तिहाड़ बुलाया गया मेरठ जेल का जल्लाद पवन, निर्भया के हत्यारों को फांसी पर लटकाएगा!

खबर है कि मेरठ के पवन जल्लाद को दिल्ली की तिहाड़ जेल में बुलाया गया है. 

तिहाड़ बुलाया गया मेरठ जेल का जल्लाद पवन, निर्भया के हत्यारों को फांसी पर लटकाएगा!
फाइल फोटो

लखनऊ: देश को दहला देने वाले दिल्ली (Delhi) के निर्भया कांड (Nirbhaya Rape case) के चारों दोषी दिल्ली के तिहाड़ जेल में बंद हैं. खबर है कि मेरठ के पवन जल्लाद को दिल्ली की तिहाड़ जेल में बुलाया गया है. जानकारी के मुताबिक तिहाड़ जेल के अधिकारियों ने यूपी जेल विभाग के अधिकारियों को चिट्ठी लिखकर जल्लाद को दिल्ली भेजने का आग्रह किया है. अब कयास यह लगाए जा रहे हैं कि निर्भया कांड के दोषियों को फांसी पर लटकाने के लिए ही पवन को तिहाड़ बुलाया गया है.   

जानकारी के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में सिर्फ दो जल्लाद हैं. जिनमें से लखनऊ के इलियास जल्लाद की तबियत खराब चल रही है ऐसे में बचा सिर्फ पवन. इसलिए पवन को तिहाड़ जेल बुलाया गया है. उधर, मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यूपी कारागार के महानिदेशक आनंद कुमार ने तिहाड़ का पत्र मिलने की पुष्टि भी कर दी है.

आपको बता दें कि बुधवार (11 दिसंबर) को मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के खंडवा जिले (Khandwa District) के एक रिटायर्ड फौजी ने निर्भया कांड (Nirbhaya Rape Case) के दोषियों को फांसी देने के लिए जल्लाद बनने की पेशकश की थी. इसके लिए रिटायर्ड फौजी ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को चिट्ठी भी लिखी है.

जल्लाद बनने को तैयार रिटायर्ड फौजी प्रदीप सिंह ठाकुर ने कहा कि वो इस काम के बदले अपनी ओर से 5 लाख रुपए भी सरकारी खजाने में जमा करेंगे. दरअसल, खबरों के जरिए उन्हें पता चला कि निर्भया कांड के दोषियों को सजा देने के लिए जल्लाद नहीं है, तो उन्होंने खुद ही जल्लाद बनकर ऐसे अपराधियों से समाज को मुक्त करने की पेशकश की. उन्होंने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को इस बाबत चिट्ठी लिखी है. उनका कहना है कि वो खुद जल्लाद बनकर ऐसे अपराधियों को दुनिया से मुक्त करना चाहते हैं.

खंडवा के ओमकारेश्वर निवासी प्रदीप ठाकुर भारतीय थल सेना में सिपाही के पद पर रह चुके हैं और सेना में कोड आफ सिगनल का काम करते थे. लगभग 8 साल की सेवा देने के बाद मेडिकल ग्राउंड पर भारतीय सेना से उन्होंने रिटायरमेंट ले लिया. फिलहाल, प्रदीप ठाकुर ओमकारेश्वर में नर्मदा की सफाई जैसे समाज सेवा के काम करते हैं. उन्होंने मृत्यु के बाद मेडिकल कॉलेज के लिए अपने देहदान करने का पंजीयन भी कराया है.

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