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1984 सिख दंगा: सजायाफ्ता सज्जन कुमार को SC से राहत नहीं; जमानत याचिका पर अगस्त तक टली सुनवाई

सीबीआई ने कहा था कि सज्जन कुमार के खिलाफ अपराध साबित हो चुके हैं, दूसरे मामलों की सुनवाई जारी है और सीबीआई के काम में अड़चन डाल चुके हैं.

1984 सिख दंगा: सजायाफ्ता सज्जन कुमार को SC से राहत नहीं; जमानत याचिका पर अगस्त तक टली सुनवाई

नई दिल्‍ली: 1984 सिख दंगा मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे सज्जन कुमार को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है. कोर्ट ने सज्जन कुमार की जमानत याचिका पर अगस्त माह तक सुनवाई टाल दी है. दरअसल, पिछली सुनवाई में सीबीआई ने सज्जन कुमार की जमानत का सुप्रीम कोर्ट में विरोध किया था. सीबीआई ने कहा था कि सज्जन कुमार के खिलाफ अपराध साबित हो चुके हैं, दूसरे मामलों की सुनवाई जारी है और सीबीआई के काम में अड़चन डाल चुके हैं.

कोर्ट ने सीबीआई से बाकी मुकदमों का ब्यौरा मांगा था. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस संजीव खन्ना ने सज्जन कुमार की जमानत याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था. सुप्रीम कोर्ट सज्जन कुमार की अपील और जमानत याचिका पर सीबीआई को नोटिस जारी कर 6 हफ्ते में जवाब मांगा था.

आपको बता दें कि सज्जन कुमार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर कर दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी हुई है, जिसमें हाईकोर्ट ने सज्जन कुमार को दिल्ली कैंट इलाके में सिखों के कत्लेआम मामले में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी. इसके अलावा कोर्ट ने सज्जन कुमार पर 5 का जुर्माना भी लगाया था.

हाईकोर्ट ने बाकी 5 दोषियों पर एक-एक लाख का जुर्माना लगाया था, जिनमें बलवान खोखर, कैप्टन भागमल, गिरधारी लाल को उम्रकैद जबकिमहेंद्र यादव और किशन खोखर की सजा 3 से 10 साल बढ़ा दी थी. जस्टिस एस मुरलीधर और जस्टिस विनोद गोयल की खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा था कि 1947 में विभाजन के समय हुए नरसंहार के 37 साल बाद फिर हजारों लोगों की हत्या हुई और पीएम की हत्या के बाद एक समुदाय को निशाना बनाया गया. हत्यारों को राजनीतिक संरक्षण था.

पूर्वप्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली कैंट के राज नगर में एक ही परिवार के पांच सदस्यों की हत्या की गई थी. गौरतलब है कि निचली अदालत ने सज्जन कुमार को बरी कर दिया था. वहीं कांग्रेस के पूर्व पार्षद बलवान खोखर, रिटायर्ड नेवी अफसर कैप्टन भागमल, गिरधारी लाल को उम्रकैद की सजा और बाकी दो दोषियों पूर्व MLA महेंद्र यादव, किशन खोखर को 3 साल की सजा सुनाई थी. जबकि कांग्रेसनेतासज्जन कुमारकोबरी कर दिया गया था. निचली अदालत के फैसले के खिलाफ दोषियों ने दिल्ली हाईकोर्ट में अपील की थी. वहीं सीबीआई ने कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को बरी करने के खिलाफ अपील की थी.