स्वाधार गृहों में यौन शोषण की शिकायतों के बाद महिला आयोग ने बनाई जांच समिति

देश के कुछ स्वाधार गृहों में महिलाओं के साथ कथित यौन शोषण की खबरों पर संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय महिला आयोग ने सरकार द्वारा वित्तपोषित सभी स्वाधार गृहों के निरीक्षण के लिए एक जांच समिति का गठन किया है.

स्वाधार गृहों में यौन शोषण की शिकायतों के बाद महिला आयोग ने बनाई जांच समिति
स्वाधार गृहों की स्थापना पीड़ित महिलाओं की मदद एवं पुनर्वास के मकसद से की गई है.(प्रतीकात्मक तस्वीर)

नई दिल्ली: देश के कुछ स्वाधार गृहों में महिलाओं के साथ कथित यौन शोषण की खबरों पर संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय महिला आयोग ने सरकार द्वारा वित्तपोषित सभी स्वाधार गृहों के निरीक्षण के लिए एक जांच समिति का गठन किया है. आयोग द्वारा गठित तीन सदस्यीय समिति महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की स्वाधार गृह योजना के तहत चल रहे सभी स्वाधार गृहों के संचालन का जायजा लेगी. महिला आयोग की ओर से जारी बयान में कहा गया है, ‘‘पहले चरण में यह समिति बिहार, कर्नाटक, मिजोरम, ओडिशा, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में स्वाधार गृहों का निरीक्षण करेगी. ’’ आयोग ने कहा कि समिति स्वाधार गृहों का निरीक्षण करने के एक सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट और अनुशंसाएं आयोग को सौंपेगी. गौरतलब है कि स्वाधार गृहों की स्थापना विभिन्न अपराध की पीड़ित महिलाओं की मदद एवं पुनर्वास के मकसद से की गई है. 

सुधार गृहों में बच्चों के शोषण पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को लगाई फटकार, पूछा- अभी तक क्या कार्रवाई हुई?
बिहार के मुजफ्फरपुर में बालिका गृह में 34 लड़कियों से यौन शोषण के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को "बाल संरक्षण नीति" बनाने पर विचार करने को कहा है. जस्टिस मदन बी. लोकुर और जस्टिस दीपक गुप्ता की अध्यक्षता वाली पीठ ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार से पूछा कि देश भर में शेल्टर होम में रहने वाले 1575 बच्चे यौन शोषण के शिकार हुए, इन मामलों में क्या कार्रवाई हुई? केंद्र सरकार ने कोर्ट को बताया कि कार्रवाई राज्य सरकारों का काम है, उनसे जानकारी लेनी होगी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमें बताइए कि किन राज्यों ने ज़रूरी कार्रवाई नहीं की. केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को भरोसा दिलाया है कि शेल्टर होम का सोशल ऑडिट अक्तूबर तक कर लिया जाएगा. 

दरअसल, पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में रेप के किसी भी मामले में नाबालिग पीड़ित के इंटरव्यू और उसे किसी भी तरह से दिखाने पर रोक लगाई थी. कोर्ट ने बिहार के मुजफ्फरपुर के बालिका आश्रय गृह में बच्चियों के बलात्कार मामले की सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया था. इस मामले में आरोपी की पत्नी के फेसबुक पर पीड़िता के नाम उजागर करने पर कोर्ट ने उसे गिरफ्तार करने और नाम हटाने का निर्देश दिया था. कोर्ट ने कहा था कि NCPCR और राज्य कमीशन रेप पीड़ित से बात कर सकते है, बशर्ते उनके साथ मनोवैज्ञानिक हो. कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा था कि हालिया NGO के बारे में किये गए सर्वे के बारे में रिपोर्ट पेश करे. 

बिहार सरकार को लगाई थी फटकार
सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई के दौरान बिहार सरकार को फटकार लगाते हुए कहा था कि बिना जांच-पड़ताल कैसे शेल्टर होम को इतने सालों से फंड दे रहे थे? एमिकस क्यूरी ने बताया था कि कई सालों बाद 2017 में सोशल ऑडिट हुआ. लेकिन ऑडिट करने वाले वहां के स्टाफ से बात कर निकल गए. बच्चियों से बात ही नहीं की. सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार से कई सवाल पूछा था कि NGO को पैसा बिना किसी उचित जांच के दिया गया था, उनकी विश्वनीयता की जांच हुई? कब से पैसा दिया जा रहा है, साल 2004 से आप पैसा दे रहे है, वो भी बिना पड़ताल किए? क्या पीड़ित लड़कियों की कॉउंसलिंग की गई? सिर्फ एक होम का मामला नहीं है, 15 ऐसे होम है. बिहार सरकार ने कहा था कि सब पर एक्शन लिया गया है, गिरफ्तारी हुई है. 

इनपुट भाषा से भी