Amit Shah News: शाह के भाषण के बीच कांग्रेस के सांसदों ने सदन के वॉकआउट कर दिया. लेकिन अमित शाह ने कहा, 'ये क्यों सदन छोड़कर भाग गए? मैं तो कांग्रेस पार्टी की बात ही नहीं कर रहा था, मैं तो घुसपैठियों पर बात कर रहा था.
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Parliament Winter Session: गृहमंत्री अमित शाह ने बुधवार को लोकसभा में बोलना शुरू किया तो चुनाव सुधार और SIR को लेकर उन्होंने विपक्ष के हर सवाल का जवाब दिया. जैसे-जैसे भाषण आगे बढ़ा तो संसद में गरमा-गरमी बढ़ गई. जोरदार हंगामा हुआ. नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और अमित शाह के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली. इसके बाद जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और सोनिया गांधी तक का जिक्र अमित शाह के भाषण में आया. अमित शाह ने कहा कि 2004 तक, किसी भी राजनीतिक दल ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का विरोध नहीं किया था.
'मतदाता सूचियों की SIR जरूरी'
साफ वोटर लिस्ट और स्वस्थ लोकतंत्र को बनाए रखने के लिए यह प्रक्रिया जरूरी है. अगर मतदाता सूचियां, जो चुनावों का आधार हैं, सटीक और अपडेट नहीं हैं, तो हम चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता की उम्मीद नहीं कर सकते. इसलिए, मतदाता सूचियों की एसआईआर जरूरी है. इसी के मुतबिक चुनाव आयोग ने 2025 में एसआईआर कराने का फैसला लिया है. इस दौरान अमित शाह ने SIR का मतलब भी समझा दिया.
#WATCH | Opposition MPs walk out of Lok Sabha amid Union Home Minister Amit Shah's reply to the discussion on electoral reforms, in the House. pic.twitter.com/3bhl0W7t00
— ANI (@ANI) December 10, 2025
सदन का वॉकआउट
इस बीच कांग्रेस के सांसदों ने सदन के वॉकआउट कर दिया. लेकिन अमित शाह ने कहा, 'ये क्यों सदन छोड़कर भाग गए? मैं तो कांग्रेस पार्टी की बात ही नहीं कर रहा था, मैं तो घुसपैठियों पर बात कर रहा था. हमारी नीति है, Detect, Delete, Deport और हम संवैधानिक प्रक्रिया के तहत इसे पूरा करेंगे. जबकि उनकी ( कांग्रेस) नीति है, घुसपैठ को Normalize कर दो, मान्यता दे दो और मतदाता सूची में डालकर Formalize कर दो. अमित शाह ने आगे कहा, जब इनके जमाने में चुनाव होते थे, बिहार और यूपी में पूरे के पूरे पर्चों के बक्से गायब हो जाते थे. ईवीएम आने के बाद यह सब बंद हो गया. चुनाव की चोरी बंद हुई है, इसलिए पेट में दर्द हो रहा है. दोष ईवीएम का नहीं है, चुनाव जीतने का तरीका जनादेश नहीं था, भ्रष्ट तरीका था. आज ये एक्सपोज हो चुके हैं.
#WATCH | Speaking on electoral reforms, in Lok Sabha, Union HM Amit Shah says, "I would like to tell you about 3 incidents of voter chori. First, after independence, the PM of the country was to be elected...Sardar Patel got 28 votes and Jawaharlal Nehru got 2 votes. But… pic.twitter.com/PaHocH0lzw
— ANI (@ANI) December 10, 2025
'ये लोग राजीव गांधी को भी नहीं मानते'
शाह ने आगे कहा, 15 मार्च 1989 को राजीव गांधी के शासनकाल में ईवीएम लाई गई थी. 2002 में याचिका दायर हुई, तो इस देश के सर्वोच्च न्यायालय के जजों ने ईवीएम के बदलाव को उचित ठहराया. ये सर्वोच्च न्यायालय को नहीं मानते, ये राजीव गांधी को भी नहीं मानते. 1998 में मध्यप्रदेश, राजस्थान और दिल्ली की 16 विधानसभा सीटों में इसका ट्रायल लिया गया. हर तरह से जांच करके ईवीएम का उपयोग 2004 में किया गया, और 2004 के चुनाव में कांग्रेस जीत गई. उस समय ईवीएम पर चर्चा बंद हो गई. 2009 का चुनाव भी ईवीएम से हुआ, ये जीत गए और चर्चा फिर बंद हो गई.
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