डीयू में छात्रों को पढ़ाया जा रहा है- स्कर्ट की तरह छोटा और दिलचस्प हो ईमेल

बीकॉम (ऑनर्स) की एक किताब में छात्रों को सलाह दी गई है कि वह स्कर्ट की तरह छोटा ईमेल लिखें. इसे लेकर विवाद पैदा हो गया है. ‘बेसिक बिजनेस कम्यूनिकेशन’ नाम की किताब दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध एक कॉलेज में वाणिज्य विभाग के पूर्व प्रमुख सीबी गुप्ता ने लिखी है.

डीयू में छात्रों को पढ़ाया जा रहा है- स्कर्ट की तरह छोटा और दिलचस्प हो ईमेल
प्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली: बीकॉम (ऑनर्स) की एक किताब में छात्रों को सलाह दी गई है कि वह स्कर्ट की तरह छोटा ईमेल लिखें. इसे लेकर विवाद पैदा हो गया है. ‘बेसिक बिजनेस कम्यूनिकेशन’ नाम की किताब दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध एक कॉलेज में वाणिज्य विभाग के पूर्व प्रमुख सीबी गुप्ता ने लिखी है.

इस पाठ्यपुस्तक को पढ़ने की सलाह दी जाती है

डीयू से संबद्ध अधिकांश कॉलेजों में बड़े पैमाने पर प्रोफेसरों द्वारा बीकॉम (ऑनर्स) के छात्रों को इस पाठ्यपुस्तक को पढ़ने की सलाह दी जाती है. इस किताब के प्रकाशन को एक दशक से ज्यादा हो चुका है. इसमें कहा गया है, ‘ईमेल संदेश स्कर्ट की तरह होने चाहिए- इतना छोटा हो कि उसमें रूचि बनी रहे और लंबा इतना हो कि सभी महत्वपूर्ण बिंदू इसमें शामिल हो जाएं.’

प्रोफेसर ने लोगों की भावनाएं आहत होने पर खेद जताया

नाम नहीं जाहिर करना चाहते एक छात्र ने कहा, ‘सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर कुछ छात्रों में यह प्रवृत्ति होती है कि पाठ्यपुस्तक में लिखी हर चीज को याद कर लेते हैं, बिना यह महसूस किए कि ऐसी तुलना हमारे समाज में आकस्मिक लिंगवाद को वैधता देती है.’ उन्होंने कहा, ‘गनीमत है, हम यह समझ सके और हमारे पाठ्यक्रम में इस तरह की किताबों की विश्वसनीयता पर सवाल उठा पाए. किसी ने किताब के इस बयान पर सवाल क्यों नहीं उठाया जबकि यह सालों से पुनमरुद्रित हो रही है?’ प्रोफेसर सीबी गुप्ता ने लोगों की भावनाएं आहत होने पर खेद जताया है और कहा कि यह उपमा एक विदेशी लेखक के लेख से ली गई थी.

'मैंने अपनी किताब से यह बयान हटा लिया'

गुप्ता ने पीटीआई को बताया, ‘मैंने अपनी किताब से यह बयान हटा लिया है. मैं प्रकाशक को भी सलाह दूंगा कि वह नए संस्करण की छपाई से पहले यह सामग्री हटा लें.’ यह उपमा क्यों दी गई इस सवाल पर उन्होंने कहा कि यह उनकी तरफ से हुई एक गलती है और उन्होंने यह उपमा एक विदेशी लेखक के लेख से ली थी. गुप्ता ने कहा, ‘यह किसी को आहत करने के लिए नहीं था. मैंने एक विदेशी लेखक के लेख से यह उपमा ली थी.’