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शादी के लिए लड़के-लड़की की उम्र हो समान, याचिका पर हाईकोर्ट ने मोदी सरकार से मांगा जवाब

लड़का और लड़की की शादी की उम्र एक समान करने की मांग वाली ये जनहित याचिका बीजेपी नेता और वकील अश्विनी उपाध्याय ने दायर की है. इस पर दिल्ली हाइकोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है. अगली सुनवाई 30 अक्टूबर को होगी.

शादी के लिए लड़के-लड़की की उम्र हो समान, याचिका पर हाईकोर्ट ने मोदी सरकार से मांगा जवाब
प्रतीकात्‍मक फोटो

नई दिल्‍ली: शादी के लिए लड़का और लड़की की उम्र एक समान हो, इसके लिए दिल्‍ली हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई है. इस पर कोर्ट ने केंद्र सरककार को नोटिस जारी किया है. लड़का और लड़की की शादी की उम्र एक समान करने की मांग वाली ये जनहित याचिका बीजेपी नेता और वकील अश्विनी उपाध्याय ने दायर की है. इस पर दिल्ली हाइकोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है. अगली सुनवाई 30 अक्टूबर को होगी.

विवाह के लिए न्‍यूनतम उम्र के मामले पर दिल्‍ली हाईकोर्ट में बुधवार 14 अगस्‍त को याचिका दाखिल की गई. याचिका में कहा गया है कि शादी के लिए उम्र का निर्धारण लड़के के लिए अलग व लड़कियों के लिए अलग किया गया है जो लैंगिक समानता, न्‍याय और महिलाओं के सम्‍मान के विरुद्ध है. विवाह के लिए लड़कों की 21 वर्ष और लड़कियों की 18 वर्ष न्‍यूनतम उम्र बताई गई है.

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याचिकाकर्ता अश्‍विनी कुमार उपाध्‍याय ने याचिका में लड़कियों और लड़कों के लिए शादी की न्‍यूनतम उम्र एक समान करने की मांग की है. याचिका में दावा किया है कि लड़के-लड़कियों के लिए न्‍यूनतम वैवाहिक उम्र का निर्धारण हमारे पितृसत्‍तात्‍मक समाज को दर्शाता है, क्‍योंकि इसके पीछे कोई वैज्ञानिक तथ्‍य नहीं है.   

इसके पहले अश्‍वि‍नी कुमार ने सरकार को राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्र गान ‘जन गण मन’ के समान दर्जा और सम्मान देने के लिए राष्ट्रीय बनाने का निर्देश देने का अनुरोध करते हुए एक याचिका दाखिल की थी जिसे खारिज कर दिया गया था.