नोटबंदी : विपक्ष का 'आक्रोश दिवस' बेअसर, भाजपा ने 'फ्लॉप शो' बताया

केंद्र सरकार के नोटबंदी के फैसले के खिलाफ विपक्षी दलों ने सोमवार को देशभर में प्रदर्शन किया लेकिन उसके इस प्रदर्शन को आम लोगों का साथ नहीं मिला और न ही आम जनजीवन प्रभावित हुआ। पश्चिम बंगाल, केरल और त्रिपुरा में वाम पार्टियों ने बंद का आह्वान किया था लेकिन उनके इस बंद को आम लोगों का समर्थन नहीं मिला। कांग्रेस ने ‘जन आक्रोश दिवस’ के तौर पर देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन किया लेकिन उससे भी जनता जुड़ती नहीं दिखी। जबकि जदयू और बीजद ने विरोध प्रदर्शन में हिस्सा नहीं लिया।

नोटबंदी : विपक्ष का 'आक्रोश दिवस' बेअसर, भाजपा ने 'फ्लॉप शो' बताया

नई दिल्ली/तिरूवनंतरपुरम : केंद्र सरकार के नोटबंदी के फैसले के खिलाफ विपक्षी दलों ने सोमवार को देशभर में प्रदर्शन किया लेकिन उसके इस प्रदर्शन को आम लोगों का साथ नहीं मिला और न ही आम जनजीवन प्रभावित हुआ। पश्चिम बंगाल, केरल और त्रिपुरा में वाम पार्टियों ने बंद का आह्वान किया था लेकिन उनके इस बंद को आम लोगों का समर्थन नहीं मिला। कांग्रेस ने ‘जन आक्रोश दिवस’ के तौर पर देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन किया लेकिन उससे भी जनता जुड़ती नहीं दिखी। जबकि जदयू और बीजद ने विरोध प्रदर्शन में हिस्सा नहीं लिया।

विरोधी दलों की ओर से आहूत ‘जन आक्रोश दिवस’ के तहत हुए विरोध प्रदर्शनों और बंद को भाजपा ने ‘फ्लॉप शो’ करार दिया और कहा कि लोगों ने दोनों को खारिज कर दिया है कि क्योंकि उनकी ‘दागी’ पार्टियों में विश्वास नहीं है। तमिलनाडु में केंद्र के नोटबंदी के तरीके के खिलाफ द्रमुक के नेतृत्व में प्रदर्शन किया। 

नोटबंदी के केन्द्र के निर्णय के खिलाफ 12 घंटे के बंद को लोगों से ठंडी प्रतिक्रिया मिलने पर वाम दल का चेहरा शर्म से लाल हो गया जिससे इसके चेयरमैन बिमान बोस ने स्वीकार कि इसके पीछे की ‘सोच’ गलत थी।

द्रमुक के अलावा उसके सहयोगी दलों कांग्रेस, आईयूएमएल और वाम दलों के नेता और कार्यकर्ता 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों को अमान्य घोषित किये जाने के कारण आम लोगों को हो रही परेशानी का हवाला देते हुए सड़कों पर उतरे।

पुलिस ने बताया कि केंद्र सरकार के कार्यालयों और राष्ट्रीयकृत बैंकों के सामने प्रदर्शन करने के अलग-अलग मामलों में द्रमुक कोषाध्यक्ष एम के स्टालिन, माकपा के राज्य सचिव जी रामाकृष्णन और भाकपा के राज्य सचिव आर मुथरसन समेत इन पार्टी के अन्य कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया।

राष्ट्रीय राजधानी में माकपा और भाकपा सहित सात वाम पार्टियों ने नोटबंदी के कदम को ‘गरीब विरोधी और कारपोरेटे समर्थक’ करार दिया तथा कहा कि सरकार को नये नोटों को उपलब्ध कराए जाने तक पुराने नोटों का इस्तेमाल होना चाहिए।

ग्वालियर जिला काग्रेस के अध्यक्ष दर्शन सिंह की ‘जन आक्रोश दिवस’ प्रदर्शन के दौरान ज्ञापन सौंपने के बाद दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई।

केरल में माकपा के नेतृत्व वाले एलडीएफ ने 12 घंटे की हड़ताल की जिससे कुछ दुकानें और कारोबारी प्रतिष्ठान बंद रहे तथा राज्य परिवहन एवं निजी क्षेत्र की बस सेवाएं बाधित रहीं। राज्य में सत्तारूढ़ कांग्रेस नीत यूडीएफ ने राज भवन तक मार्च निकला और केंद्र के फैसले का विरोध किया। 

बेंगलुरु से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार नोटबंदी के खिलाफ देशव्यापी ‘जन आक्रोश रैली’ में शामिल होते हुए कर्नाटक की सत्तारूढ़ पार्टी कांग्रेस ने आज राज्य भर में प्रदर्शन किया और रैलियां निकालीं। इस प्रदर्शन से कर्नाटक विधानमंडल के दोनों सदनों की कार्यवाही भी प्रभावित हुई।

