Delhi Blast: दिल्ली के लाल किले के पास हुए धमाके ने देश की राजधानी को हिला दिया है. शुरुआती जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे इस आतंकी हमले के पीछे पाकिस्तान और उसके आतंकी नेटवर्क की संलिप्तता की ओर इशारा करते हैं.
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DNA: पाकिस्तान ने टेरर अटैक का पैटर्न तो बदल दिया लेकिन पाकिस्तान इस धमाके से पल्ला नहीं झाड़ सकता है क्योंकि अब हम इस धमाके से पहले पाकिस्तान में चल रहे आर्मी और आतंकियों के मूवमेंट के पैटर्न को डीकोड करने वाले हैं. जिस वक्त ये धमाका हुआ. जी न्यूज संवाददाता घटनास्थल के पास ही रिपोर्टिंग कर रहे थे. धमाके की आवाज से सुनते ही वो जब स्पॉट पर पहुंचे तो उनके सामने कई धमाके हुए. इस धमाके के कुछ बातें नोट करने वाली हैं...
1. विस्फोट स्थल पर कोई गड्ढा नहीं बना, जो आमतौर पर बड़े धमाकों में बनता है.
2. धमाके का असर हॉरिजॉन्टली था यानी विस्फोट की शक्ति जमीन के समानांतर फैली, ऊपर की दिशा में नहीं.
3. विस्फोट के बाद भयंकर आग लगी.
4. विस्फोट में इस्तेमाल गाड़ी पूरी तरह नहीं उड़ी, बल्कि जली हुई अवस्था में मिली.
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— Zee News (@ZeeNews) November 11, 2025
इन तथ्यों से यह संकेत मिलते हैं कि धमाके में लो-इंटेंसिटी एक्सप्लोसिव, यानी अमोनियम नाइट्रेट-फ्यूल ऑयल (ANFO) का इस्तेमाल किया गया था. यह विस्फोटक तकनीकी रूप से साधारण होते हुए भी डिटोनेट करने में जटिल होता है और इसे चलाने के लिए विशेष प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है.
3 प्रमुख आतंकी संगठनों ने ANFO का उपयोग
विश्व इतिहास में अब तक सिर्फ 3 प्रमुख आतंकी संगठनों ने ANFO का उपयोग किया है. श्रीलंका का LTTE, अफगान तालिबान और पाकिस्तान में सक्रिय इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत (ISKP). चूंकि LTTE अब अस्तित्व में नहीं है और अफगान तालिबान भारत में हमले नहीं करता इसलिए जांच एजेंसियों का ध्यान अब ISKP की ओर केंद्रित है. खुफिया सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI की ISKP के साथ गहरी सांठगांठ है. ऐसा माना जा रहा है कि पाकिस्तानी सेना ने जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और ISKP के नेटवर्क को एक साथ मिलाकर इस हमले की साजिश रची.
दिल्ली धमाके के संदिग्धों की प्रोफाइल ने भी इस थ्योरी को और मजबूत किया है. सभी आरोपी पढ़े-लिखे, पेशेवर डॉक्टर बताए जा रहे हैं. ठीक वैसे ही जैसे 2019 के श्रीलंका बम धमाके में हुआ था. दोनों घटनाओं में हमलावर शिक्षित परिवारों से थे और फर्टिलाइजर-बेस्ड विस्फोटक का इस्तेमाल किया गया था. यह पैटर्न दिखाता है कि ISKP शिक्षित युवाओं को रैडिकलाइज करने और ब्रेनवॉश करने की रणनीति पर काम कर रहा है. सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान में पिछले कुछ हफ्तों से आतंकी गतिविधियां तेज हुई हैं. 9 नवंबर को पाकिस्तान में जैश-उल-मुमिनात नामक नए संगठन की बैठक हुई थी और इसके बाद पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में दो बड़ी मीटिंग्स हुईं थी. इन बैठकों में पाकिस्तानी सेना और ISI के वरिष्ठ अधिकारी, साथ ही लश्कर, जैश, हिजबुल और ISKP के कमांडर शामिल थे. माना जा रहा है कि इन्हीं कैंप्स में लाल किला ब्लास्ट की योजना तैयार की गई थी. सूत्रों का यह भी कहना है कि जैसे-जैसे भारतीय एजेंसियों ने फरीदाबाद और जम्मू-कश्मीर में आतंक के मॉड्यूल्स पर नकेल कसनी शुरू की, संदिग्ध डॉक्टर उमर नबी और उसके साथियों पर दबाव बढ़ने लगा. पकड़े जाने के डर से उन्होंने कथित तौर पर जल्दबाजी में यह हमला कर दिया.