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8 राज्यों में हिंदुओं को अल्पसंख्यक घोषित करने की मांग, आयोग ने कहा- मेरे पास अधिकार नहीं

अश्वनी उपाध्याय ने याचिका में मांग की थी कि राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम की धारा 2(सी) को रद्द किया जाए, क्योंकि यह धारा मनमानी, अतार्किक और अनुच्छेद 14, 15 और 21 का उल्लंघन करती है.

8 राज्यों में हिंदुओं को अल्पसंख्यक घोषित करने की मांग, आयोग ने कहा- मेरे पास अधिकार नहीं
अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी. फाइल फोटो

नई दिल्ली: 8 राज्यों में हिन्दू आबादी कम है, इसलिए उन्हें अल्पसंख्यक का दर्जा दिया जाए. ये मांग सुप्रीम कोर्ट में बीजेपी नेता अश्वनी उपाध्याय ने एक याचिका दायर करके की. कोर्ट ने इस पर राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग से जवाब मांगा था. आज आयोग ने जवाब देते हुए कहा, कि उन्हें इस बात का अधिकार नहीं है, कि वो किसी समुदाय को अल्पसंख्यक का दर्जा दे. आयोग ने अपने जवाब एक जगह लिखा कि केंद्र सरकार को ये अधिकार है. ये जवाब राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने याचिकाकर्ता और सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार को भेजा है. इस मामले अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी की भी प्रतिक्रिया सामने आई है.

नक़वी ने कहा कि देश में मुसलमान, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन और पारसी यानी छह नोटिफाइड अल्पसंख्यक है. फिर भी अगर किसी राज्य को लगता है कि कही पर एक समुदाय कम है तो राज्य फैसला ले. राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्य्क्ष गय्यरुल हसन रिज़वी ने बताया, कि इस मामले में हमें अधिकार ही हासिल नहीं. समस्या इस बात की है कि आज राज्य स्तर पर ये मांग उठ रही है, कल ज़िला स्तर पर अल्पसंख्यक की परिभाषा तय करने के लिए कोर्ट चला जाएगा.

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ये मुद्दे का हल नहीं.हालांकि अल्पसंख्यक आयोग के जवाब से याचिकाकर्ता अश्वनी उपाध्याय संतुष्ट नहीं है. अश्वनी उपाध्याय ने अपनी मांग को दोहराते हुए कहा कि अल्पसंख्यक कौन है ? इसकी परिभाषा राज्य स्तर पर तय होनी जरूरी है राष्ट्रीय स्तर पर नहीं. जब तक ऐसा नहीं होगा समस्या खड़ी होती रहेगी.

अश्वनी उपाध्याय ने याचिका में मांग की थी कि राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम की धारा 2(सी) को रद्द किया जाए, क्योंकि यह धारा मनमानी, अतार्किक और अनुच्छेद 14, 15 और 21 का उल्लंघन करती है. इस धारा में केंद्र सरकार को किसी भी समुदाय को अल्पसंख्यक घोषित करने के असीमित और मनमाने अधिकार दिये गये हैं.

याचिका में यह भी कहा गया था कि हिंदू जो राष्ट्रव्यापी आकंड़ों के अनुसार एक बहुसंख्यक समुदाय है, वह पूर्वोत्तर के कई राज्यों और जम्मू-कश्मीर में अल्पसंख्यक है. याचिका में कहा गया कि हिंदू समुदाय उन लाभों से वंचित है जो कि इन राज्यों में अल्पसंख्यक समुदायों के लिए मौजूद हैं. अल्पसंख्यक पैनल को इस संदर्भ में ‘अल्पसंख्यक' शब्द की परिभाषा पर पुन: विचार करना चाहिए.