हालांकि बेंगलुरु में जनजीवन सामान्य रहा और व्यावसायिक प्रतिष्ठान, शैक्षणिक संस्थान, बैंक और निजी कार्यालय आम दिनों की तरह खुले और उनमें सामान्य तरीके से कामकाज हो रहा है एवं सार्वजनिक परिवहन और मेट्रो सेवाएं भी सुचारू ढंग से चल रही हैं।

वाम दलों द्वारा नोटबंदी के विरोध में पश्चिम बंगाल में आहूत 12 घंटे की हड़ताल राज्य में कोई खास असर डालने में विफल रही।

सरकारी और निजी बसें, ट्राम तथा अन्य निजी वाहन सड़कों पर रहे। अधिकतर दुकानें और बाजार खुले रहे। रेलवे सूत्रों ने बताया कि सियालदह और हावड़ा खंडों पर पूर्वी रेलवे की ट्रेन सेवा सामान्य रही। मेट्रो रेल सेवा भी सामान्य थी।

वाम मोर्चे द्वारा आहूत हड़ताल का सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने विरोध किया है।

तृणमूल कांग्रेस महासचिव पार्थ चटर्जी ने कहा, ‘ऐसा प्रतीत होता है कि लोगों ने हड़ताल को खारिज कर दिया है। बंगाल के लोग अच्छी तरह जानते हैं कि हड़ताल से कोई उद्देश्य पूरा नहीं होता। यदि आप जनविरोधी फैसले का विरोध करना चाहते हैं तो आपको सड़कों पर उतरना चाहिए।’ 

तृणमूल कांग्रेस ने कहा कि वह लोगों को और परेशानी में डालने के खिलाफ है क्योंकि लोग नकदी की कमी की वजह से पहले से ही मुश्किल झेल रहे हैं।

राज्य के वित्त विभाग द्वारा जारी एक परिपत्र में पश्चिम बंगाल सरकार ने अपने सभी कर्मियों को आज और कल कार्यालयों में उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। किसी प्रियजन की मृत्यु, मातृत्व अवकाश, अस्पताल में भर्ती होने तथा अन्य वास्तविक कारणों के मामले में कर्मियों को छूट प्राप्त रहेगी।

कांग्रेस के जनाक्रोश आंदोलन का आज ओड़िशा में मामूली असर देखा गया। हालांकि, लंबी दूरी की बसें सड़कों पर नहीं उतरी और शैक्षणिक संस्थान बंद रहे। ऑटो रिक्शा जैसे छोटे वाहन सभी स्थानों पर समान्य रूप से चले और व्यापारिक प्रतिष्ठान और सरकारी तथा निजी कार्यालय खुले रहें।

पांच वाम दलों के अलावा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जन आक्रोश आंदोलन किया और राज्य में सभी प्रखंडों में प्रदर्शन किया जबकि सीटू कार्यकर्ताओं ने भुवनेश्वर, पुरी और अन्य स्थानों पर जुलूस निकाला।

बिहार विधानमंडल में नोटबंदी का विरोध कर रहे कांग्रेस, राजद और भाकपा माले सदस्यों ने 500 और 1000 रुपये के नोट पर रोक लगाए जाने के खिलाफ नारेबाजी की। वहीं भाजपा सदस्यों ने विपक्ष के भारत बंद के आह्वान को गलत ठहराया और विमुद्रीकरण के पक्ष में नारेबाजी की।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नोटबंदी का लगातार समर्थन के चलते जदयू ने विपक्ष के आज के बंद से स्वयं को अलग रखा।

बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों में और इन सदनों के बाहर नोटबंदी को लेकर बंद का मुद्दा गूंजा।

नोटबंदी के खिलाफ विपक्ष प्रायोजित ‘जन आक्रोश दिवस’ का उत्तर प्रदेश में असर नजर नहीं आया। कार्यालयों में सामान्य कामकाज हुआ तो व्यावसायिक प्रतिष्ठान खुले रहे। यातायात भी सामान्य रहा। राज्य में किसी बड़े दल ने जन आक्रोश दिवस का समर्थन नहीं किया। हालांकि, कांग्रेस और आप कार्यकर्ताओं ने अलग अलग कार्यक्रम किये।

कांग्रेस नेताओं ने मार्च किया तो आप ने जनसंवाद कर लोगों को नोटबंदी के फायदे नुकसान समझाये। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव अविनाश पाण्डेय और विधायक अखिलेश प्रताप सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जीपीओ से शहीद स्मारक तक मार्च किया और मोदी सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

महाराष्ट्र में कांग्रेस और राकांपा ने प्रदर्शन किया, हालांकि आम जनजीवन प्रभावित नहीं रहा। सड़कों पर यातायात की स्थिति सामन्य थी और रोज की तरफ दफ्तर और कारोबारी प्रतिष्ठान खुले रहे। गुजरात में भी कांग्रेस ने कई स्थानों पर प्रदर्शन किया।

हिमाचल प्रदेश में भी कांग्रेस के ‘जन आक्रोश दिवस’ के आह्वान का असर नहीं दिखा जहां के व्यापारियों ने बंद के आह्वान को नजरअंदाज कर दिया।

(एजेंसी इनपुट के साथ)