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आरक्षित सीट मामलाः HC के निर्देश पर कोर्ट में पेश हुए प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी

कोर्ट ने 1 महीने तक चीफ इलेक्ट्रोल ऑफिसर को अपनाए जा रहे मेथड से जुड़ा हलफनामा कोर्ट में पेश करने के निर्देश दिए हैं.

आरक्षित सीट मामलाः HC के निर्देश पर कोर्ट में पेश हुए प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी

(निकिता महेश्वरी)/चंडीगढ़ः झज्जर विधानसभा सीट को आरक्षित रखने के खिलाफ हाईकोर्ट में दायर हुई याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने फिलहाल इस सीट को आरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं. कोर्ट के निर्देशों पर हरियाणा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कोर्ट में पेश हुए. जहां उन्होंने किसी भी सीट को आरक्षित करने को लेकर अपनाए गए मेथड की जानकारी देते हुए बताया कि कहां, किस सीट को और किस आधार पर आरक्षित रखा गया है. इस मामले में चुनाव आयोग ने हाईकोर्ट में झज्जर विधानसभा सीट से जुड़े जातिगत रिकॉर्ड भी पेश किए.

कोर्ट को चीफ इलेक्ट्रोल ऑफिसर की तरफ से पेश हुए वकील चेतन मित्तल ने बताया कि 2001 सेंसस को ध्यान में रखते हुए हरियाणा में सीटें रिजर्व की गई है. किसी भी सीट को विधानसभा लेवल पर नहीं बल्कि जिले के आधार पर रिजर्व किया जाता है. जिस जिले में आरक्षित जाति के लोग ज्यादा होंगे वहीं की सीट रिजर्व होती है. उसके हिसाब से 17 सीटों को रिजर्व किया गया है.

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कोर्ट ने 1 महीने तक चीफ इलेक्ट्रोल ऑफिसर को अपनाए जा रहे मेथड से जुड़ा हलफनामा कोर्ट में पेश करने के निर्देश दिए हैं. गौरतलब है झज्जर निवासी बृजेंद्र ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा है कि 1976 में झज्जर विधानसभा सीट को आरक्षित किया था, जबकि यहां सबसे ज्यादा जाट और यादवों की संख्या है, इसलिए इस विधान सभा क्षेत्र को रिजर्व कैटिगरी से हटाकर सामान्य कैटेगरी की विधानसभा सीट बनाया जाना चाहिए. 

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मामले में बहस शुरू होने पर सरकार की तरफ से कहा गया कि विधानसभा को आरक्षित रखने और नहीं रखने का मामला चुनाव आयोग के दायरे में आता है और इस पर कोई भी फैसला चुनाव आयोग ही ले सकता है, इसलिए हाईकोर्ट इस मामले पर सुनवाई नहीं कर सकता. वहीं बेंच ने तर्क दिया कि आर्टिकल 226 के तहत हाई कोर्ट इस तरह के मामलों पर सुनवाई कर सकता है. इस पर सरकार तरफ से अनुच्छेद 332 क्लॉज 3 का हवाला दिया गया और मामले को कोर्ट के अधिकार क्षेत्र से बाहर बताया गया.