक लगाने से इनकार किया. कोर्ट ने कहा कि वह सेशन कोर्ट जाए. इसके साथ ही हाई कोर्ट ने याचिका का निपटारा किया. मुकेश की वकील ने कहा कि वो खुद डेथ वारंट पर रोक लगाने के किये निचली अदालत जाना चाहते हैं और पूरे केस को कोर्ट के समक्ष रखना चाहते हैं लेकिन हम कोर्ट से अंतरिम राहत चाहते हैं. मुकेश की वकील ने हाई कोर्ट से कहा कि वो अपनी याचिका को वापस लेना चाहती है लेकिन एक गुहार के साथ कि दोबारा हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर सके.

जस्टिस मनमोहन ने कहा कि यह याचिका फांसी को टालने की रणनीति के तहत दायर की गई है. दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि 2017 मैं जब दोषियों की अपील को सुप्रीम कोर्ट में खारिज किया था तभी उन्हें दया याचिका दाखिल करनी चाहिए थी, क्योंकि दया याचिका दाखिल करने की "घड़ी" तभी से शुरू हो गई थी.

इससे पहले दिल्ली सरकार के वकील राहुल मेहरा ने कहा कि हमने जो कहा है कि 22 जनवरी को फांसी संभव नहीं, ये नियमों और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक सही है. लिहाजा ये याचिका अपरिपक्‍व है. कोर्ट को कोई निर्देश देने की ज़रूरत नहीं है. इस पर दिल्ली हाई कोर्ट ने सख्‍त टिप्‍पणी करते हुए-हाई कोर्ट में याचिका दाखिल करने के पीछे मकसद लगता है कि मामले को लंबा खींचा जाए. हाईकोर्ट ने कहा कि 2017 में SC से अर्जी खारिज होने के बाद दोषियों की ओर से अपील दायर करने में जानबूझकर कर देरी की गई ताकि मामले को लटकाया जा सके.

दरअसल दोषी मुकेश की डेथ वारंट पर रोक की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान सरकारी वकील राहुल मेहरा ने कहा कि निर्भया के दोषियों की 22 जनवरी को फांसी देना मुश्किल है. दिल्ली सरकार के वकील राहुल मेहरा ने कहा कि इतना तय है कि निर्भया के हत्यारों को 22 जनवरी को फांसी नहीं दी जा सकती क्योंकि दया याचिका खारिज होने के बाद 14 दिन बाद ही फांसी दी जा सकती है. उन्‍होंने कोर्ट को बताया कि दिल्ली सरकार को मुकेश की दया याचिका मिल गई और आज ही दिल्ली सरकार इस पर फैसले लेकर LG के पास भेज देगी. राहुल मेहरा ने कहा कि 21 जनवरी की दोपहर को हम ट्रायल कोर्ट के जज के पास जाएंगे. अगर तब तक दया याचिका खारिज होती है तो भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक 14 दिन की मोहलत वाला नया डेथ वारंट जारी करना होगा. यानी किसी भी सूरत में 22 जनवरी को तो डेथ वारंट पर अमल संभव नहीं है. लिहाजा ये याचिका अभी प्री-मैच्‍योर है. मुकेश ने दया याचिका दाखिल की है उसके निपटारे के बाद अगर वो खारिज होती है तो उसे 14 दिनों का समय मिलना चाहिए.

हाई कोर्ट की सख्‍त टिप्‍पणी
हालांकि दिल्‍ली हाई कोर्ट ने सख्‍त टिप्‍पणी करते हुए कहा, "2017 में SC ने दोषियों की पहली याचिका खारिज की. उसके बाद जुलाई 2018 में पुनर्विचार खारिज हुई लेकिन तब से लेकर अब तक इन्होंने दया याचिका क्यों नहीं लगाई? 2017 से 2020 तक आप टालते रहे और एक बार डेथ वारंट जारी हुआ तो आप फिर एक याचिका लेकर आये हैं. इससे तो यही लगता है कि जैसे इसके जरिये बस केस को लटकाने की कोशिश हो रही है. जैसे ही फांसी की तारीख आएगी फिर एक नई याचिका दायर कर दी जाएगी...''

