#JusticeForNirbhaya: ZEE NEWS की मुहिम के साथ जुड़ा देश, अब तक 21 लाख से ज्यादा मिस्ड कॉल

देश को दहला देने वाले निर्भया केस (Nirbhaya Case) में न्याय का इंतजार 7 साल से भी लंबा हो चुका है.

#JusticeForNirbhaya: ZEE NEWS की मुहिम के साथ जुड़ा देश, अब तक 21 लाख से ज्यादा मिस्ड कॉल

नई दिल्ली: निर्भया (Nirbhaya Case) को इंसाफ दिलाने के लिए चलाई गई ZEE NEWS की मुहिम में अब तक 21 लाख से ज्यादा लोगों का समर्थन मिल चुका है. देश को दहला देने वाले निर्भया केस (Nirbhaya Case) में न्याय का इंतजार 7 साल से भी लंबा हो चुका है. हमारा मकसद है कि अब निर्भया के कातिलों को फांसी में एक पल की भी देरी नहीं होनी चाहिए. 

इसके लिए ZEE NEWS की मुहिम #JusticForNirbhaya को पूरे देश से समर्थन मिल रहा है. हमने कल अपने खास शो DNA में आपसे सवाल किया था कि क्या निर्भया के इंसाफ पर आपके सब्र का बांध टूट चूका है? यदि आप हमारी इस मुहिम से जुड़ना चाहते हैं तो इसके लिए आपको 7834998998 पर मिस्ड कॉल देनी है. आपको जानकर हैरानी होगी कि हमारी इस मुहिम को समर्थन देने के लिए पहले 2 घंटे में ही 7 लाख से ज्यादा लोगों ने मिस्ड कॉल दी. कल रात 9 बजे से 12 बजे तक इस मुहिम से 10 लाख 73 हजार 460 लोग जुड़े. 

गुरुवार (20 फरवरी) शाम छह बजे तक इस मुहिम के साथ 21 लाख से ज्यादा लोग जुड़ चुके हैं. इसलिए आप भी जल्दी अपना फोन उठाएं और 7834998998 पर मिस्ड कॉल दें. इसके अलावा आप. #MaaKaSandesh पर Tweet करके भी अपनी प्रतिक्रियाएं दे सकते हैं.

इस कड़ी में निर्भया की मां आशा देवी आज ZEE न्यूज़ के शो DNA में राष्ट्र के नाम अपना संदेश दिया  (#MaaKaSandesh).. निर्भया ने 16 दिनों तक मौत से संघर्ष किया था. इन 20621 दिनों में शायद ही कोई ऐसा दिन रहा होगा. साल वर्ष 2 महीनों और 4 दिन से अपनी बेटी के लिए न्याय का इंतजार कर रही है. 

WATCH: DNA

निर्भया की मां ने कहा, ''...मैं सरकार से कहना चाहती हूं कि जो भी कानून में खामियां हैं, उसे सुधारिए. कल सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई है. मैं कोर्ट से अनुरोध करना चाहती हूं कि देश के कानून पर विचार करे. निर्भया के दोषियों को 3 मार्च को फांसी हो और समाज में एक संदेश जाए. मैं सात साल से देख रही हूं, मैंने सुना था कि सुनवाई के तारीख मिलती है लेकिन मैंने कभी नहीं सुना था कि फांसी टालने के लिए भी तारीख पर तारीख मिलती है...''

DNA Analysis: देश की हर लड़की का सवाल आखिर मैं क्यों मरूं, अपराधी क्यों नहीं मरे?

''...फांसी तो अदालतों में सुना दी जाती है लेकिन फांसी होती नहीं है. आप लोग देख रहे हैं कि मैं निर्भया के दोषियों को फांसी दिलाने के लिए कितना संघर्ष कर रही हूं. आज भी मुझे मेरी बेटी की चीख सुनाई देती है. उसका कटा हुआ शरीर मुझे दिखाई देता है. मैं अपने देश की बेटियों से कहना चाहती हूं कि इंसाफ हमें मांगने से नहीं मिलेगा. हम इंसाफ छीन कर लेंगे...''

''...मैं आप सभी देशवासियों से अपील करती हूं कि जिस तरह से आपने निर्भया को इंसाफ दिलाने के लिए साथ दिया उसी तरह देश की सभी बेटियों को इंसाफ दिलाने की लड़ाई भी लड़नी होगी. अगर निर्भया के दोषियों को फांसी नहीं होती है तो देश में किसी बेटी को इंसाफ नहीं मिलेगा. मैं सरकार और कोर्ट से प्रार्थना करती हूं कि कल सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई है. कोई नई गाइडलाइन ना आए और कोई ऐसा नियम ना आए जिससे निर्भया के दोषियों को सजा देने में और देरी हो...''