दिल्ली वालों की इम्युनिटी बढ़ाने आ गई है 'वैदिक थाली'

देश में कोरोना संक्रमण के आंकड़े लगातार बढ़ते जा रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर देश की राजधानी दिल्ली में कोरोना पर काबू पाने की कोशिशें लगातार सकारात्मक दिशा में बढ़ रही है.

दिल्ली वालों की इम्युनिटी बढ़ाने आ गई है 'वैदिक थाली'

नई दिल्ली: देश में कोरोना संक्रमण के आंकड़े लगातार बढ़ते जा रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर देश की राजधानी दिल्ली में कोरोना पर काबू पाने की कोशिशें लगातार सकारात्मक दिशा में बढ़ रही है. वजह है कि दिल्ली में जैसे-जैसे अनलॉक की प्रक्रिया शुरू हुई है, बाजार से लेकर रेस्टोरेंट में खाना-पीना सब धीरे धीरे खुल चुका है.

हालांकि कोरोना महामारी का डर अब भी लोगों में बना हुआ है. लेकिन दिल्ली के एक रेस्टोरेंट ने कोरोना से लड़ने में मददगार ऐसी थाली ही ईजाद कर दी है​ जिसमें इम्युनिटी बढ़ानेवाली आयुर्वेदिक सामग्री से भरपूर व्यंजन स्वादिष्ट भी हैं और सेहतमंद भी.

दिल्ली के दिल कनॉट प्लेस में मौजूद ardor2.1 नाम के रेस्टोरेंट ने संकट की घड़ी को अवसर में बदलने की कोशिश की है. रेस्टोरेंट का दावा है कि इम्युनिटी बूस्टर जायकों से भरपूर थाली लोगों की कोरोना से लड़ने में मदद करेगी और इसका नाम है-वैदिक थाली.

लकड़ी और कोयले का इस्तेमाल
5000 साल पहले वैदिक युग में जिस तरह का खाना होता था और जिस तरीके से पकाया जाता था. उसी आधार पर यह वैदिक थाली तैयार हुई है, जिसमें लकड़ी और कोयले का इस्तेमाल ईंधन की तरह किया जाता है और मिट्टी के बर्तनों में खाना पकाया जाता है.

खाने के मसाले भी आयुर्वेदिक रूप से चुने गए हैं जिससे व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता में इजाफा हो. वैदिक थाली बनाने वाले शेफ कैलाश ने  बताया कि वह किस तरह 5000 साल पुरानी तकनीक से खाना बना कर कोविड-19 में लोगों की इम्युनिटी बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं.

वैदिक थाली में मुख्य रूप से हरी सब्जियों का इस्तेमाल किया गया है. वह सब्जियां जिसमें आयरन, विटामिन सी ,विटामिन डी ज्यादा मात्रा में होता है. साथ ही मसालों के रूप में हल्दी, आंवला, तुलसी, भृंगी, मुलेठी, शंखपुष्पी जैसे आयुर्वेदिक समाग्री का इस्तेमाल किया गया है.

वैदिक थाली का मेन्यू भी आपको लुभा सकता है. इसमें शामिल व्यंजनों के बारे में शायद ही आपने सुना या फिर इन्हें चखा होगा. स्टार्टर में जहां सप्तसामग्री पनीर टिक्का, पात्रा, करेला आलू पीटिका है. वहीं  
मेन कोर्स में लाल साग, गढ़वाल दाल, काफूली, अंजीर के कोफ्ते, कुमाउनी रायता, मडुआ रोटी, आलू गुटक शामिल हैं.

वहीं मीठे में आपको च्यवनप्राश, आइस्क्रीम और सबसे आखिर में डाइजेस्टिव ड्रिंक के रूप में स्पेशल इम्युनिटी बूस्टर काढ़ा परोसा जाएगा.

संकट को अवसर में बदला
वैदिक थाली के नए कॉन्सेप्ट को लानेवाले रेस्टोरेंट मालिक सवीत कालरा का कहना है कि उनकी कोशिश है कि कैसे संकट को अवसर में बदला जाए. संक्रमण के साए में सेहत को परोसा जाए और कैसे स्वाद के साथ सेहतमंद खाना खिलाया जाए.

वैसे इस थाली की कीमत ₹500 से कम है और इसमें आराम से दो व्यक्ति भरपेट खाना खा सकते हैं. नए कॉन्सेप्ट के साथ रेस्टोरेंट की कोशिश है कि आयुर्वेद और वेदों की मार्केटिंग करके बंद पड़ चुके रेस्टोरेंट बिजनेस को किक स्टार्ट किया जा सके.

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