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इस पर मुकेश की वकील ने याकूब मेनन केस का हवाला दिया. उन्‍होंने कहा कि उसकी ओर से अलग-अलग समय में दो-दो दया याचिका दाखिल की गई थी. पहली दया याचिका राष्ट्रपति द्वारा खारिज होने के बाद उसे 14 दिनों की मोहलत मिली थी. राज्यपाल द्वारा दूसरी बार दया याचिका खारिज होने के बाद उसे ये 14 दिन का वक्त नहीं मिला. दिल्ली पुलिस के वकील ने कहा कि मुकेश की याचिका को खारिज किया जाना चाहिए. ये याचिका अभी प्री-मैच्‍योर है. दिल्ली पुलिस की तरफ से कहा गया कि दोषी ने जानबूझकर कर इस मामले में देरी की. जेल मैनुअल के हिसाब से दोषी की अपील खारिज होने के बाद केवल 7 दिनों का वक्त मिलता है दया याचिका दाखिल करने के लिए.

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मुकेश के वकील ने कहा कि 5 जनवरी तक सुप्रीम कोर्ट बंद रहा. 6 जनवरी को कोर्ट खुला. इसी बीच वृंदा ग्रोवर ने तिहाड़ जेल प्रशासन से मुकेश के कुछ दस्तावेज मांगे थे क्‍यूरेटिव याचिका दाखिल करने के लिए. 7 जनवरी को पटियाला हाउस कोर्ट डेथ वारंट जारी कर देता है. मुकेश के वकील ने कहा कि मंगलवार को दोपहर 2 बजे सुप्रीम कोर्ट क्‍यूरेटिव याचिका को खारिज करता है और 3 बजे मुकेश अपनी दया याचिका तिहाड़ जेल प्रशासन को देता है जिसमें वो दया याचिका राष्ट्रपति के समक्ष दायर करने की बात कहता है.

मुकेश की वकील ने कहा कि दोषियों के पास ये अधिकार है कि वो अपने जीवन के आखिरी सांस तक उसे कानूनी लड़ाई का हक मिले. मुकेश की तरफ से कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट के एस चौहान के मामले में फैसले के मुताबिक राष्ट्रपति द्वारा दया याचिका खारिज होने के बाद भी उसे 14 दिनों की मोहलत मिलनी चाहिए ताकि इस दरम्यिान वो अपने घरवालों से मुलाकात और बाकी काम कर सके.

मुकेश की तरफ से कहा गया कि 6 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में क्‍यूरेटिव याचिका इसलिए दाखिल नहीं हो पाई क्योंकि जो दस्तावेज़ तिहाड़ जेल प्रशासन से मांगे गए थे वो समय पर नहीं मिला. दिल्ली हाई कोर्ट ने सवाल उठाते हुए कहा कि आपकी क्रिमिनल अपील 2017 में खारिज होती है, उसके बाद आपने क्‍यूरेटिव और दया याचिका दाखिल क्यों नहीं की? आपने 2.6 साल तक इंतजार क्यों किया? कानून आपको क्‍यूरेटिव याचिका और दया याचिका दाखिल करने के लिए उचित समय देता है.

मुकेश ने कोर्ट को बताया कि उसे तिहाड़ जेल प्रशासन का नोटिस मिला था और उसने ही वृंदा ग्रोवर को क्‍यूरेटिव याचिका दाखिल करने को कहा था. मुकेश की वकील ने दिल्ली हाई कोर्ट को बताया कि 9 जनवरी को दो दोषियों मुकेश और विनय ने क्‍यूरेटिव याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की थी. मुकेश की तरफ से कहा गया कि तिहाड़ जेल ने जो नोटिस सभी को सर्व किया था उसमें केवल दया याचिका का जिक्र था, क्‍यूरेटिव का नहीं.