रामपाल ने अपने खिलाफ देशद्रोह की धारा लगाए जाने को दी है हाईकोर्ट में चुनौती

कथित संत रामपाल द्वारा अपने खिलाफ देशद्रोह और गैर-कानूनी गतिविधियों की धाराएं लगाए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की है.

रामपाल ने अपने खिलाफ देशद्रोह की धारा लगाए जाने को दी है हाईकोर्ट में चुनौती
.(फाइल फोटो)

चंडीगढ़: कथित संत रामपाल द्वारा अपने खिलाफ देशद्रोह और गैर-कानूनी गतिविधियों की धाराएं लगाए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की है. पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार से पूछा कि अगर सरकार के पास रामपाल के खिलाफ देश द्रोह का कोई सबूत हैं तो उसे हाईकोर्ट में पेश किया जाए.जस्टिस दया चौधरी एवं सुधीर मित्तल की खंडपीठ ने मामले की पिछली सुनवाई पर हरियाणा सरकार नोटिस जारी कर जवाब मांगा था. सुनवाई शुरू हुई तो रामपाल की ओर से सीनियर एडवोकेट विनोद घई ने कहा कि रामपाल के खिलाफ देशद्रोह की धारा बिना किसी सबूत और आधार पर लगा दी गई है. सरकार

के पास ऐसा कोई सबूत और साक्ष्य ही नहीं है. सरकार के पास टेररिस्ट एक्ट के तहत रामपाल के खिलाफ क्या सबूत है, वह सबूत पेश किया जाना बेहद जरुरी है. इस पर जब हरियाणा सरकार से जवाब मांगा गया तो वह बिना किसी लिखित जवाब के दलील देने लगे, इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार पहले सबूत पेश कर बताए कि देशद्रोह की धारा किस आधार पर लगाई गई है, उसके बाद ही अब आगे दलीलें सुनी जाएंगी.

हाईकोर्ट के इस सवाल पर सरकार की ओर जवाब दायर किए जाने के लिए कुछ समय दिए जाने की मांग की गई. हाईकोर्ट ने सरकार को समय देते हुए याचिका पर सुनवाई 29 नवंबर तक स्थगित कर दी है. गौरतलब है 18 नवंबर 2014 को जब रामपाल को उनके आश्रम से गिरफ्तार किया गया था, तब  पुलिस ने रामपाल के खिलाफ हत्या, देश के खिलाफ युद्ध करने आदि की धाराओं के साथ-साथ दी अन लॉ फुल एक्टिविटी प्रिवेन्शन एक्ट 1967 आदि धारा भी लगा दी थी.

इन धारा के मुताबिक पुलिस ने रामपाल को आतंकवादी संगठन का सदस्य एवं आतंकी गतिविधियों में शामिल होना बताया है. इसके खिलाफ रामपाल ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा है कि उन पर सिर्फ अदालत की आपराधिक अवमानना का मामला है. गलती या किसी अन्य कारण के वो इन आदेशों को नहीं मान पाए, इसका अर्थ यह नहीं हो जाता है की उन्हें देशद्रोही करार दे दिया जाए.

रामपाल ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि यह सभी धारा उसके उपर गलत तरीके से लगाई गई है. उस पर वो धारा भी लगाई गई, जिस आरोप में वह न तो शामिल था और न ही उससे उसका कोई लेना देना था. रामपाल ने इन सभी एफ.आई.आर. को रद्द कर इस मामले की सी.बी.आई. जांच की भी मांग की है.