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ZEE जानकारीः पर्यावरण को होने वाले नुकसान के बचाने की नेक कोशिश का असर

बकरीद के मौके पर दिल्ली के जामा मस्ज़िद और उसके आस-पास के इलाकों में पिछले दो दशकों से हर बार गंदगी फैला करती थी.

ZEE जानकारीः पर्यावरण को होने वाले नुकसान के बचाने की नेक कोशिश का असर

स्वच्छता को लेकर जापान की मशहूर लेखिका, Marie Kondo का एक प्रसिद्ध कथन है. उनका कहना था, कि सफाई करने का मकसद सिर्फ स्वच्छता नहीं है, इसका मकसद है अपने आसपास के वातावरण का ख्याल रखना और उसमें रहते हुए खुशी महसूस करना.

बकरीद से एक दिन पहले हमने कुर्बानी, बलि देने की परंपरा, मांसाहार और धरती के पर्यावरण को इससे होने वाले नुकसान का विश्लेषण किया था. ये विश्लेषण बहुत सारे लोगों को अच्छा नहीं लगा था.लेकिन मुस्लिम समुदाय के बहुत सारे लोग ऐसे भी थे, जिन्होंने इस ख़बर को सकारात्मक तरीके से लिया. और ईद के दिन पर्यावरण पर अत्याचार ना करने की ठानी. इसलिए आज उनकी नेक कोशिश के बारे में आपको बताना आवश्यक है.

बकरीद के मौके पर दिल्ली के जामा मस्ज़िद और उसके आस-पास के इलाकों में पिछले दो दशकों से हर बार गंदगी फैला करती थी. जानवरों की बलि देने के बाद सड़कों पर उनका खून फैल जाता था. लेकिन इस बार बकरीद के मौके पर स्थिति बिल्कुल बदली हुई थी. सड़कें साफ थीं. दूर-दूर तक खून का एक धब्बा तक दिखाई नहीं दिया. सबने अपनी तरफ से कोशिश की, कि इस बार की बकरीद Eco-Friendly हो. और ये सब इसलिए मुमकिन हो पाया, क्योंकि, जामा मस्ज़िद और उसके आस-पास रहने वाले लोग स्वच्छता को लेकर काफी गंभीर थे. स्थानीय लोग हों, मोहल्ला सुधार कमेटी हो, या फिर Resident welfare associations के लोग हों, सबकी कोशिश यही थी, कि एक स्वच्छ वातावरण में बकरीद का त्यौहार मनाया जाए. हम इस पहल की तहे-दिल से तारीफ़ करते हैं.

आज ज़ी न्यूज़ की टीम ने जामा मस्ज़िद के आसपास के इलाके में जाकर, इस प्रगतिशील सोच को, पूरे देश तक पहुंचाने का फैसला किया. हमें यकीन है, कि यहां के लोगों की बातें सुनने के बाद देश के बहुत सारे लोगों की सोच बदल जाएगी.