SC ने फरीदाबाद कांत एन्‍क्‍लेव को फॉरेस्‍ट लैंड घोषित किया, दिए ध्‍वस्‍त करने के आदेश

सर्वोच्‍च न्‍यायालय का कहना है कि इस बात में संदेह नहीं है कि अरावली की पहाड़ियों के आसपास पर्यावरण को नुकसान हुआ है.

SC ने फरीदाबाद कांत एन्‍क्‍लेव को फॉरेस्‍ट लैंड घोषित किया, दिए ध्‍वस्‍त करने के आदेश
फाइल फोटो

नई दिल्‍ली : फरीदाबाद के कांत एन्‍क्‍लेव मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बड़ा फैसला दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए फरीदाबाद कांत एन्‍क्‍लेव को वन भूमि घोषित किया है. सर्वोच्‍च न्‍यायालय का कहना है कि इस बात में संदेह नहीं है कि अरावली की पहाड़ियों के आसपास पर्यावरण को नुकसान हुआ है.

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सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार से कहा है कि 18 अगस्त 1992 के बाद के निर्माण को ध्‍वस्त किया जाए क्योंकि वो अवैध निर्माण हैं. अवैध निर्माण को गिराने की कार्रवाई 31 दिसंबर तक पूरा किया जाए. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अरावली हिल को जो नुकसान पहुंचाया गया है, उसकी भरपाई नहीं है. फिर भी जो भी उपाय है उसको किया जाना चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को निर्देश दिया है कि मामले को दो भागों में बांट जाता है. पहली कैटेगरी में वो लोग हैं, जिन्होंने निवेश किया है. ऐसे लोगों को पूरा का पूरा पैसा 18 फीसदी ब्याज के साथ वापस किया जाए. ये पैसा देने की जिम्‍मेदारी कंस्ट्रक्शन कंपनी आर कांत एंड कंपनी की होगी. पैसा यही कंपनी देगी.

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जहां तक कांत एन्‍क्लेव में निर्माण को छूट देने का सवाल है तो 18 अगस्त 1992 को जब ये नोटिफिकेशन आया था, उसके बाद कोई भी निर्माण कार्य अवैध और कानून के खिलाफ है. सरकार के नोटिफिकेशन के तहत 1992 से पहले कंस्ट्रक्शन को सेव किया गया था. सुप्रीम कोर्ट ने CEC की मांग को स्वीकार किया है. इसमें कहा गया कि 17 अप्रैल 1984 से 18 अगस्त 1992 तक के निर्माण को न छेड़ा जाए.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आर कांत कंपनी ने कहा कि उन्होंने इन्क्लेव को डेवलप करने के लिए 50 करोड़ रुपये खर्च किए हैं. लेकिन कंपनी जो नुकसान पहुंचाया है उसकी भरपाई के लिए वो पांच करोड़ रुपये जमा करे. ये रकम एक महीने के भीतर अरावली रिहैबिलिटेशन फंड में जमा करनी होगी. सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा के मुख्य सचिव को कहा कि 31 दिसंबर 2018 तक आदेश को पूरा करे.