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DU की हिस्ट्री बुक में भगत सिंह को 'क्रांतिकारी आतंकवादी' बताने पर विवाद गहराया

दिल्ली यूनिवर्सिटी के इतिहास के सिलेबस में शामिल एक किताब में भगत सिंह को एक क्रांतिकारी आतंकवादी बताया जाना विवाद का केन्द्र बन गया। भगत सिंह के परिजनों ने इस पर आपत्ति जताई है। वहीं मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने डीयू से इस पर पुनर्विचार करने को कहा है। प्रसिद्ध इतिहासकार बिपिन चन्द्रा और मृदुला मुखर्जी द्वारा ‘स्वतंत्रता के लिए भारत का संघर् ’ शीषर्क से लिखी इस पुस्तक के 20वें अध्याय में भगत सिंह,चन्द्रशेखर आजाद, सूर्य सेन और अन्य को ‘क्रांतिकारी आतंकवादी’ बताया गया है। यह पुस्तक दो दशकों से अधिक समय से डीयू के पाठ्यक्रम का हिस्सा रही है। इस पुस्तक में चटगांव आंदोलन को भी ‘आतंकी कृत्य’ करार दिया गया है, जबकि अंग्रेज पुलिस अधिकारी सैंडर्स की हत्या को ‘आतंकी कार्रवाई’ कहा गया है।

DU की हिस्ट्री बुक में भगत सिंह को 'क्रांतिकारी आतंकवादी' बताने पर विवाद गहराया

नई दिल्ली: दिल्ली यूनिवर्सिटी के इतिहास के सिलेबस में शामिल एक किताब में भगत सिंह को एक क्रांतिकारी आतंकवादी बताया जाना विवाद का केन्द्र बन गया। भगत सिंह के परिजनों ने इस पर आपत्ति जताई है। वहीं मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने डीयू से इस पर पुनर्विचार करने को कहा है। प्रसिद्ध इतिहासकार बिपिन चन्द्रा और मृदुला मुखर्जी द्वारा ‘स्वतंत्रता के लिए भारत का संघर् ’ शीषर्क से लिखी इस पुस्तक के 20वें अध्याय में भगत सिंह,चन्द्रशेखर आजाद, सूर्य सेन और अन्य को ‘क्रांतिकारी आतंकवादी’ बताया गया है। यह पुस्तक दो दशकों से अधिक समय से डीयू के पाठ्यक्रम का हिस्सा रही है। इस पुस्तक में चटगांव आंदोलन को भी ‘आतंकी कृत्य’ करार दिया गया है, जबकि अंग्रेज पुलिस अधिकारी सैंडर्स की हत्या को ‘आतंकी कार्रवाई’ कहा गया है।

भगत सिंह के परिवार ने मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी को एक पत्र लिखकर इस संबंध में हस्तक्षेप करने और पुस्तक में उचित बदलाव करने की मांग की है।विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने यह पुष्टि की कि मंत्रालय ने डीयू को विशेष अध्याय या पुस्तक को पढ़ाए जाने पर पुनर्विचार करने को कहा, विश्वविद्यालय का कहना है कि यह एक ‘संदर्भ पुस्तक’ है न कि एक ‘टेक्स्ट बुक’। इस पुस्तक की विषय वस्तु को ‘लोगों के बलिदान की अकादमिक हत्या’ करार देते हुए ईरानी ने कल आश्वासन दिया था कि वह विश्वविद्यालय को अपनी चिंता से अवगत कराएंगी।’ 

उन्होंने बताया था, ‘मैं इसे एक अकादमिक अनियमितता नहीं कहूंगी, बल्कि कई लोगों के बलिदान की अकादमिक हत्या कहूंगी। भगत सिंह जी को एक आतंकवादी नहीं कहा जाय, यह सुनिश्चित करने के लिए यदि मुझे असहिष्णु पुकारा जाए तो यह तमगा लेने में मैं गर्व महसूस करूंगी।’ भगत सिंह के परिजनों ने दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति योगेश त्यागी से भी मुलाकात की जिन्होंने उन्हें इस मामले को देखने का आश्वासन दिया। स्वतंत्रता सेनानी के भतीजे अभय सिंह संधू ने यहां संवाददाताओं को बताया, ‘ यह बहुत ही दुखद उदाहरण है कि आजादी के 68 साल के बाद भी देश को आजाद कराने में अपने जीवन का बलिदान देने वाले क्रांतिकारियों के लिए इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है।’

‘भगत सिंह को फांसी पर लटकाने वाले अंग्रेजों ने अपने फैसले में उन्हें ‘सच्चा क्रांतिकारी’ बताया और यहां तक उन्होंने भी आतंक या आतंकवादी जैसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया। विवाद पैदा करने के उद्देश्य से क्रांतिकारियों के इस तरह के शब्दों का उपयोग करना बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है।’ दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति योगेश त्यागी ने कहा कि इतिहास विभाग में इस पुस्तक को एक ‘संदर्भ पुस्तक’ के तौर पर पढ़ाया जाता है न कि एक ‘टेक्स्ट बुक’ के तौर पर। हालांकि उन्होंने इस संबंध में अनुरोध को संज्ञान में ले लिया है। संधू ने सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप करने और इस पुस्तक को वापस लेने की मांग की।
उन्होंने बताया, ‘उचित संशोधन एवं त्रुटि दूर कर इस पुस्तक की जगह एक नयी पुस्तक लाई जानी चाहिए।’ उन्होंने कहा कि अंग्रेजों ने भगत सिंह को एक ‘सच्चा क्रांतिकारी’ बताया था।