निर्भया केस के दोषी मुकेश ने दिल्‍ली हाईकोर्ट से कहा- 'याकूब मेनन केस अलग'

मुकेश की तरफ से कोर्ट को बताया गया कि उसे तिहाड़ जेल प्रशासन का नोटिस मिला था और उसने ही वृंदा ग्रोवर को क्‍यूरेटिव याचिका दाखिल करने को कहा था. 

निर्भया केस के दोषी मुकेश ने दिल्‍ली हाईकोर्ट से कहा- 'याकूब मेनन केस अलग'
फाइल फोटो...

नई दिल्ली: निर्भया केस (Nirbhaya Case) के एक दोषी मुकेश (Mukesh) द्वारा डेथ वॉरंट पर रोक लगाए जाने की मांग करती याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) में सुनवाई के दौरान मुकेश की तरफ से कहा गया कि तिहाड़ जेल ने जो नोटिस सभी को सर्व किया था, उसमें केवल दया याचिका का जिक्र था, क्‍यूरेटिव पिटीशन का जिक्र उसमें नहीं था. मुकेश की तरफ से कोर्ट को बताया गया कि उसे तिहाड़ जेल प्रशासन का नोटिस मिला था और उसने ही वृंदा ग्रोवर को क्‍यूरेटिव याचिका दाखिल करने को कहा था. 

मुकेश की वकील ने कहा कि 5 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट बंद तक और 6 जनवरी को खुला. इसी बीच वृंदा ग्रोवर ने तिहाड़ जेल प्रशासन (Tihar Jail) से उससे कुछ दस्तावेज मांगे थे. 7 जनवरी को पटियाला हाउस कोर्ट ने डेथ वारंट जारी कर दिया. मुकेश की वकील ने कहा कि मंगलवार को दोपहर 2 बजे सुप्रीम कोर्ट क्‍यूरेटिव पिटीशन खारिज कर दीं और 3 बजे मुकेश ने अपनी दया याचिका तिहाड़ जेल प्रशासन को दी, जिसमें दया याचिका राष्ट्रपति के समक्ष दायर करने को लेकर कहा गया. 

मुकेश की वकील ने कहा कि दोषियों के पास ये अधिकार है कि जीवन की आखिरी सांस तक उसे कानूनी लड़ाई का हक मिले. उसकी तरफ से कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट के एस चौहान के मामले में फैसले के मुताबिक, राष्ट्रपति द्वारा दया याचिका खारिज होने के बाद भी उसे 14 दिनों की मोहलत मिलनी चाहिए, ताकि इस दरमियान वो अपने घरवालों से मुलाकात और बाकी काम कर सके. 

उसकी तरफ से बताया गया कि 6 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में क्‍यूरेटिव पिटीशन इसलिए दाखिल नही हो पाई, क्योंकि जो दस्तावेज़ तिहाड़ जेल प्रशासन से मांगे गए थे, वो समय पर नहीं मिला. दिल्ली हाईकोर्ट ने सवाल उठाते हुए कहा कि आपकी क्रिमिनल अपील 2017 में खारिज होती है, उसके बाद आपने क्‍यूरेटिव और दया याचिका दाखिल क्यों नहीं की है? आपने ढाई साल तक इंतजार क्यों किया? कानून आपको क्‍यूरेटिव पिटीशन और दया याचिका दाखिल करने के लिए उचित समय देता है.

इस पर मुकेश की वकील ने कहा कि याकूब मेनन केस अलग था. उसकी ओर से अलग-अलग समय में दो-दो दया याचिका दाखिल की गई थी. पहली दया याचिका राष्ट्रपति द्वारा खारिज होने के बाद उसे 14 दिनों की मोहलत मिली थी. राज्यपाल द्वारा दूसरी बार दया याचिका खारिज होने के बाद उसे ये 14 दिन का वक्त नहीं मिला.

जस्टिस मनमोहन और जस्टिस संगीता ढींगरा सहगल की पीठ ने निर्भया के दोषी मुकेश की याचिका पर सुनवाई कर रही है. याचिका में मुकेश ने कहा कि उसने राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका दायर की है, ऐसे में जब तक दया याचिका का निपटारा नहीं हो जाता तब तक उसकी फांसी पर कोर्ट रोक लगाए.

अगर राष्ट्रपति दया याचिका को खारिज भी करते है तो भी उसे राष्ट्रपति के फैसले को चुनौती देने के लिए समय दिया जाए. मुकेश ने अपनी याचिका में ये भी कहा है कि अगर राष्ट्रपति उसकी दया याचिका को खारिज करते है तो उसे वो हाईकोर्ट फिर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगा.

आपको बता दें कि मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने निर्भया के दो दोषी विनय शर्मा और मुकेश की क्यूरेटिव पिटिशन खारिज कर दी थी.इस मामले में चार दोषी हैं, जिनमें से दो हत्यारों ने ही अभी तक क्यूरेटिव याचिका दायर की थी, बाकि दो दोषी बाद में क्यूरेटिव याचिका दायर कर सकते हैं, ये याचिका दायर करने में देरी की वजह फांसी की सजा को और कुछ दिन टालने की कोशिश होगी.क्यूरेटिव याचिका के बाद दोषियों के पास राष्ट्रपति के यहाँ दया याचिका दायर करने का क़ानूनी अधिकार बचा है.

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने एक दोषी अक्षय की पुनर्विचार याचिका 18 दिसंबर को ख़ारिज की थी, अन्य तीन दोषियों की पुनर्विचार याचिका सुप्रीम कोर्ट पहले ख़ारिज कर चुका था, जिसके बाद सात जनवरी को दिल्ली पटियाला हाउस की ट्रायल कोर्ट ने चारों दोषियों को 22 जनवरी को फांसी पर लटकाने के लिए डेथ वांरट जारी कर दिया था.यह वारंट निरभया की मां की अर्ज़ी पर जारी हुआ था, अर्ज़ी में ट्रायल कोर्ट से मांग की गई थी कि सात जनवरी को दोषियों की कोई भी याचिका सुप्रीम कोर्ट में या राष्ट्रपति के पास लंबित नहीं है इसलिए ट्रायल कोर्ट फांसी की सजा को तामील में लाने के लिए कार्रवाई करें.