प्राइमरी स्कूल में नशे का शिकार हो रहे हैं बच्चे, सर्वे की रिपोर्ट पैरों तले जमीन खिसका देगी

ये सर्वे सरकारी स्कूलों के 368 स्कूलों में किया गया है. सर्वे के मुताबिक नशे के जाल में जो बच्चे फंस रहे हैं, उनमें नर्सरी से पांचवी क्लास के बच्चे शामिल हैं. 

प्राइमरी स्कूल में नशे का शिकार हो रहे हैं बच्चे, सर्वे की रिपोर्ट पैरों तले जमीन खिसका देगी
सर्वे के मुताबिक 1410 छात्र सिगरेट, 2613 तंबाकू, 231 शराब, 8182 सुपारी इस तरीके के नशे में लिप्त हैं.

नई दिल्लीः राजधानी दिल्ली के सरकारी मुन्सिपल स्कूल के मासूम बच्चे नशे के शिकार हो रहे है. नशे के चलते बच्चे आपराधिक घटनाओं को अंजाम देने से भी नहीं गुरेज करते हैं. बच्चों की उम्र जान कर हैरान हो जाएंगे की इतनी कम उम्र ये मासूम बच्चे कैसे नशे के जाल में फंसते जा रहे है. बच्चों की ऐसी हालत देखकर पूर्वी दिल्ली मुन्सिपल कॉर्पेराशन ने बच्चों पर एक सर्वे कराया है. सर्वे ने नतीजे चौकाने वाले थे. हर किसी को हैरान कर देने वाला था. यह सर्वे उन माता-पिता के माथे पर चिंता की लकीरे ला देगा जो अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ा रहे हैं.
 
368 सरकारी स्कूल में किया गया सर्वे
ये सर्वे सरकारी स्कूलों के 368 स्कूलों में किया गया है. सर्वे के मुताबिक नशे के जाल में जो बच्चे फंस रहे हैं, उनमें नर्सरी से पांचवी क्लास के बच्चे शामिल हैं. सर्वे करने वाले नोडल ऑफिसर अजय कुमार लेखी की माने तो करीब करीब 75 हज़ार बच्चों पर ये सर्वे किया गया है, जिसके मुताबिक 12627 छात्र इंजेक्शन और भी कई दूसरे तरीके से ड्रग्स का सेवन करते पाए गए. सर्वे के मुताबिक  1410 छात्र सिगरेट, 2613 तंबाकू, 231 शराब, 8182 सुपारी इस तरीके के नशे में लिप्त हैं. 

बच्चों की हालात के माता-पिता है जिम्मेदार
डॉ. अजय कुमार लेखी की मानें तो बच्चों के इस हालत के जिम्मेदार काफी हद तक उनके पेटेंट्स भी हैं, जो अपने बच्चो पर धयान नहीं देते. लेखी का कहना है कि माता-पिता दोनों के वर्किंग होने के कारण बच्चे स्कूल से घर जाने के बाद खाली रहते हैं, वह इस उम्र में समझ नहीं पाते हैं कि आखिरकार क्या करना उनके लिए सही है. मां और पिता के घर पर न रहने के कारण बच्चे गंदी संगत में आ जाते हैं और नशे का शिकार हो जाते हैं.