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माता की चौकी जैसे कार्यक्रम घोल रहे हैं अपार्टमेंट कल्चर में रिश्तों के रंग

शहरों की भागदौड़ भरी जिंदगी और अपार्टमेंट कल्चर में लोगों के पास आपस में मेल-जोल बढ़ाने और जानने-पहचानने का वक्त नहीं मिलता है. बदलते दौर के साथ माता की जगराता, माता की चौकी आदि कार्यक्रम अपार्टमेंट कल्चर में रह रहे लोगों को पड़ोसियों के करीब जाने का मौका दे रही है.

माता की चौकी जैसे कार्यक्रम घोल रहे हैं अपार्टमेंट कल्चर में रिश्तों के रंग

नोएडा: गुलाम भारत में लोगों को अंग्रेजों के खिलाफ एकजुट करने के लिए बाल गंगाधर तिलक ने साल 1893 में पूरे महाराष्ट्र में बड़े पैमाने परर गणेश उत्सव मनाने की शुरुआत की थी. इसके बाद से आज तक पूरे महाराष्ट्र में गणेश उत्सव धूमधाम से मनाया जा रहा है. इसी तरह के उत्सव भारत के लगभग हर गांव में देखने को मिलता है, जहां किसी देवी-देवता की पूजा के बहाने गांव का हर कोई आपस में मिलते-जुलते हैं. बदलते दौर के साथ बड़ी आबादी शहरों में शिफ्ट हो गई है. शहरों की भागदौड़ भरी जिंदगी और अपार्टमेंट कल्चर में लोगों के पास आपस में मेल-जोल बढ़ाने और जानने-पहचानने का वक्त नहीं मिलता है. बदलते दौर के साथ माता की जगराता, माता की चौकी आदि कार्यक्रम अपार्टमेंट कल्चर में रह रहे लोगों को पड़ोसियों के करीब जाने का मौका दे रही है.

अगर आप पांच-छह साल पीछे के अपार्टमेंट कल्चर पर गौर करें तो ज्यादातर मामलों अगल-बगल के फ्लैट में रहने वाले लोगों को भी लोग नहीं जानते थे. लेकिन जब से बी और सी ग्रेड सिटी की बड़ी आबादी बड़े शहरों के अपार्टमेंट कल्चर में आकर बसी हैं तब से यहां भी हालात बदल चुके हैं. अब अपार्टमेंट में रहने वाले लोग माता की चौकी, जगराता, होली मिलन आदि के बहाने बिल्डिंग में रह रहे लोगों से मेल-जोल बढ़ा रहे हैं.

नोएडा के सेक्टर 73 स्थित हार्दिक टॉवर के लोगों ने बताया कि इस बार उन्होंने माता की चौकी का आयोजन किया है. इसके बहाने उन्हें बिल्डिंग में रह रहे लोगों के साथ नजदीकी बढ़ाने में काफी मदद मिली. इसी बल्डिंग में रहने वाले प्रिंस ने बताया कि बिल्डिंग के लोगों ने छोटे स्तर पर आयोजन किया, लेकिन इसमें उत्साह और आपसी भाई-चारा काफी रहा. शंतू और प्रिंस ने बताया कि हमने बिल्डिंग में रहे लोगों को स्वेच्छा से आयोजन के लिए दान करने को कहा. इसके बाद आयोजन बिल्डिंग में रह रहे सभी लोगों की सहभागिता ली. किसी ने लोगों के बैठने का इंतजाम किया तो किसी ने भगवान की तस्वीरें सजाई और किसी ने प्रसाद मंगवाया. 

इस तरह बिल्डिंग में रह रहे सभी लोगों की सहभागिता से आयोजन हो सका. रवि ने बताया कि माता की चौकी के बहाने बिल्डिंग में रह रहे सभी लोगों का आपस में मिलना जुलना हो गया. ऐसे आयोजनों से बिल्डिंग के अलग-अलग फ्लैट में रहने वाले लोगों के बारे में जानने का मौका मिलता है. ऐसे में कई बार आपसी मदद के भी रास्ते खुलते हैं. पांडव नगर में रहने वाले पुनीत उप्रेती ने बताया कि उनके मुहल्ले के लोग भी आपस में पैसे इक्ट्ठे कर छोटे-मोटे आयोजन करते हैं. वहीं नोएडा एक्सटेंशन की एक सोसाइटी में रहने वाले अमरेश ने बताया कि ऐसे आयोजन हमें अकेलापन से बचाते हैं.

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