लेखकों को अकादमिक पुरस्कार लौटाने की जगह विरोध का दूसरा तरीका अपनाना चाहिए: विश्वनाथ तिवारी

साहित्य अकादमी के अध्यक्ष डॉक्टर विश्वनाथ तिवारी ने साहित्यकारों के अकादमिक पुरस्कार लौटाने को गलत बताया है। उन्होंने कहा कि साहित्यकारों को पुरस्कार लौटाने की बजाय विरोध का दूसरा तरीका अपनाना चाहिए। विश्वनाथ तिवारी ने कहा कि लेखकों को अकादमिक पुरस्कार सरकार नहीं साहित्य अकादमी देती है। उन्हें यह पुरस्कार उनके साहित्यिक योगदान और गुणवत्ता के लिए दिया जाता है। उन्होंने कहा कि लेखकों के पुरस्कार लौटाने से ऐसा लगेगा कि लेखक साहित्य अकादमी के खिलाफ विरोध कर रहे हैं और इससे वह जिस चीज़ के खिलाफ खड़े हो रहे हैं वह कमजोर पड़े जाएगा।

लेखकों को अकादमिक पुरस्कार लौटाने की जगह विरोध का दूसरा तरीका अपनाना चाहिए: विश्वनाथ तिवारी

नई दिल्ली: साहित्य अकादमी के अध्यक्ष डॉक्टर विश्वनाथ तिवारी ने साहित्यकारों के अकादमिक पुरस्कार लौटाने को गलत बताया है। उन्होंने कहा कि साहित्यकारों को पुरस्कार लौटाने की बजाय विरोध का दूसरा तरीका अपनाना चाहिए। विश्वनाथ तिवारी ने कहा कि लेखकों को अकादमिक पुरस्कार सरकार नहीं साहित्य अकादमी देती है। उन्हें यह पुरस्कार उनके साहित्यिक योगदान और गुणवत्ता के लिए दिया जाता है। उन्होंने कहा कि लेखकों के पुरस्कार लौटाने से ऐसा लगेगा कि लेखक साहित्य अकादमी के खिलाफ विरोध कर रहे हैं और इससे वह जिस चीज़ के खिलाफ खड़े हो रहे हैं वह कमजोर पड़े जाएगा।

 

गौरतलब है कि  देश में खराब होते सांप्रदायिक माहौल के खिलाफ साहित्यकारों का विरोध बढ़ते जा रहा है। इसके विरोध में कवि  अशोक वाजपेयी, उदय प्रकाश, नयनतारा, सारा जोसेफ और अमन सेठी समेत कई साहित्यकार और बुद्धिजीवी अपना साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटा चुके हैं। रविवार को 9 लेखकों ने दादरी हिंसा और लेखक एम.एम. कलबुर्गी की हत्या के विरोध में साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटाया। सबसे पहले कवि और लेखक उदय प्रकाश ने अपना साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटाया था। साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटाने वाले कवियों और लेखकों  में मंगलेश डबराल, राजेश जोशी,  गणेश देवी, एन. शिवदास, गुरबचन सिंह भुल्लर, अजमेर सिंह औलख आदि शामिल हैं।

 

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