नेशनल हेराल्ड केस: दिल्ली हाईकोर्ट ने रखा आदेश सुरक्षित, 10 सितंबर को आएगा फैसला

नेशनल हेराल्ड और यंग इंडिया के बीच लेनदेन के दोबारा से टैक्स आंकलन को लेकर राहुल और सोनिया गांधी की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को अपना आदेश सुरक्षित रख लिया.

नेशनल हेराल्ड केस: दिल्ली हाईकोर्ट ने रखा आदेश सुरक्षित, 10 सितंबर को आएगा फैसला
फाइल फोटो

नई दिल्ली: नेशनल हेराल्ड और यंग इंडिया के बीच लेनदेन के दोबारा से टैक्स आंकलन को लेकर राहुल और सोनिया गांधी की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को अपना आदेश सुरक्षित रख लिया. हाईकोर्ट 10 सितंबर को याचिका पर अपना आदेश सुनाएगा. दरअसल, पिछली सुनवाई में सोनिया गांधी की ओर से पेश पी चिदंबरम ने दलील दी थी कि इनकम टैक्स ने फंसाने के मकसद से केस को दोबारा खोला गया है. आयकर विभाग द्वारा वित्तीय वर्ष 2011-12 के मामले में भेजे गए पुनर्मूल्यांकन नोटिस के खिलाफ कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, सोनिया गांधी और ऑस्कर फर्नांडिस ने याचिका दायर की थी. पिछली सुनवाई में वरिष्ठ वकील पी चिदंबरम ने दिल्ली हाईकोर्ट के सामने पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष का पक्ष रखा था.

कंपनियों के बीच लेनदेन से नहीं हुई कोई आय
पी चिदंबरम ने कोर्ट को बताया था कि यंग इंडियन कंपनी व नेशनल हेराल्ड के लेनदेन से किसी तरह की आय नहीं हुई. चिदंबरम ने दलील दी थी कि अगर इस पर आयकर बनता है तब भी इसका लाभ यंग इंडियन में पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष जैसे शेयर होल्डर के हाथों में नहीं जाएगा. दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा था कि वह दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखेगी और इसके बाद ही आयकर विभाग को निर्देश देगी कि मामले में अंतिम फैसला आने तक कोई कदम न उठाए. इस दौरान पी चिदंबरम ने सोनिया गांधी, राहुल गांधी व ऑस्कर फर्नांडीस की तरफ से कहा कि इस संबंध में मीडिया में प्रकाशन पर रोक लगाई जाए, लेकिन पीठ ने इससे इन्कार कर दिया. चिदंबरम ने कहा था कि अगर वह एक पल के लिए मान भी लें कि यंग इंडियन से आय हुई थी, तब भी यह आय वित्तीय वर्ष 2011-12 में यंग इंडियन कंपनी के शेयर होल्डर की आय नहीं हो सकती.

आयकर विभाग ने गलत अपील की
चिदंबरम ने कहा था कि सोनिया गांधी के वित्तीय वर्ष 2011-12 के पुनर्मूल्यांकन की दोबारा जांच के दौरान आयकर विभाग ने गलत तरीके से अपील की थी. चिदंबरम ने कहा था कि उनकी याची जब कंपनी की शेयर होल्डर बनीं, तो उन्हें कंपनी के 1900 शेयर के अलावा न तो संपत्ति मिली और न ही आय हुई. उन्होंने कहा कि कंपनी सेक्शन-25 के तहत यह एक गैर लाभ संपत्ति है, जोकि अपने शेयर होल्डर को कुछ नहीं देती. ऐसे में यह कहना कि इससे कुछ लाभ हुआ है तो यह विरोधाभास है.