close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

चंडीगढ़ में पेड़ नही ले पा रहे हैं सांस, घुट रहा है दम, कंक्रीट से घिरी हुई हैं जड़ें

मानसून में तेज़ हवाओं और बारिश के दौरान पेड़ गिरते हैं. इसका सबसे बड़ा कारण ये है कि पेड़ कमज़ोर होते हैं. 

चंडीगढ़ में पेड़ नही ले पा रहे हैं सांस, घुट रहा है दम, कंक्रीट से घिरी हुई हैं जड़ें
चंडीगढ़ नगर निगम द्वारा हाल ही मे करवाए सर्वे के मुताबिक सामने आया कि 1 लाख 64 हजार पेड़ नगर निगम के पास हैं. जबकि 21 हजार पेड़ों के रखरखाव का जिम्मा प्रशासन के पास है.

चंडीगढ़: पंजाब और हरियाणा की राजधानी चंडीगढ़ ग्रीनरी और खूबसूरती के लिए जाना जाता है लेकिन ये जानकर आपको हैरानी होगी कि चंडीगढ़ के पेड़ सांस लेने में असमर्थ होने के कारण जीवित नहीं बच रहे हैं. चंडीगढ़ नगर निगम द्वारा सर्वे करवाने पर पता चला है कि चंडीगढ़ के 24000 पेड़ों का दम घुट रहा है, क्योंकि पेड़ों के आसपास कंक्रीट और पेवर ब्लॉक लगे होने के कारण पेड़ों की जड़ों को हवा-पानी नहीं मिल रहा. जिसके कारण पेड़ों को सांस लेने में दिक्कत आ रही है और हरे भरे पेड़ कमज़ोर पड़ रहे हैं.

चंडीगढ़ की हरियाली को बचाने के लिए नगर निगम के कमिशनर केके यादव ने रोड विंग, पब्लिक हेल्थ और बागवानी विभाग के सभी कार्यकारी और जिम्मेदार अधिकारियों को आदेश दिये कि नगर निगम 15 जुलाई तक पूरे शहर में सभी पेड़ों को सांस लेने की जगह प्रदान करे. ऐसा करने के लिए पेड़ों के आसपास जो कंक्रीट बना हुआ है, उसे तोड़ा जा रहा है.

ज़ी मीडिया से बातचीत करते हुए नगर निगम कमिश्नर केके यादव ने बताया कि सभी पेड़ों के चारों तरफ 4 से 6 फुट की जगह कच्ची की जा रही है, ताकि बारिश के पानी की अच्छे तरीके से निकासी हो सके और पेड़ों की जड़ों को हवा, पानी और खाद मिल सके. कमिश्नर ने अधिकारियों को भी चेताया है कि मानसून ने दस्तक दे दी है. ऐसे में पेड़ों के आसपास जगह खाली होगी तो शहर में जलभराव की स्थिति पैदा नहीं होगी. कमिश्नर ने रोड विंग को पेड़ों के आसपास कम से कम पेवर ब्लॉक लगाने की हिदायत दी है. इसके साथ ही अर्बन ग्रीन गाइडलाइंस 2014 को ठीक से लागू करने के आदेश दिए है.

मानसून में तेज़ हवाओं और बारिश के दौरान पेड़ गिरते हैं. इसका सबसे बड़ा कारण ये है कि पेड़ कमज़ोर होते हैं. बता दें कि हाल ही में शहर में तेज आंधी और बारिश के कारण 27 से ज्यादा पेड़ टूटकर गिर गए थे. चंडीगढ़ कमिशनर केके यादव ने बताया कि सर्वे के दौरान पेड़ों के गिरने के तीन कारण सामने आए हैं. शहर में जो उच्च तापमान बढ़ रहा है और वायु प्रदूषण जैसी समस्याएं पैदा हो रही है. ऐसा पेड़ों के आसपास जगह न छोड़ने के कारण भी हो रहा है. इसलिए पेड़ों को मजबूत और जिंदा रखने की कवायद शुरू की गई है. कमिश्नर ने कहा कि जिन इलाके के एक्सईएन ने खामियां छोड़ीं, उनपर एक्शन भी लिया जाएगा.

वहीं, बागवानी विशेषज्ञ राहुल महाजन ने कहा कि पहले नगर निगम ने खुद ही निर्माण के दौरान गलतियां की औऱ अब सुधार कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि पेड़ के आसपास 4 या 6 फुट की बजाए पेड़ की शाखाओं ने जितनी जगह कवर की है उतना स्पेस छोड़ा जाए. इससे जो पत्ते गिरते हैं वहीं खाद के रूप में पेड़ को मिलेंगे और इससे पेड़ की जड़ों तक भरपूर हवा पानी भी पहुंच पाएगा. विशेषज्ञ राहुल महाजन ने कहा कि अधिकारियों को सड़क किनारे इस तरह से पेड़ लगाने की हिदायत दी जानी चाहिए ताकि भविष्य में निर्माण होने पर पेड़ों की जड़ों को कोई खतरा न पहुंचे.  

चंडीगढ़ नगर निगम द्वारा हाल ही मे करवाए सर्वे के मुताबिक सामने आया कि 1 लाख 64 हजार पेड़ नगर निगम के पास हैं. जबकि 21 हजार पेड़ों के रखरखाव का जिम्मा प्रशासन के पास है. इस गिनती में पंजाब यूनिवर्सिटी, CSIO, सभी स्कूल, कॉलेज आदि को बाहर रखा गया है. अगर इनको मिलाया जाए तो गिनती 3 लाख से ज्यादा पहुंच जाती हैं. जबकि लाखों की गिनती में पेड़ चंडीगढ में लोगों के घरों में लगे हुए हैं. नगर निगम कमिशनर केके यादव ने आम लोगों से भी अपील की है कि चंडीगढ़ के पेड़ों को बचाने के लिए लोग भी सहयोग दें. अगर वो किसी पेड़ के आसपास कंक्रीट या पेवर ब्ला्क देखते है तो उसकी जानकारी नगर निगम को दें.